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एआई कार्यशाला में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संभावनाओं को तलाशा 

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की जरूरतों पर की चर्चा  

 

​लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में एआई कार्यशाला में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संभावनाओं की तलाश की।

बुधवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के फिजियोलॉजी विभाग द्वारा वार्षिक ‘सीएमई एवं एलुमनाई मीट’ का आयोजन किया गया।

जिसमें ‘एएसएसओपीआईयूपी चैप्टर’ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “समकालीन चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एकीकरण” रहा। जिसे संस्थान के निदेशक एवं मुख्य संरक्षक प्रो सीएम सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

​यह कार्यक्रम संस्थान के एकेडमिक ब्लॉक के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। वहीं वैज्ञानिक सत्र की शुरुआत आयोजन अध्यक्ष प्रो. सुनीता तिवारी के परिचय भाषण से आरम्भ हुआ।

कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता प्रो.आरके गर्ग ने “एआई का महत्व; इसके फायदे और नुकसान” पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में एआई से जुड़ी संभावनाओं और जोखिमों पर चर्चा की।

इसके बाद प्रो संदीप भट्टाचार्य ने “अपनी पढ़ाई का तरीका बदलें” विषय पर छात्रों और शोधकर्ताओं को आधुनिक डिजिटल पद्धतियों को अपनाने के बारे में जानकारी दी।

​इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में एआई की बढ़ती अनिवार्यता को समझाना था। इससे शोधकर्ताओं को जटिल डेटा का बेहतर विश्लेषण करने और परिणामों की सटीकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

साथ ही, मेडिकल छात्र तकनीक आधारित पढ़ाई के नए तरीकों को सीखकर अपने करियर को भविष्य के लिए तैयार कर सकेंगे।

​कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष और आयोजन अध्यक्ष प्रो रजनी बाला जसरोटिया के स्वागत भाषण से हुई। कार्यक्रम में डीन प्रो. प्रद्युम्न सिंह, सीएमएस प्रो. विक्रम सिंह, एमएस प्रो. अरविंद सिंह और कार्यकारी रजिस्ट्रार प्रो. सुब्रत चंद्र उपस्थित रहे।

​डॉ. प्रमिता दुबे ने आयोजन सचिव और डॉ. शिवम वर्मा ने संयुक्त आयोजन सचिव की जिम्मेदारी निभाई। कार्यशाला में लगभग 250 प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से और 85 प्रतिनिधि ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

कार्यक्रम की सफलता में विभाग के फैकल्टी सदस्यों डॉ. विभा गंगवार, डॉ. मनीष वर्मा, डॉ. अरविंद पाल, डॉ. विदुषी सिंह और रेजिडेंट डॉक्टरों सहित गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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