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ईंधन बचत को लेकर परिवहन निगम में बदलाव के निर्देश जारी 

प्रबन्ध निदेशक में व्यवस्था में तत्काल प्रभाव से लागू करने के दिए निर्देश 

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। परिवहन निगम में ईंधन बचत को लेकर निर्देश जारी किये गए। रविवार को

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन सिंह ने ईधन के व्यय को कम करने के लिए तथा प्रवर्तन कार्यों को अधिक प्रभावी, उपयोगी एवं परिणामोउन्मुख बनाने के उददेश्य से निगम हित में

समस्त मुख्यालय नियंत्रित (इण्टरसेप्टर) प्रवर्तन दलो एवं क्षेत्रीय स्तर पर संचालित समस्त क्षेत्रीय प्रवर्तन दलों की व्यवस्था में तत्काल प्रभाव से परिवर्तन करने के निर्देश दिए हैं।

निर्देशानुसार प्रवर्तन दलों में डिपो, क्षेत्र के कार्यरत अतिरिक्त कार्मिक अपने मूल पद के अनुरूप कार्य सम्पादित करेंगें। समस्त क्षेत्रीय प्रबन्धक स.क्षे.प्र.यह सुनिश्चित करेंगें कि प्रवर्तन दल से हटाये गये डिपो क्षेत्र में

कार्यरत कार्मिकों से उनके मूल पदानुसार कार्यालीय कार्य लिया जाये। यातायात अधीक्षक यातायात निरीक्षक,सहायक यातायात निरीक्षक को उनके दायित्वों के अनुरूप कार्यालय कार्य सौपा जाये तथा यातायात अधीक्षक से स्टेशन अधीक्षक के रूप में स्टेशन सम्बन्धी कार्य लिया जायें।प्रत्येक प्रवर्तन दल में केवल एक चालक तैनात किया जाये।

प्रबन्ध निदेशक स्क्वॉयड में आवश्यक कटौती करते हुये प्रत्येक क्षेत्र में केवल एक प्रवर्तन दल कार्यरत रहेगा।

प्रबंध निदेशक ने निर्देश दिए है कि बिना बॉडी वार्न कैमरा किया गया निरीक्षण कार्य मान्य नही होगा।इसी प्रकार प्रत्येक क्षेत्रीय प्रबन्धक के अधीन केवल एक प्रवर्तन दल संचालित होगा।

यह सुनिश्चित करना सम्बन्धित क्षेत्रीय प्रबन्धक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि प्रवर्तन दल में केवल उत्कृष्ट कार्य, छवि एवं अनुशासन वाले कार्मिक ही तैनात किये जायें।

श्री सिंह ने क्षेत्रीय प्रबन्धक सेवा प्रबन्धक सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक उक्त अवधि में स्वयं प्रवर्तन कार्यों का संचालन एवं पर्यवेक्षण के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि निगम के नोडल अधिकारी अपने-अपने नोडल क्षेत्रों की विशेष निगरानी करेंगें तथा आवश्यकतानुसार औचक निरीक्षण सुनिश्चित करेंगें। परीक्षण अवधि के दौरान क्षेत्रीय नोडल अधिकारी आवश्यकता के अनुसार प्रवर्तन वाहनों का उपयोग कर सकेंगें।

प्रबंध निदेशक ने अपेक्षा की है कि चालक परिचालक बिना चेकिंग व्यवस्था के भी बेहतर राजस्व अर्जित कर निगम के प्रति उत्तरदायित्व, आत्म नियंत्रण एवं कार्य निष्ठा की भावना को प्रदर्शित करें।

उन्होंने बताया कि शासन स्तर से भी न्यूनतम वाहन उपयोग तथा स्वअनुशासन को बढावा देने पर बल दिया गया है।

यह व्यवस्था एक माह की परीक्षण अवधि के लिए लागू की जाती है। यह भी सुनिश्चित किया जाये कि उक्त अवधि समाप्त होने के पश्चात् वर्तमान में तैनात किसी भी यातायात निरीक्षक को पुनः उसी स्थान अथवा मार्ग पर तैनात न किया जाये।

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