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अरावली पर्वतमाला संरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र समेत राज्‍यों को नोटिस जारी

चार राज्यों में फैली अरावली पर्वत माला को मिटाने में लगे खनन माफिया  

 

दिल्ली।लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। भारत के चार राज्यों को सांसे प्रदान करने वाली जीवनदायिनी अरावली पर्वत माला न्यायालय की शरण में सांसे ले रही है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अरावली पर्वतमाला की परिभाषा से जुड़े अपने ही पुराने फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और चार राज्यों में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अरावली की संरक्षण को सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप..पुराने आदेश पर लगाई रोक

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 20 नवंबर, 2025 के उस आदेश को ‘स्थगित’कर दिया है। जिसमें अरावली की एक विवादित परिभाषा को स्वीकार किया गया था।

विवाद की मुख्य वजह: पिछले आदेश में केवल उन पहाड़ियों को ‘अरावली’ माना गया था। जिनकी ऊंचाई जमीन से 100 मीटर (लगभग 328 फीट) या उससे अधिक थी।

पर्यावरणविदों का तर्क था कि इस परिभाषा से अरावली का लगभग 90% हिस्सा कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाता है। जिससे वहां अवैध खनन और निर्माण का रास्ता खुल जाता।

नई विशेषज्ञ समिति का गठन 

कोर्ट ने अब अरावली की परिभाषा और इसके पारिस्थितिकी (ecological) प्रभाव की निष्पक्ष जांच के लिए एक नई उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है।

खनन और पर्यावरण पर प्रभाव,खनन पर लगी रोक..

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक नई समिति अपनी रिपोर्ट नहीं देती और अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक अरावली क्षेत्र में कोई भी नया खनन पट्टा जारी नहीं किया जा सकेगा।

यथास्थिति बरकरार

कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में फिलहाल यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है ताकि इसके प्राकृतिक स्वरूप और जैव विविधता को नुकसान न पहुंचे।

अगली सुनवाई: इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 21 जनवरी, 2026 को तय की गई है।

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