नवजात शिशुओं की रक्षा को बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम
नवजात मृत्यु दर कम करने को कार्यक्रम

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। नवजात शिशुओं की रक्षा के लिए बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम किया गया। रविवार को
एसजीपीजीआईएमएस में नवजात पुनर्जीवन कौशल को सुदृढ़ करने के बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम का आयोजन
नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा एवं नवजात पुनर्जीवन कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संस्थान के नियोनेटौलाजी विभाग एवं कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा संयुक्त रूप से बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम नेशनल न्योनेटलॉजी फोरम (एनएनएफ इंडिया) के तत्वावधान में देशभर में मनाए जा रहे NRP Day के अंतर्गत आयोजित किया गया।
यह राष्ट्रव्यापी समन्वित पहल नवजात पुनर्जीवन से संबंधित आवश्यक कौशलों में स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने तथा रोकी जा सकने वाली नवजात मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
जन्म के तुरंत बाद के शुरुआती कुछ मिनट नवजात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समय पर की गई सहायता नवजात के जीवन को बचाने के साथ-साथ दीर्घकालिक जटिलताओं को भी कम कर सकती है।
नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम एक वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम है। जिसका उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को जन्म के समय शिशु की श्वसन क्रिया शुरु कराने एवं प्रारंभिक स्थिरीकरण से संबंधित आवश्यक कौशल प्रदान करना है।
BNRP के अंतर्गत ताप संरक्षण, वायुमार्ग की उचित स्थिति, बैग एवं मास्क वेंटिलेशन, टीमवर्क तथा नवजात की प्रारंभिक स्थिरता जैसे जीवनरक्षक कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 70 से अधिक प्रतिभागियों में चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी एवं प्रशिक्षु शामिल थे, ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में इंटरैक्टिव व्याख्यान, सिमुलेशन आधारित प्रदर्शन, सुपरवाइज्ड स्किल स्टेशन तथा व्यावहारिक नवजात पुनर्जीवन अभ्यास आयोजित किए गए। जिससे प्रतिभागियों के व्यावहारिक कौशल एवं आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।
यह कार्यक्रम नवजात विभाग एवं कॉलेज ऑफ नर्सिंग के उत्कृष्ट समन्वय और बहुविषयक सहयोग का उदाहरण रहा। कार्यक्रम के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. कीर्ति एम. नरांजे, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नियोनेटौलाजी विभाग थीं।
नियोनेटौलाजी विभाग से फैकल्टी इंस्ट्रक्टर्स के रूप में डॉ. अनीता सिंह, डॉ. आकांक्षा वर्मा, डॉ. अभिषेक पॉल, डॉ. फौजिया फरहत, डॉ. आरोही गुप्ता, डॉ. आरके श्वेताभ एवं डॉ. अन्बारसन ने प्रशिक्षण प्रदान किया।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ओर से प्राचार्य डॉ. राधा के. एवं फैकल्टी सदस्य अर्चना ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। जिससे नवजात देखभाल में डॉक्टर एवं नर्सिंग टीम के समन्वित कार्य की महत्ता उजागर हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. आर. हर्षवर्धन, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, तथा श्री प्रकाश सिंह, संयुक्त निदेशक प्रशासन उपस्थित रहे। उन्होंने दोनों विभागों के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण के महत्व पर बल दिया।
संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन ने नवजात विभाग एवं कॉलेज ऑफ नर्सिंग को इस सफल संयुक्त पहल के लिए बधाई दी तथा नवजात देखभाल को सुदृढ़ करने के लिए नियमित कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह पहल एसजीपीजीआईएमएस की उत्कृष्ट नवजात देखभाल, बहुविषयक टीमवर्क एवं क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है, ताकि प्रत्येक नवजात को जन्म के समय समय पर एवं प्रभावी पुनर्जीवन सहायता उपलब्ध कराई जा सके।



