बिना कार्डियोलॉजिस्ट के चल रहा प्रदेश का बड़ा चिकित्सालय
अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के 7 पद, अभी भी खाली

लगभग 784 बेड का अस्पताल कार्डियोलॉजिस्ट के बगैर कैसे होगा स्वस्थ भारत का सपना पूरा
लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश सरकार स्वस्थ भारत का बीड़ा लेकर अस्पतालों को अत्याधुनिक बनाने में युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। राजधानी में स्थित प्रदेश का बड़ा बलरामपुर चिकित्सालय बिना कार्डियोलॉजिस्ट के संचालित हो रहा है।
इसके अलावा अस्पताल में न्यूरो फिजिशियन की भी कमी बनी हुई है, जो अभी तक पूरी नहीं की जा सकी है। जिसमें सिर्फ न्यूरो सर्जन के दो डॉक्टर उपलब्ध हैं। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों की प्रतिदिन की ओपीडी के आंकडों से अनुमान लगाया जा सकता है।
जबकि इमरजेंसी पर भी मरीजों का भारी भरकम बोझ बना रहता है। ऐसे में स्वस्थ भारत का सपना कैसे साकार हो पायेगा। जब मरीजों को एक स्थान पर सभी बीमारियों इलाज उपलब्ध नहीं होगा तो वोह कैसे स्वस्थ हो पाएंगे। बता दें कि अस्पताल में विगत लम्बे समय से कार्डियोलॉजिस्ट के 7 पद खाली चल रहें हैं, इस पर अभी भी संबधित अधिकारियो ने कोई तत्परता नहीं दिखाई है।
वहीं भीषण ठंड में हृदय रोगियों की भीड़ बड़े चिकित्सा संस्थानों में देखी जा सकती है और उससे अनुमान भी लगाया जा सकता है। जिसमें केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी में इस कड़ाके की ठंड में हृदय रोगियों के परिजन रात्रि से कतार में खड़े होकर अपना नंबर आने का इंतजार करते रहते है।
मरीज बीमारी से जूझ रहा है और मरीजों के परिजनों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। बल्कि संबधित विभाग में वर्चुअल मीटिंग और लगातार दिशा निर्देश जारी होते रहते है और जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। जब जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होंगे तो बड़े संस्थानों पर बोझ बढ़ना स्वाभाविक है।
सम्बंधित अधिकारियो द्वारा स्टेमी कार्यक्रम चलाया जा रहा है कि हृदय रोगियों का उपचार कैसे करना है। जब सम्बंधित बीमारी के उपचार के लिए डॉक्टर नहीं होंगे तो इलाज कैसे संभव हो पायेगा। जब लगभग 784 बेड के अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होंगे तो अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में मरीजों का आखिर बोझ कैसे कम होगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ यूसुफ़ अंसारी हृदय रोगियों का उपचार कर रहें हैं, बल्कि वोह जहाँ से कार्डियोलॉजी का डिप्लोमा किया है, उसे यूपी मेडिकल काउंसिल मान्यता प्रदान नहीं करता है ऐसा बताया रहा है। बिना कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर मरीजों को 2 डी, व टीएमटी की जाँच लिख दें रहें हैं।
जब कि कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं है तो जाँच रिपोर्ट को कौन देखेगा और इलाज कौन करेगा यह भी अस्पताल की व्यवस्थाओ पर सवाल खड़े कर रहा है। इसके सम्बंधित जिम्मेदारो को मरीजों की भलाई देखते हुए कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर बिना देरी किये नियुक्ति करनी चाहिए। जिससे बड़े चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को भटकना न पड़े।
जवाबदेही से कोसो दूर जिम्मेदार..
अस्पताल प्रसाशन जवाबदेही से काटा किनारा, फोन पर नहीं मिला माकूल जवाब।



