डॉ आंबेडकर महासभा ने किया विश्व शान्ति को मार्च
भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक -केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में बौद्ध भिक्षुओं ने विश्व शांति के लिए पैदल मार्च किया। सोमवार को डॉ आंबेडकर महासभा द्वारा विश्व शान्ति के लिए पैदल मार्च का आयोजन किया गया।
जिसमें सैकड़ों की संख्या में बौद्ध भिक्षु और डॉ आंबेडकर के अनुयायियों ने आम्बेडकर महासभा से लेकर गंज स्थित डॉ आंबडेकर की प्रतिमा तक शान्ति मार्च किया गया ।
जिसमें बौद्ध भिक्षुओ ने अपने हाथों में युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए, विप्लव नहीं शान्ति चाहिए, नफरत मिटाओं-शान्ति बढ़ाओं और सबका साथ, सबका विकास-विश्व शान्ति का आधार, लिखी तख्तियाँ लेकर मार्च कर रहे थे।
शान्ति मार्च को अपने आवास पर संबोधित करते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आज जब विश्व के अनेक देश संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रहे है।
ऐसे समय में भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक तथा मानवता के लिए आशा का आधार बन कर उभर रही है। उन्होंने कहा था कि जब मैं बुद्ध के अवशेषों को लेकर रूस गया तो वहां पर लाखों की संख्या में
बौद्ध मतावलम्बी दर्शन को आए और मुझे आशीर्वाद दिया। श्री मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध के करूणा, मैत्री और शान्ति के संदेशों से ही दुनिया में शान्ति कायम हो सकती है।
इसके पहले हजरतगंज स्थित डॉ. आंबेडकर प्रतिमा स्थल पर डॉ आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं सदस्य विधान परिषद् डॉ लालजी प्रसाद निर्मल ने अपने संबोधन में कहा कि पूरी दुनिया में युद्ध के कारण अशान्ति फैली हुयी है।
इसे बुद्ध के शान्ति के संदेश से ही दूर किया जा सकता है। उन्होन कहा कि चीन, रूस और अमेरिका परमाणु स्टॉक बढ़ा रहे है। अगर विश्व युद्ध हुआ तो दुनिया की बड़ी आबादी, जलवायु, पशु-पक्षी और मानव जीवन संकट ग्रस्त होंगे।
वैश्विक सप्लाई चेन टूटेगी और मुद्रा स्फीति बढ़ेगी। डॉ निर्मल ने कहा कि बुद्ध ने शान्ति का संदेश दिया और कहा कि बैर से बैर शान्ति नहीं होता, वरन मैत्री से शान्ति सम्भव है।
बौद्ध भिक्षुओं का शान्ति मार्च, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास पर भी गया। जहां बौद्ध भिक्षुओं को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने चीवर दान किया और बौद्ध अनुयायियों को खीर खिलाई।
इस शान्ति, मार्च में बौद्ध भिक्षु शीलरतन, भन्तें प्रज्ञासार, डॉ. आंबेडकर सभा के पदाधिकारी प्रमोद कुमार सरोज, अमरनाथ प्रजापति. रामचन्द्र पटेल,सर्वेश पाटिल, डॉ सत्यादोहरे, खुशी लाल, सहित सैकड़ो बौद्ध भिक्षु और डॉ आंबेडकर के अनुयायी सम्मिलित थे।



