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पुरुषोत्तम मास में व्यापार आरम्भ करना शुभ -राजेश शुक्ल

15 जून तक रहेगा पुरुषोत्तम मास, हर तीन वर्ष में पुरुषोत्तम मास का आगमन 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। हर तीन वर्ष बाद पुरुषोत्तम मास का आगमन होता है। जिसमें 13 वां महीना लगते ही उसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। रविवार को यह जानकारी पुरुषोत्तम मास आरम्भ होते ही आचार्य राजेश शुक्ल ने दी। उन्होंने बताया कि

पुरुषोत्तम मास इसलिए कहा जाता है यह महीने में सूर्य एक बार सूर्य की संक्रांति जरूर होती है। सूर्य भगवान एक राशि से दूसरी राशि पर जाते हैं और 12 राशियां होती हैं। जिसमें 12 महीने का वर्ष होता है।

प्रति महीने एक संक्रांति होती है,संक्रांति का मतलब आगे बढ़ना सम्यक क्रांति परम गतौगति के अर्थ और प्रति महीने 14 तारीख से लेकर 17 तारीख तक अंग्रेजी के महीने के हिसाब से सूर्य भगवान अपनी राशि बदलते रहते हैं। हिंदी महीने के अनुसार अमावस्या से लेकर अमावस्या तक एक महीना माना जाता है।

क्योंकि अमावस्या तीसरी तिथि होती है। जब किसी महीने में अमावस्या से लेकर अगली अमावस्या आ जाती है और पूरे महीने में संयोगवस सूर्य की क्रांति नहीं होती है। तब वह एक महीना अधिक मास हो जाता है।

यही इसका नियम है अमावस्या से लेकर अमावस्या पर्यंत सूर्य भगवान की क्रांति न हो और यह घटना जिस महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के बीच में पड़ जाए तो इस महीने के नाम पर यह अधिक मास हो जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास दो हो गए हैं।

जानें दो ज्येष्ठ मास कब तक रहेंगे..

अधिक मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस बार ज्येष्ठ के बीच में यह मास आया। इसलिए ज्येष्ठ मास अधिक मास हो गया है। जबकि इसका नाम पुरुषोत्तम मास इसलिए है कि हर महीने के अलग-अलग देवता हैं। 12 महीने के अलग-अलग अधि देवता हैं। यह 13वां महीना 3 साल में एक बार आता है।

पुरुषोत्तम मास के भगवान 

इस महीने का देवता कौन हो,इसलिए परशेषन न्याय से भगवान ही इस महीने के देवता होते हैं। जब कोई देवता नहीं तो भगवान ही देवता है।

परशेषन न्याय मतलब बचा हुआ। इस 13 वें महीने के देवता स्वयं श्री हरि विष्णु बने हैं। इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस महीने में भगवान पुरुषोत्तम का पूजन तथा कथा यज्ञ,संकीर्तन जितना नित्य करते हैं, उससे बढ़ाकर करना चाहिए।

जिससे भगवान अधिक प्रसन्न होते हैं। इस महीने में जो भी दान,पुण्य कर्म किए जाते हैं,उसका दानदाता को अधिक फल की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से श्री विष्णु भगवान को ब्राह्मण गो, माता पिता गुरु आचार्य का पूजन करना चाहिए।

इस मास में विवाह आदि संस्कार नहीं किए जाते और बाकी सभी कार्य किए जाते हैं जैसे व्यापार आदि आरंभ करना। इस मास में जो सत्कर्म किया जाता है,उसका अनंत गुना फल प्राप्त होता है।

इस मास में इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए ओम नमो भगवते वासुदेवाय से श्री हरि की कृपा से सुख शांति वैभव का लाभ मिलता है।

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