उत्तर प्रदेशधर्म-अध्यात्मबड़ी खबर

 भक्ति, ईश्वर के ज्ञान को सरल, सहज बना देती -मुक्तिनाथानन्द 

चंद्र और सूर्य दोनों ईश्वर प्राप्ति का मार्ग 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। ईश्वर को पाने का माध्यम चन्द्र और सूर्य दोनों को प्राप्त करना होगा।

रविवार को प्रातः कालीन सत् प्रसंग में रामकृष्ण मठ अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ज्ञान और भक्ति दोनों का विशेष महत्व माना गया है।

अनेक संतों और महापुरुषों ने इन दोनों मार्गों को ईश्वर प्राप्ति का साधन बताया है। ज्ञान और भक्ति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

ज्ञान हमें ईश्वर के स्वरूप को समझने की क्षमता देता है, जबकि भक्ति उस ईश्वर के साथ प्रेमपूर्ण संबंध स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है। स्वामी ने बताया कि ठाकुर ने ज्ञान की तुलना सूर्य से और भक्ति की तुलना चंद्रमा से की है।

सूर्य का प्रकाश अत्यंत तीव्र होता है, जिसे सीधे देख पाना कठिन होता है। उसी प्रकार केवल ज्ञान के माध्यम से निराकार ब्रह्म को समझना सामान्य मनुष्य के लिए सरल नहीं है।

दूसरी ओर, चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को शीतल और मधुर बना देता है। ठीक इसी प्रकार भक्ति, ईश्वर के ज्ञान को सरल, सहज और हृदयग्राही बना देती है।

भक्ति के माध्यम से मनुष्य ईश्वर के निकटता का अनुभव करता है और उनके साथ आत्मीय संबंध स्थापित कर पाता है। ज्ञान मार्ग का साधक ईश्वर के निराकार स्वरूप को समझने का प्रयास करता है। वह तर्क, विवेक और चिंतन के माध्यम से सत्य की खोज करता है।

किंतु केवल ज्ञान से हृदय की पूर्ण तृप्ति नहीं होती। मनुष्य का हृदय प्रेम चाहता है, अपनापन चाहता है, और यही तत्व भक्ति में मिलता है। भक्ति मार्ग साधक को ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और आनंद का अनुभव कराता है। इसलिए ज्ञान और भक्ति दोनों का संतुलन आवश्यक माना गया है।

स्वामी ने कहा कि साकार रूप का महत्व भी इसी संदर्भ में समझाया गया है। जब ईश्वर अवतार लेकर साकार रूप में प्रकट होते हैं, तब वे निराकार ब्रह्म से भिन्न नहीं होते। जैसे जल और बर्फ मूल रूप से एक ही तत्व हैं, उसी प्रकार निराकार और साकार ईश्वर में कोई भेद नहीं है।

साकार रूप भक्तों के लिए ईश्वर को अधिक सुलभ और अनुभव योग्य बना देता है। भक्त भगवान के रूप, नाम और लीला के माध्यम से उनसे जुड़ पाता है और आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करता है।

जीवन में भक्ति का विशेष महत्व है। केवल बौद्धिक ज्ञान से मनुष्य को शांति नहीं मिलती, बल्कि ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण से जीवन में आनंद और संतोष आता है।

भक्ति मनुष्य के हृदय को पवित्र बनाती है और उसे अहंकार, द्वेष तथा मोह से दूर करती है। जब ज्ञान और भक्ति का समन्वय होता है, तब मनुष्य का जीवन पूर्णता की ओर अग्रसर होता है।

निष्कर्ष रूप में स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि ज्ञान और भक्ति दोनों ही ईश्वर प्राप्ति के महत्वपूर्ण मार्ग हैं। ज्ञान सत्य का बोध कराता है और भक्ति उस सत्य को हृदय में जीवंत बना देती है। इन दोनों के समन्वय से ही मनुष्य सच्चे आध्यात्मिक आनंद और परम शांति को प्राप्त कर सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button