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नीति-निर्माण में संस्थान की भूमिका होगी सशक्त – प्रो सीएम सिंह

मेटा-एनालिसिस पर सेन्सेटाइजेशन वर्कशॉप 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। अनुसंधान एवं साक्ष्य आधारित चिकित्सा स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गयी। मंगलवार को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में

साक्ष्य-आधारित चिकित्सा अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत रिसर्च सेल द्वारा कॉन्फ्रेन्स हॉल में सिस्टेमैटिक रिव्यू एवं मेटा-एनालिसिस पर एक दिवसीय सेन्सेटाइजेशन वर्कशॉप का आयोजन किया गया।

जिसे संस्थान निदेशक प्रो. सीएम सिंह के निर्देशानुसार तथा डॉ. प्रद्युम्न सिंह, डीन एवं डॉ. विक्रम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सीएमएस की उपस्थिति में की गई। जिसका उद्देश्य संकाय सदस्यों में अनुसंधान पद्धति, आलोचनात्मक मूल्यांकन तथा वैज्ञानिक साक्ष्य के संश्लेषण की क्षमता को सुदृढ़ करना था।

सिस्टेमैटिक रिव्यू एवं मेटा-एनालिसिस को विश्व स्तर पर सर्वोच्च वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है, जो नैदानिक दिशा निर्देशों, स्वास्थ्य नीतियों एवं उपचार निर्णयों का आधार बनते हैं। इसी दृष्टि से वर्कशॉप में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया।

वर्कशॉप के शैक्षणिक सत्र में प्रो. बलेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. रघुवर दयाल सिंह एवं प्रो. हरदीप सिंह मल्होत्रा जैसे प्रतिष्ठित संसाधन संकाय द्वारा संचालित किया गया जो अनुसंधान पद्धति, महामारी विज्ञान एवं जैव-सांख्यिकी के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के लिए जाने जाते हैं।

सत्रों में पीआईसीओ पद्धति द्वारा शोध प्रश्न निर्धारण, मेडलाइन एवं सेंट्रल जैसे डेटा बेस में साहित्य खोज, अध्ययन चयन एवं डाटा निष्कर्षण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

उन्नत सत्रों में पूर्वाग्रह (रिस्कऑफबायस) का मूल्यांकन, विषमता (हेटेरोजेनेटी) की व्याख्या, फॉरेस्टप्लॉट का विश्लेषण, मेटा-एनालिसिस के सांख्यिकीय सिद्धांत तथा ग्रेड पद्धति द्वारा साक्ष्य की गुणवत्ता के आकलन पर व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।

संवादात्मक एवं हैंड्स-ऑन सत्रों ने प्रतिभागियों को इन अवधारणाओं को व्यवहार में लागूकर ने में सक्षम बनाया। वहीं प्रो.सीएम सिंह ने कहा कि उच्च-गुणवत्ता वाले साक्ष्य संश्लेषण से नैदानिक उत्कृष्टता, अकादमिक विश्वसनीयता एवं नीति-निर्माण में संस्थान की भूमिका और अधिक सशक्त होती है।

डीनडॉ. प्रद्युम्न सिंह ने स्नातकोत्तर शोध एवं वैज्ञानिक प्रकाशनों में सिस्टेमैटिक रिव्यू की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया।nइस अवसर पर डॉ. सुब्रतचंद्रा, कार्यकारी रजिस्ट्रार, ने कहा कि सिस्टेमैटिक रिव्यू एवं मेटा-एनालिसिस विश्वसनीय एवं उच्च-गुणवत्ता वाले साक्ष्य प्रदान कर ने के महत्वपूर्ण साधन हैं, जो स्वास्थ्य नीति को दिशा देते हैं।

सीएमएस डॉ. विक्रम सिंह ने कहा कि चिकित्सकों के लिए इन पद्धतियों की समझ आवश्यक है। जिससे प्रमाण-आधारित एवं रोगी-केन्द्रित उपचार सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. अमित कौशिक, एसोसिएट डीन (रिसर्च सेल) ने आयोजन अध्यक्ष के रूप में तथा

डॉ. अजय कुमार वर्मा, विभागाध्यक्ष, श्वसन रोग विभाग ने सह-आयोजन अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. केके यादव, उप-डीन (रिसर्च–पीजी) ने कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी संभाली।

शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं में डॉ. मिली सेंगर, उप-डीन (रिसर्च–फैकल्टी), डॉ. सोनाक्षी श्रीवास्तव, उप-डीन (रिसर्च–यूजी एवं नर्सिंग) तथा डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, उप-डीन (रिसर्च–एसएस एवं पीएचडी) ने सह-आयोजन सचिव के रूप में सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम की वित्तीय व्यवस्था डॉ. अनामिका चंद्रा, सहायक प्राध्यापक, सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा कोषाध्यक्ष के रूप में की गई।

वर्कशॉप में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य मौजूद रहे।

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