प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में पर्यावरण पर बैठक
विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ वनाधिकारी, विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधकर्ता हुए शामिल

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में पर्यावरण पर बैठक आयोजित की गयी। बुधवार को
प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के प्रभावी न्यूनीकरण एवं दीर्घकालिक समाधान के लिए अरण्य भवन स्थित पारिजात सभा कक्ष में प्रमुख सचिव, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अध्यक्षता में ‘‘मानव-वन्यजीव संघर्ष के न्यूनीकरण के लिए परामर्शी बैठक की।
बैठक में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ वनाधिकारी, विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों के प्रतिनिधियों द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से प्रतिभाग किया गया।
बैठक के दौरान देश के विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसस ) एवं नवीन तकनीकों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अपने संबोधन में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक जटिल एवं सतत विकसित होने वाली चुनौती है, जिसका कोई एक स्थायी समाधान नहीं है।
इसके लिए शासन, वन विभाग एवं स्थानीय समुदायों के बीच साझेदारी एवं साझा उत्तरदायित्व अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में “लिविंग विदलेपर्ड्स” जैसे कार्यक्रमों, स्कूल आधारित जागरूकता
अभियानों, मीडिया संवेदनशीलता कार्यशालाओं तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से संघर्ष की घटनाओं में कमी लाने के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र मॉडल से प्रेरित होकर अपनाए गए सक्रिय (प्रोएक्टिव ) दृष्टिकोण, हॉटस्पॉट मैपिंग, विशेष प्रशिक्षण प्राप्त रेस्क्यू टीमों, वन्यजीव प्रबंधन में प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों एवं तकनीक आधारित हस्तक्षेपों का भी उल्लेख किया।
साथ ही बंदर प्रबंधन के लिए उत्तराखंड में संचालित बड़े स्तर के नसबंदी कार्यक्रम एवं उसके सकारात्मक प्रभावों को भी साझा किया। उन्होंने बल दिया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का उद्देश्य वन्यजीवों का उन्मूलन नहीं, बल्कि मानव एवं वन्यजीवों के सहअस्तित्व को सुनिश्चित करते हुए संघर्ष को न्यूनतम करना होना चाहिए।
हाथी व अन्य प्रजातियों के लिए “स्टेट एक्शन प्लान” तैयार करने के निर्देश दिये गये, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, राजस्थान के प्रभावी कार्यप्रणालियों के अध्ययन हेतु शीघ्र एक्सपोजरविजिट माह मई में आयोजित करने के निर्देश दिये गये, रेस्क्यू सेंटर के सामुदायिक सहभागिता आधारित मॉडलों के अध्ययन पर विशेष बल दिया गया।
विभागीय कर्मचारियों एवं समुदाय के क्षमता विकास के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के साथ सम्भावनाओं को तलाषने पर बल दिया गया।
बैठक में प्राप्त सुझावों एवं अनुशंसाओं का परीक्षण करते हुए विभागीय कार्ययोजनाओं में समुचित रूप से सम्मिलित किए जाने पर बल दिया गया। सुनील चैधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष द्वारा अन्य प्रदेशों में अपनाई जा रही नवीन तकनीक एवं प्रभावी कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसस ) को
उत्तर प्रदेश में लागू करने के सम्बन्ध में विस्तृत अध्ययन कर अपेक्षित कार्रवाई के निर्देश दिए गये। उनके द्वारा यह भी निर्देश दिये गये कि बैठक में विभिन्न विशयविशेषज्ञों द्वारा दिये गये प्रस्तुतिकरण का विशलेषण कर उत्तर प्रदेश की दृष्टि से उपयोगी एवं उपयुक्त विशयों का समावेष करते हुए मानव वन्यजीव संघर्ष के न्यूनीकरण के लिए रोडमैप तैयार करने की कार्रवाई की जाए।
बैठक में अनुराधा वेमुरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव द्वारा उत्तर प्रदेश में वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान परिस्थिति एवं उसके आयामों के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण किया गया।
बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान परिस्थितियों, उसके कारणों, स्थानीय चुनौतियों तथा संभावित व्यावहारिक समाधानों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों द्वारा वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी,
