हाथों की सफाई पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
हाथों की सफाई के गिनाये फायदे

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा हाथों की सफाई के फायदे गिनाये गए। हाथों को स्वच्छ रखने के लिए प्रति वर्ष 5 मई को विश्व स्तर पर विश्व हाथ स्वच्छता दिवस मनाया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 2026 के लिए दिया गया विषय “अपने हाथ साफ करें – यह कार्रवाई जीवन बचाती है। साथ ही आम गलत धारणा की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि केवल दस्ताने ही पर्याप्त हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का विश्व हाथ स्वच्छता दिवस अभियान इसी विषय पर केंद्रित है। जिसमें नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य संस्थानों और फ्रंटलाइन वर्कर्स द्वारा सुरक्षा की एक सशक्त संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एकजुट प्रयासों का आह्वान किया गया है।
इस वर्ष का अभियान स्वास्थ्य कर्मियों को परिवर्तन के अगुआ के रूप में सशक्त बनाने, संस्थागत नेतृत्व की जवाबदेही और बहुआयामी संक्रमण रोकथाम रणनीतियों के कार्यान्वयन पर विशेष बल देता है।
डब्ल्यूएचओ की 2023 की संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण पर वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 7 स्वास्थ्य देखभाल संबंधी संक्रमणों (एचएआई) को प्रभावी हाथ स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण कार्यक्रमों के माध्यम से रोका जा सकता है।
इसके बावजूद, हाथ स्वच्छता प्रथाओं का वैश्विक अनुपालन अभी भी संतोषजनक नहीं है, विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में औसत अनुपालन दर 40% से 60% के बीच है। 2024 में द लैंसेट में प्रकाशित एक हालिया मेटा-विश्लेषण इस बात की पुष्टि करता है कि
हाथ की उचित स्वच्छता रोगजनकों के संचरण को 50% तक कम कर सकती है और रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के जोखिमों को काफी हद तक घटा सकती है। मंगलवार को एसजीपीजीआईएमएस के केंद्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित एचजी खुराना सभागार में एक व्यापक और प्रभावशाली वैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन किया।
जिसे संस्थान के संक्रमण नियंत्रण समिति और अस्पताल प्रशासन विभाग के अस्पताल संक्रमण नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा किया गया। कार्यशाला में चिकित्सक, इन्फेक्शन कण्ट्रोल एक्सपर्टस , माइक्रोबायोलॉजीस्ट्स , और स्वास्थ्यकर्मी हाथ की स्वच्छता के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षण के माध्यम से संक्रमण रोकथाम रणनीतियों को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आये।
कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर आर. हर्षवर्धन के उद्घाटन भाषण से हुआ। जिसमें उन्होंने “20 सेकंड की दुविधा स्मार्ट डॉक्टर अभी भी हाथ की स्वच्छता क्यों नहीं अपनाते” विषय पर एक प्रभावशाली संबोधन दिया। कार्यशाला का
वैज्ञानिक एजेंडा व्यापक और बहुआयामी था, जो संक्रमण रोकथाम विज्ञान में नवीनतम जानकारी को दर्शाता है। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता ने “व्यस्त आईसीयू में अनुपालन के नियमों को समझना” विषय पर व्याख्यान दिया।
इसके बाद संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर शालीन कुमार ने अपने संबोधन में अनुपालन सुनिश्चित करने में संस्थागत जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।
तत्पश्चात एक वैज्ञानिक सत्र हुआ। जिसमें विषय का गहन विश्लेषण किया गया। डॉ. शालिनी त्रिवेदी ने हाथ की स्वच्छता में व्यवहार विज्ञान और अनुपालन में कमी के अंतर्निहित कारणों पर अपने विचार साझा किए। आगे डॉ. अरीना एच. सिद्दीकी ने “सुपरबग्स बनाम साबुन
वह सूक्ष्मजीवी युद्ध जो हम प्रतिदिन लड़ते हैं” शीर्षक से इस निरंतर चुनौती के सूक्ष्मजीवीय परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डाला। इसके बाद डॉ. चिन्मय साहू ने डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करते हुए बताया कि अनुपालन डेटा को सार्थक नैदानिक परिणामों में प्रभावी ढंग से कैसे परिवर्तित किया जा सकता है।
इसके बाद डॉ. अवले रूपाली भालचंद्र ने हाथ की स्वच्छता में हुई प्रगति, जैसे डिजिटल निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर प्रकाश डाला, जो हाथ की स्वच्छता के भविष्य को आकार देने वाले नवाचार हैं।
इसके बाद संस्थान के अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. क्रिस अग्रवाल ने एचआईसी सेल द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम पद्धतियों के बारे में बताया। प्रगति रानी ने हाथ की स्वच्छता की सही तकनीक का प्रदर्शन किया। इस सत्र ने फ्रंटलाइन स्टाफ के लिए एक रिफ्रेशर के रूप में कार्य किया और दृश्य संकेतों के माध्यम से अनुपालन पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन संस्थान के अस्पताल प्रशासन के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौरभ सिंह के हार्दिक धन्यवाद भाषण के साथ हुआ। उन्होंने कार्यशाला को सफल बनाने के लिए प्रख्यात वक्ताओं, सहयोगियों, ज्ञान साझेदारों और प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया।



