जोखिम गर्भावस्था की पहचान में प्रदेश अग्रणी
7 माह में 25.29 लाख गर्भवतियों की जाँच कर बनाया रिकार्ड

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा जोखिम वाली गर्भावस्था की जाँच करने अग्रणी भूमिका पेश की है।
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत मातृत्व स्वास्थ्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही की प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान और निजी
चिकित्सकों की मजबूत भागीदारी के माध्यम से डिजिटल ट्रैकिंग, हेल्पलाइन, प्रशिक्षण और भागीदारी मॉडल जैसे नए नवाचारों ने मातृ एवं नवजात मृत्यु दर घटाने के प्रयासों को गति दी है।
महानिदेशक परिवार कल्याण, डॉ पवन सिंह अरुणा बताते हैं कि PMSMA का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर गर्भवती महिला की दूसरी या तीसरी तिमाही में कम से कम एक बार प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ या एमबीबीएस चिकित्सक द्वारा प्रसवपूर्व जांच हो और
उसके बाद नियमित फॉलो-अप की व्यवस्था बने। इस क्रम में गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच, समय पर जोखिम पहचान, रेफरल और पोषण-सलाह के संयोजन से मातृ और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने, सुरक्षित प्रसव बढ़ाने और महिलाओं में स्वास्थ्य चेतना सुदृढ़ करने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसी वर्ष
अप्रैल से नवम्बर तक PMSMA के तहत दूसरी या तीसरी तिमाही की 25.29 लाख गर्भवती की प्रसवपूर्व जांच की गई। जिनमें से 2.19 लाख को उच्च जोखिम गर्भावस्था के संकेतक पहचानकर विशेष देखभाल से जोड़ा गया।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में कार्यक्रम सक्रिय होने से ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और उपयोग में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में PMSMA से 1,124 निजी एमबीबीएस चिकित्सक स्वेच्छा से जुड़े हैं, जबकि देश में प्रथम स्थान पर महाराष्ट्र है जहाँ 1,174 चिकित्सक अभियान से जुड़े हैं।
जानें जाँच रिकार्ड बनाने का तरीका..
उत्तर प्रदेश में नवाचार के रूप में PMSMA और PMSMA प्लस दिवस अब माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को आयोजित होकर महिलाओं को माह में चार बार जांच का अवसर देते हैं। जिससे उच्च जोखिम मामलों की पहचान और फॉलो-अप आसान हुआ है।
अभियान निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्वयंसेवी चिकित्सकों का पंजीकरण, जागरूकता रणनीतियां और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निजी चिकित्सकों की सेवाओं का समन्वय जैसे उपाय अपनाता है।
डिजिटल मातृत्व ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं का ऑनलाइन पंजीकरण और ई-रिकॉर्ड्स बनाए जा रहे हैं। जिससे उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की ट्रैकिंग और समय पर रेफरल सुगम हुआ है।
मातृत्व हेल्पलाइन से परामर्श, टीकाकरण तिथियाँ और पोषण संबंधी जानकारी दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं तक भी सरलता से पहुँच रही है।
“सुरक्षित माँ, स्वस्थ शिशु” जैसी पहल के तहत आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में पोषण काउंसलिंग, नवजात देखभाल प्रशिक्षण और आपात प्रसव प्रबंधन पर आशा व एएनएम को अद्यतन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान
PMSMA के तहत गंभीर एनीमिया (हीमोग्लोबिन 7 से कम), कम या अधिक वजन, रक्तस्राव या असामान्य स्राव, अत्यधिक कम कद (143 सेमी से कम) और 15 वर्ष से कम या 31 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधारण को उच्च जोखिम संकेतकों के रूप में मानकर चिन्हित किया जाता है।
साथ ही गर्भकालीन डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, प्रीएक्लेम्प्शिया, टीबी, एचआईवी, मलेरिया, किडनी की बीमारी, सर्विक्स या गर्भाशय की असामान्य संरचना और पूर्व गर्भावस्था की जटिलताओं वाले मामलों को भी विशेष निगरानी एवं रेफरल प्रणाली से जोड़ा जाता है।
समरीन का हुआ सुरख्सित प्रसव – टुड़ियागंज सीएचसी पर दूसरी तिमाही की शुरुआत में आई 22 वर्षीय समरीन (बदला हुआ नाम) की पहली गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन 9.8 और वजन सामान्य से कम होने पर उन्हें उच्च जोखिम गर्भवती के रूप में चिन्हित किया गया।
आयरन फोलिक एसिड (IFA), पोषण परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर आयरन सुक्रोज/इंजेक्शन के माध्यम से एनीमिया प्रबंधन के उपाय अपनाकर सुरक्षित प्रसव की दिशा में समय रहते हस्तक्षेप संभव हुआ।



