कल वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्कृति मजबूत करने को होगी कार्यशाला
एसजीपीजीआईएमएस में चल रही अनुसंधान गतिविधियां होंगी प्रस्तुत

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्कृति मजबूत करने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में कल 13 अप्रैल को संस्थान के पुस्तकालय परिसर के खुराना सभागार में “अनुसंधान प्रोत्साहन पर पहली कार्यशाला” का आयोजन किया जायेगा।
यह कार्यशाला संस्थान के अनुसंधान प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित की जाएगी। जिसका उद्देश्य संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स और शोधकर्ताओं को नैदानिक, अनुवांशिक और सहयोगात्मक अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में अवसरों का पता लगाने के लिए एक व्यापक और एकल मंच प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन, डीन प्रो. शालीन कुमार और सीबीएमआर के निदेशक प्रो. नीरज सिन्हा की उपस्थिति में किया जाएगा।
साथ ही स्वास्थ्य सेवा में अनुसंधान को आगे बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला जाएगा। इस कार्यशाला में संस्थान में चल रही अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन भी प्रस्तुत किया जाएगा।
विशेषज्ञों के व्याख्यानों की एक श्रृंखला में नैदानिक परीक्षणों के बुनियादी ढांचे, कोर प्रयोगशाला सुविधाओं, पशु अनुसंधान, स्टेम सेल अनुसंधान और जैव चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (सीबीएमआर) के साथ सहयोग के अवसरों जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।
कार्यक्रम में नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के लिए भारत के सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्कों (एसटीपीआई) के माध्यम से उद्योग-अकादमिक सहयोग पर भी प्रकाश डाला जाएगा।
प्रसिद्ध संकाय सदस्य विषयगत प्रस्तुतियाँ देंगे। जिनमें अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और भविष्य के अवसरों के बारे में जानकारी साझा की जाएगी।
इसके बाद एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र होगा। जिसमें प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ जुड़ने और अनुसंधान चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।
यह कार्यशाला अनुसंधान उत्पादन बढ़ाने, अंतःविषयक सहयोग को बढ़ावा देने और संस्थान के भीतर एक जीवंत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने की उम्मीद है।
सभी संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स और शोधार्थियों को इस शैक्षणिक पहल में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।



