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अंगदान से व्यक्ति मृत्यु के बाद भी अनेक लोगों के जीवन में रहता जीवित- ब्रजेश पाठक 

नेफ्रोलॉजी विभाग का मना 39वाँ स्थापना दिवस 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। एसजीपीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग का 39वाँ स्थापना दिवस एचजी खुराना ऑडिटोरियम में उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया।

शनिवार को संस्थान में देश भर से प्रख्यात नेफ्रोलॉजिस्ट, प्रत्यारोपण चिकित्सक, सर्जन, नीति निर्माता, स्वास्थ्यकर्मी, दाता परिवार और मेडिकल छात्र एक साथ आए।

समारोह के दौरान लगभग चार दशकों में विभाग की उल्लेखनीय यात्रा की उपलब्धियों को उजागर किया गया तथा भारत में मृत दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रमों के बढ़ते महत्व को भी दर्शाया गया। बता दें कि इस

विभाग की स्थापना 15 मई 1987 को विभाग के प्रथम विभागाध्यक्ष डॉ. विजय खेर तथा अग्रणी विशेषज्ञ प्रो. आरके शर्मा एवं प्रो. अमित गुप्ता की नियुक्ति के साथ हुई थी।

वर्तमान विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद ने वर्ष 2022 से स्थापना दिवस समारोह को नई दिशा देते हुए प्रत्येक वर्ष थीम-आधारित सीएमई (कंटिन्यूईंग मेडिकल एजुकेशन ) आयोजित करने की परंपरा शुरू की।

इस वर्ष का विषय था। “फ्रॉम विज़न टू रियलिटी : रेप्लीकेटिंग सक्सेसफुल डिसीस्ड डोनर ट्रांसप्लांटेशन मॉडल्स एक्रॉस उत्तर प्रदेश ” अर्थात उत्तर प्रदेश में सफल मृत अंगदाता प्रत्यारोपण मॉडल को विकसित एवं विस्तारित करना। शनिवार को

ईश्वर ने जो दायित्व उसे इमानदारी से निर्वहन करना- ब्रजेश पाठक 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहां की ईश्वर ने जो हमें दायित्व दिया है, उसका ईमानदारी से निर्वहन करना है।

उन्होंने कहा कि जैसे सोना है उसे गलाओगे पीटोगे तभी सुंदर आकर ले पाएगा। सभी लोग चुनौती को स्वीकार करें और यह तैयार करो की बीमारी की संख्या क्यों बढ़ रही है। लोग किडनी लीवर हार्ट अटैक 28 से 20 साल बच्चों को हो रहा है।

ऐसा क्यों? बीमारी बढ़ रही है इस पर काम करना है। जंक फूड खा रहे हैं जो पीना है पी रहे हैं जो नहीं पीना वह भी पी रहे हैं। सोचो 20-20 पैक लेंगे,पता चला पटियाला पी रहें हैं। हमें यह काम नहीं करना है,हमें अपने प्रदेश को स्वस्थ बनाना है।

डिप्टी सीएम ने संस्थान के नेतृत्व की सराहना की। साथ ही प्रदेश में अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर उन्होंने लखनऊ की स्वर्गीय लक्ष्मी तथा मध्य प्रदेश के एक अन्य मृत अंगदाता के परिजनों को सम्मानित किया। जिन्होंने ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद अंगदान की अनुमति देकर कई लोगों को नया जीवन प्रदान किया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अंगदान के माध्यम से व्यक्ति मृत्यु के बाद भी अनेक लोगों के जीवन में जीवित रहता है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं संस्थान निदेशक

पद्मश्री प्रोफेसर आरके धीमन ने सभा को संबोधित करते हुए प्रत्यारोपण सेवाओं को मजबूत करने में जागरूकता और संस्थागत सहयोग की परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में बताया। चंडीगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में सफल अंगदान पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समर्पित टीम वर्क, जनविश्वास और समन्वित स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में भी

इसी तरह की उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने क्षेत्र में अंगदान जागरूकता बढ़ाने और प्रत्यारोपण सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सीएमई के दौरान प्रो. नारायण प्रसाद ने उत्तर प्रदेश में मृत अंगदाता प्रत्यारोपण की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की संभावनाएँ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 24,000 सड़क दुर्घटना जनित मृत्यु होती हैं।

यदि इनमें से केवल 1फीसदी मामलों में भी सफल मृत अंगदान हो सके, तो लगभग 480 किडनी प्रत्यारोपण तथा 240 लिवर एवं हृदय प्रत्यारोपण प्रतिवर्ष संभव हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त फेफड़े, अग्न्याशय, त्वचा, हड्डियाँ एवं अन्य ऊतक भी प्रत्यारोपण के लिए प्राप्त किए जा सकते हैं।

मुंबई के जसलोक अस्पताल की डॉ. श्रुति टंडन ने ब्रेन डेथ घोषणा की जटिलताओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया तथा अंगों को सुरक्षित रखने एवं सफल प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक चिकित्सीय उपायों की जानकारी दी।

अहमदाबाद स्थित आईकेडीआरसी के डॉ. विवेक कुटे ने गुजरात के सफल अंग प्रत्यारोपण मॉडल के अनुभव साझा किए तथा बताया कि किस प्रकार ऐसे मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू किया जा सकता है।

चेन्नई से आए डॉ. नटराजन गोपालकृष्णन, जो तमिलनाडु ट्रांसप्लांट अथॉरिटी के अध्यक्ष हैं, ने बताया कि तमिलनाडु देश में मृत अंगदान के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है और वर्ष 2026 के पहले दो महीनों में ही वहाँ 57 मृत अंगदान हो चुके हैं।

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोट्टो ) के निदेशक प्रो. अनिल कुमार ने “राज्यों में अंगदान कार्यक्रमों को सशक्त बनाने की रणनीतियाँ” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। वहीं यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एमएस अंसारी ने अंग निकासी एवं मृत अंगदाता प्रत्यारोपण की शल्य जटिलताओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में स्थापना दिवस पुरस्कार समारोह भी आयोजित किया गया। जिसमें विभाग के फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीशियनों एवं सहायक कर्मचारियों को रोगी सेवा, प्रत्यारोपण, शिक्षण, अनुसंधान एवं विभागीय विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

स्थापना दिवस व्याख्यान प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद गुप्ता द्वारा दिया गया।

इस अवसर पर विभाग के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विजय खेर को नेफ्रोलॉजी एवं प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए “लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया।

उन्हें भारत में नेफ्रोलॉजी और किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उनके असाधारण और अग्रणी योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता ने विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होने की नींव रखी।

सीएमई की सह-अध्यक्ष डॉ. अनुपमा कौल ने गुर्दे की बीमारियों के प्रबंधन, डायलिसिस और प्रत्यारोपण की बढ़ती लागत को देखते हुए गुर्दे की बीमारियों की रोकथाम की आवश्यकता के बारे में एक सशक्त संदेश दिया।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. मानस रंजन पटेल एवं डॉ. संतोष कुमार वी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर प्रो. नारायण प्रसाद ने कहा कि यह स्थापना दिवस केवल 39 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में मजबूत एवं सतत मृत अंगदाता प्रत्यारोपण प्रणाली विकसित करने के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अंगदाता परिवारों का निःस्वार्थ योगदान पूरे चिकित्सा समुदाय को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।

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