उत्तर प्रदेशजीवनशैलीबड़ी खबर

बच्चे की श्वास नली में फंसी मूंगफली निकालने में पायी बड़ी सफलता 

20 दिनों तक बच्चा खांसी बुखार से रहा पीड़ित 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों ने मासूम बच्चे की श्वास नली से मूंगफली निकालकर कर बड़ी सफलता अर्जित की। सोमवार को

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर-स्पेशियलिटी विभाग के चिकित्सकों ने जौनपुर जिले के एक 15 माह के बच्चे की बाईं ब्रोंकस (श्वास नली) में फंसी फॉरेन बॉडी (मूंगफली) को सफलतापूर्वक निकाल दिया है ।

यह बच्चा लगभग 20 दिनों से लगातार तेज खांसी, बार-बार बुखार और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित था। जिसके बाद उसे संस्थान में रेफर किया गया था।

उपचार करने वाली टीम के अनुसार, बच्चे को बार-बार होने वाली सांस संबंधी समस्याओं के लिए पहले कहीं और दवाइयों से उपचार दिया जा रहा था। परंतु श्वांस नली में फंसी किसी बाहरी वस्तु का निदान न हो पाने के कारण लक्षण बने हुए थे।

संस्थान में विस्तृत जांच और इमेजिंग के बाद ब्रोंकियल फॉरेन बॉडी की आशंका जताई गई। जिसके पश्चात आपातकालीन ब्रोंकोस्कोपी की योजना बनाई गई।

पीडियाट्रिक सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम ने सामान्य एनेस्थीसिया के अंतर्गत ब्रोंकोस्कोपी द्वारा बाईं मुख्य ब्रोंकस से विदेशी वस्तु को सफलतापूर्वक हटाया। प्रक्रिया के बाद बच्चे में खांसी और सांस लेने में कठिनाई संबंधी लक्षणों से महत्वपूर्ण राहत के साथ उल्लेखनीय नैदानिक सुधार देखा गया।

यह प्रक्रिया पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो. बसंत कुमार, पल्मोनरी मेडिसिन के प्रो. अजमल खान और एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रो. संजय कुमार के मार्गदर्शन में रेजिडेंट चिकित्सकों एवं ऑपरेशन थिएटर स्टाफ के साथ मिलकर सम्पन्न की गई।

चिकित्सकों ने इस बात पर बल दिया कि प्री-स्कूल आयु के बच्चों में श्वांस नली और खाने की नली में बाहरी वस्तु फंसने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अक्सर खेलते या खाते समय वस्तु सांस के साथ अंदर चली जाती है।

मूंगफली, बीज, खिलौनों के छोटे हिस्से, सिक्के और बटन जैसी छोटी वस्तुएं श्वांस नली में फंस सकती हैं और यदि समय पर इसका निदान न हो, तो बार-बार निमोनिया,सांस लेने में कठिनाई और यहाँ तक कि जानलेवा परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

उपचार टीम ने माता-पिता और देखभाल करने वालों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और छोटे बच्चों को बिना निगरानी के छोटे खाद्य पदार्थ या वस्तुएं न दें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी बच्चे में संदिग्ध वस्तु निगलने के बाद अचानक खांसी, दम घुटने जैसा अनुभव, सांस में घरघराहट या लगातार सांस लेने में कठिनाई संबंधी लक्षण उत्पन्न हों, तो तुरंत चिकित्सीय सहायता लेना अत्यंत आवश्यक है।

इस सफल उपचार ने संस्थान में उपलब्ध शीघ्र निदान, बहु-विषयक समन्वय और एडवांस्ड पीडियाट्रिक एयरवे इंटरवेंशन सुविधाओं के महत्व को एक बार फिर सिद्ध किया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button