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डॉ मिश्रा के निधन पर विवेकानंद अस्पताल में फैला शोक 

संस्थान में शोक सभा, दी श्रद्धांजलि 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। विवेकानंद अस्पताल में डॉ यूके मिश्रा के निधन पर शोक की लहर दौड़ गयी।

सोमवार को विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान में लंबे समय सेवा प्रदान करने वाले न्यूरो फिजीसिएन डा यूके मिश्रा का आकस्मिक निधन बीते 10 अप्रैल को नई दिल्ली के एस्कार्ट हास्पिटल में हो गया ।

डा मिश्रा अपने मरीजो के प्रति सदैव सौम्य व मृदुभाषी होने के साथ ही साथ जिम्मेदार व संवेदनपूर्ण भी रहते थे। वे स्वामी विवेकानन्द के अनन्य अनुयायी थे। उनके आदर्शो के अनुपालन करते हुए हर समय मरीजों की सेवा में न केवल तत्पर रहते थें बल्कि कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा प्रदान भी करते थे।

डा मिश्रा ने संजय गॉधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान के तंत्रिकातंत्र विभाग में चिकित्सक के रूप में अपने व्यवसायिक करियर की शुरूआत की। उन्होंने ही एसजीपीजीआई में तंत्रिकातंत्र (न्यूरो) विभाग को स्थापित करने का काम किया।

उनके पॉच दशको के कार्यकाल में लगभग 300 चिकित्सा विद्यार्थियों ने डीएम की डिग्री हासिल की, जो अपने आप में चिकित्सा क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान है। इसके साथ ही साथ नये औषधियों के परीक्षण के लिए शोध के क्षेत्र से भी जुड़े हुए थे।

जिसके लिए लिए अभी हाल ही में एक प्रयोगशाला की स्थापना संस्थान के भूतल में किया गया है। जिसमें नये औषधियों के परीक्षण के लिए तमाम तरह के प्रयोग किये जा रहे है। ताकि नयी बीमारियों से लडने के लिए नये औषधियों की खोज की जा सके।

उनके अचानक मृत्यु से संस्थान को भारी क्षति हुई है। संस्थान सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द द्वारा अस्पताल परिसर में शोक सभा का आयोजन किया।

जिसमें उन्होंने 2 मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक सभा के दौरान डाक्टर, अधिकारी, कर्मचारी व उपचारिकायें अन्य लोग मौजूद रहे।

संस्थान के सचिव ने डा मिश्रा के मृदुल स्वभाव व सरलता का बखान करते हुए बताया कि इतने बडे़ चिकित्सक होने के बावजूद भी उन्हें तनिक अभिमान नही था वह अपने समय के न केवल पाबंद थे बल्कि तय समय के अन्दर मरीजों को परामर्श देना उपचार करना उनका नियम था।

वह कभी भी आने में बिलम्ब करते थे ताकि उनके मरीजो को अनावश्यक इंतजार न करना पडे़। आज के इस मौजूदा समय में इतना नियमबद्ध व समय के पाबंद चिकित्सक पाना लगभग असंभव सा है।

इस शोक सभा में प्लास्टिक शर्जरी के जाने माने शल्य चिकित्सक डा एसडी पाण्डेय ने उनके जीवन से जुडी तमाम यादो को साझा करते ही लोग भावुक हो गए । वही संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा बीके सिंह ने अपने कॉलेज के दिनो की चर्चा करते हुए बताया कि वह डा मिश्रा के जूनियर थे।

डा मिश्रा सीनियर होने के बावजूद भी अपने जूनियरों के मृदु, सरल व मददगार रहते थे। इतना ही नही इस अवसर पर प्लास्टिक शर्जरी के विभागाध्यक्ष

डा अमित अग्रवाल, तंत्रिकातंत्र चिकित्सक (न्यूरो फिजीसिएन) डा. सर्वेश कुमार चौधरी जो उनके विद्यार्थी भी रहे है व क्रिटिकल केयर के विभागाध्यक्ष डा राजीव गुप्ता ने उनकी स्मृतियों को स्मरण किया।

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