सभी वरिष्ठ शोधकर्ताओं कम से कम 6 पीएचडी छात्रों का करें मार्गदर्शन – प्रो आरके धीमन
अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने को कार्यशाला

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। शोध क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पकड़ बनाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गयी। मंगलवार को
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स स्थित खुराना सभागार में “अनुसंधान प्रोत्साहन के लिए प्रथम कार्यशाला” का सफल आयोजन किया।
जिसमें संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संस्थान के अनुसंधान प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य संस्थागत अनुसंधान ढांचे को सुदृढ़ करना और विभिन्न विषयों में नवाचार और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना था।
वहीं संस्थान निदेशक प्रोफेसर आरके धीमन ने रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में अनुसंधान के महत्व पर जोर देते हुए एक सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
उन्होंने कहा कि संस्थान में अनुसंधान की शुरुआत रेजिडेंट डॉक्टरों, शोधार्थियों और युवा संकाय सदस्यों के स्तर पर की जानी चाहिए और नैदानिक संकाय सदस्यों को अनुसंधान के लिए कम से कम 20% समय देना चाहिए।
प्रोफेसर धीमन ने युवा संकाय सदस्यों को व्यावहारिक सुझाव दिए, जैसे कि आंतरिक अनुदानों के साथ अनुसंधान यात्रा शुरू करना और आंतरिक अनुसंधान के परिणामों का उपयोग करके बाह्य अनुदानों (एक्स्ट्राम्यूरल ग्रांट) की योजना बनाना।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी वरिष्ठ शोधकर्ताओं को एक समय में कम से कम 6 पीएचडी छात्रों का मार्गदर्शन करना चाहिए, ताकि उच्च प्रशिक्षित शोधकर्ताओं का एक समूह तैयार हो सके और एसजीपीजीआईएमएस में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए आईसीएमआर, नई दिल्ली में आवेदन किया जा सके।
प्रोफेसर शालीन कुमार ने वैज्ञानिक गतिविधियों में युवा शोधकर्ताओं और रेजिडेंट्स की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस संस्थान में किया जाने वाला शोध रोगी स्वास्थ्य देखभाल की बेहतरी से संबंधित हो।
कार्यशाला में जैव चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों को कवर करते हुए कई ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए।
प्रमुख सत्रों में..
👉 नैदानिक परीक्षणों का बुनियादी ढांचा और अवसर।
👉 कोर प्रयोगशाला सुविधाएं और साझा अनुसंधान मंच।
👉 एसजीपीजीआईएमएस में पशु अनुसंधान सुविधाएं।
👉 स्टेम सेल अनुसंधान और पुनर्योजी चिकित्सा
👉 जैव चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (सीबीएमआर) के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान पहल।
👉 सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के सहयोग से नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास।
कार्यशाला में प्रोफेसर अमित गोयल, प्रोफेसर खलिकुर् रहमान, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. सीपी चतुर्वेदी, डॉ. अतुल गर्ग और श्याम कुमार सहित विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। जिनमें बहुविषयक अनुसंधान के लिए उपलब्ध अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और अवसरों पर प्रकाश डाला गया।
एक आकर्षक संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को अनुसंधान संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करने, सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने और वरिष्ठ संकाय सदस्यों और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया।



