फाइलेरिया और काला-जार बीमारियां जनस्वास्थ्य के लिए बनी चुनौती- डॉ एनबी सिंह
फाइलेरिया एवं काला-जार उन्मूलन को दिया प्रशिक्षण

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। फाइलेरिया एवं काला-जार बीमारियां जनस्वास्थ्य के लिए चुनौती बताई गयी। गुरुवार को
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय काला-जार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिसमें जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से आए चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया तथा कुल 60 प्रतिभागी उपस्थित रहे। साथ ही मेडिकल कालेज आरएमएलआईएमएस और आईआईएमएसआर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर्स एवम् इंटर्न ने भी प्रतिभाग किया।
इस प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोग के प्रबंधन के लिए रुग्णता प्रबंधन एवं उपचार पर विशेष जानकारी प्रदान की गई। वहीं
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने कहा कि फाइलेरिया और काला-जार जैसी बीमारियां आज भी जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
इनसे बचाव के लिए जागरूकता, समय पर पहचान और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता वृद्धि में सहायक होते हैं तथा रोगियों के प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी क्रम में
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रितु श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से तथा काला-जार बालू मक्खी के काटने से फैलता है।
उन्होंने बताया कि काला-जार का पूर्ण इलाज संभव है, जबकि फाइलेरिया का केवल प्रबंधन किया जा सकता है। फाइलेरिया प्रभावित अंगों की नियमित साफ-सफाई और देखभाल से सूजन को नियंत्रित रखा जा सकता है।
इसके बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा और सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान फाइलेरियारोधी दवा का सेवन आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि काला-जार मरीज मिलने के बाद प्रभावित क्षेत्र में लगातार तीन वर्षों तक प्रत्येक छह माह पर इनडोर रेसिड्यूल स्प्रे का छिड़काव किया जाता है। जनपद के त्रिवेणी नगर क्षेत्र में वर्ष 2024 में काला-जार का मरीज मिलने के बाद नियमित अंतराल पर छिड़काव एवं निगरानी की गई।
घरों के 500 मीटर दायरे में स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता गतिविधियां भी की गईं। जिसमें कोई नया मरीज नहीं पाया गया। इस वर्ष अप्रैल माह में भी क्षेत्र में छिड़काव एवं जागरूकता अभियान चलाया गया।
कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल का प्रदर्शन भी किया गया।
इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत निर्वाण ने बताया कि फाइलेरिया से प्रभावित एवं दिव्यांगता की स्थिति में आए रोगियों को अब दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।
इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी योगेश रघुवंशी, जिला एवं नगर मलेरिया इकाई के सदस्य, पाथ, डब्ल्यूएचओ एवम् पीसीआई के राज्य एवं जनपद स्तरीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



