रामकृष्ण मठ में मना ‘‘वैशाखी‘‘ उत्सव
मठ अध्यक्ष ने सत्य, सेवा, प्रेम और त्याग के मार्ग पर चलने का किया आह्वान

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राम कृष्ण मठ में वैशाखी उत्सव मनाया गया। बुधवार को
रामकृष्ण मठ, निराला नगर में ‘‘वैशाखी उत्सव पूरे हर्षोउल्लास एवं बड़े ही धार्मिक माहौल में पारम्परिक एवं विधिवत अनुष्ठानिक प्रक्रिया के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भक्तों ने जबरदस्त उत्साह के साथ मनाया।
साथ ही समस्त कार्यक्रम हमारे यूट्यूब चैनेल : ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम को दूर दराज के भक्तगणों ने इन्टरनेट के माध्यम से भी घर बैठे सजीव प्रसारण देखा।
उत्सव का शुभारम्भ रामकृष्ण मठ के मुख्य मन्दिर में प्रातः 4:30 बजे मंगल आरती व मंगलअनुशासनम् द्वारा हुआ। प्रातः 6ः50 बजे वैदिक मन्त्रोंच्चार एवं गीता पाठ रामकृष्ण मठ, लखनऊ के स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में किया गया ।
वही मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द ऑनलाइन सत प्रसंग किया। इसके तत्पश्चात ठाकुर जी की पूजा स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा की गयी तथा उपस्थित भक्तगणों को फल प्रसाद वितरित किये गये।
मध्याह्न में ठाकुर जी को विशेष भोग अर्पण किया गया। तदुपरान्त भक्तों को पायस प्रसाद वितरित किया गया । अपराह्न 3ः30 बजे ठाकुर जी को विशेष भोग अर्पण किया गया।
‘वैशाखी’ के पावन अवसर पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने अपने संदेश में कहा कि नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, नये संकल्प और आध्यात्मिक उन्नति का पावन अवसर है।
उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि हम सभी श्रीरामकृष्ण, माँ सारदा और स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें तथा सत्य, सेवा, प्रेम और त्याग के मार्ग पर अग्रसर हों।
उन्होंने आगे कहा कि यह नववर्ष हमें आत्मचिंतन, सदाचार और मानव सेवा के प्रति अधिक जागरूक बनाए तथा समाज में सद्भाव, शांति और करुणा का विस्तार हो। इसी में इस उत्सव की सच्ची सार्थकता निहित है।
सांयकाल ठाकुर जी की संध्यारति के पश्चात रविन्द्र संगीत ( रवीन्द्रनाथ टैगौर द्वारा रचित व चयनित गीत) गायन का आयोजन हुआ।
जिसमें राजधानी के जाने माने गायक अनिमेष मुखर्जी नें मनमोहक प्रस्तुति दी। जिसे सुनकर वहां उपस्थित श्रोतागण मन्त्रमुग्ध हो गये उस दौरान तबले पर संगत लखनऊ के शुभम राज तथा खोल पर संगत गोपाल भट्टाचार्या ने किया।
कार्यक्रम का समापन उपस्थित भक्तजनों को प्रसाद वितरण के साथ हुआ।