जन-जागरूकता, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, सामुदायिक सहभागिता, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा संवेदनशील क्षेत्रों में समन्वित कार्ययोजना विकसित किए जाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन हेतु आयोजित परामर्श बैठक में विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा अपने अनुभव, सर्वोत्तम प्रथाएं एवं नवाचार साझा किए गए।
इस अवसर पर धनंजय मोहन, आईएफएस (सेवानिवृत्त), पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, उत्तराखण्ड द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन से संबंधित अनुभव साझा किए गए।
उन्होंने वर्ष 2016 से तेंदुआ, बाघ, काला भालू एवं मवेशी शिकार (कैटल लिफ्टिंग ) से संबंधित संघर्षों के प्रबंधन में अपनाई गई रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने टिहरी, पौड़ी एवं पिथौरागढ़ जैसे तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों में “लिविंग विथ लेओपार्ड ” जैसे सामुदायिक जागरूकता एवं सहभागिता कार्यक्रमों की सफलता का उल्लेख किया।
डॉ. अरित्राक्षेत्री, नेशनल लीड (हाथी संरक्षण), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, नई दिल्ली द्वारा उत्तर प्रदेश में हाथियों की गतिविधियों एवं रुझानों, विशेषकर कतर्नियाघाट एवं दुधवा परिदृश्य के संदर्भ में प्रस्तुतीकरण
दिया गया। उन्होंने समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रमों, सुदृढ़ कार्ययोजना, मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डीएनए आधारित हाथी पहचान (DNA- based identification) के महत्व पर बल दिया।
डॉ. पराग निगम, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वन्यजीव संस्थान भारत देहरादून ने अपने 32 वर्षों के अनुभव के आधार पर मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारणों एवं उसके निवारण के लिए प्रभावी रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग द्वारा विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों (जैसे बाघ, हाथी आदि) की पहचान एवं निगरानी में संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
डॉ. श्रेया शेट्टी, समन्वयक, संरक्षण सामाजिक विज्ञान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, नई दिल्ली ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन के लिए निवारक उपायों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने “बाघ मित्र”, “गज मित्र” एवं ग्राम स्तरीय स्वयंसेवी सुरक्षा तंत्र (विलेज वालंटियर्स प्रोटेक्शन फ़ोर्स )
जैसे सामुदायिक सहभागिता मॉडल को प्रभावी बताया। आशीष ठाकरे, आईएफएस मुख्य वन संरक्षक, पुणे, महाराष्ट्र ने महाराष्ट्र में तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों में सौर बाड़ (सोलर फेंसिंग ) की व्यवस्था, जो राज्य सरकार द्वारा 100%अनुदानित है, पर प्रकाश डाला।
उन्होंने जुनार स्थित माणिकदोह तेंदुआ रेस्क्यू सेंटर का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसका तकनीकी संचालन वाइल्डलीफे SOS द्वारा तथा प्रशासनिक नियंत्रण महाराष्ट्र वन विभाग द्वारा किया जाता है।
सुश्री नेहा पंचामिया, संस्थापक एवं अध्यक्ष, RESQ चैरिटेबल ट्रस्ट ने महाराष्ट्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, रेस्क्यू एवं पुनर्वास कार्यों में अपने 18 वर्षों के अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि उनकी संस्था वर्ष 2007 से वन विभाग के साथ साझेदारी में कार्य करते हुए प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक वन्यजीवों के रेस्क्यू, उपचार एवं पुनर्वास में सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने सामुदायिक सहभागिता एवं संस्थागत सहयोग के समन्वित मॉडल को प्रभावी बताया।
प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बी चन्द्रकला, सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश सुनील चैधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, अनुराधा वेमुरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव,
एन रविन्द्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, आईटी, दीपक कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना एवं कृशि वानिकी, ललित कुमार वर्मा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, कैम्पा, प्रदेश के टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर व अन्य प्रभागीयवनाधिकारियों एवं द्वारा प्रतिभाग किया गया।
आयोजित बैठक का संचालन राम कुमार द्वारा किया गया।



