टाइप 1 डायबिटीज़ सपोर्ट ग्रुप प्रोग्राम
टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित लगभग 50 परिवार समेत 200 लोग रहे मौजूद

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। टाइप 1 डायबिटीज़ से बचाव के लिए जागरूक किया गया। रविवार को
एसजीपीजीआई में एंडोक्रिनोलॉजी और पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभागों द्वारा टाइप 1 डायबिटीज़ सपोर्ट ग्रुप प्रोग्राम आयोजित किया।
यह प्रोग्राम उन किशोरों को समर्पित था जो इस बीमारी के साथ जी रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि जीवन का किशोरावस्था वाला दौर सभी परिवारों के लिए अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है। जब कोई परिवार टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित
किसी किशोर की परवरिश करता है, तो ये चुनौतियाँ कई गुना बढ़ जाती हैं और ये अलग होती हैं। इस कार्यक्रम में उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। जहाँ जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर लगभग हर परिवार में ‘बर्नआउट’ (मानसिक थकावट) देखने को मिलता है।
संस्थान में मनोरोग विभाग के फैकल्टी सदस्य डॉ. रोमिल सैनी ने अपने अनुभव साझा किए और बच्चों तथा परिवारों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने के तरीके बताए।
डायबिटीज़ शिक्षकों और नर्सिंग अधिकारियों ने अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया और स्कूल, व्यायाम, मासिक धर्म के दौरान डायबिटीज़ प्रबंधन के बहुत महत्वपूर्ण संदेश दिए।
साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी हल्के-फुल्के अंदाज़ में जानकारी साझा की।
श्वेता, जो एक वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और पिछले 30 वर्षों से टाइप 1 डायबिटीज़ के साथ जी रही हैं, और एमी, जो संस्थान में बीएससी नर्सिंग की छात्रा हैं। ये दोनों ही
सफल और संतोषजनक जीवन जी रही हैं। इन्होंने अपने जीवन के अनुभव अन्य सभी परिवारों के साथ साझा किए। इन अनुभवों ने छोटे बच्चों को अपनी बीमारी के बावजूद अपने लक्ष्यों को पाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में
टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित लगभग 50 परिवार और कुल 200 लोग शामिल रहे। वहीं बच्चों ने नृत्य और गायन जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। बच्चों के लिए इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मज़ेदार खेल थे।
जिनमें सभी बच्चों और परिवारों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। उनके बीच का आपसी मेलजोल और उत्साह देखने लायक था। बता दें कि भारत में लगभग 10,00,000 लोग टाइप 1 डायबिटीज़ के साथ जी रहे हैं। यह संख्या USA के बाद दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है।
इनमें से लगभग 3 लाख लोग 20 वर्ष से कम आयु के हैं। भारत दुनिया में टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित सबसे अधिक संख्या में युवाओं (20 वर्ष से कम आयु) का घर है, और हर साल इस संख्या में लगभग 35,000 बच्चे और किशोर और जुड़ जाते हैं।
टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित परिवारों का जीवन आसान बनाने के लिए ‘पीयर ग्रुप सपोर्ट’ (साथियों का सहयोग) एक महत्वपूर्ण साधन माना गया है। इस तरह का सपोर्ट ग्रुप प्रोग्राम टाइप 1 डायबिटीज़ वाले परिवारों को एक मज़बूत भावनात्मक सहारा और सामाजिक जुड़ाव देता है, ताकि वे अकेला महसूस न करें।



