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ग्राम प्रधान बने प्रशासक, योगी सरकार का बड़ा फैसला 

ग्राम प्रधानों को मिला 6 माह सेवा विस्तार, मंत्री ने बताया ऐतिहासिक 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश की योगी सरकार ने ग्राम प्रधानों को 6 माह के प्रशासक का कार्यभार बढ़ा दिया है।

प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।

इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे।

सोमवार को प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि यह निर्णय ग्रामीण प्रशासन की निरंतरता बनाए रखने एवं विकास कार्यों को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, ऐसे में शासन द्वारा जारी आदेश के बाद अब वर्तमान ग्राम प्रधान आगामी छह माह तक अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे मुज़फ्फरनगर जनपद के ग्राम प्रधानों की मांग और उनके द्वारा किए गए प्रयास महत्वपूर्ण रहे।

मंत्री अग्रवाल ने जानकारी दी कि हाल ही में जनपद मुज़फ्फरनगर के ग्राम प्रधानों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर कार्यकाल बढ़ाने की मांग की थी।

इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ग्राम प्रधानों के कार्यकाल में वृद्धि का अनुरोध किया, जिस पर सकारात्मक निर्णय लिया गया।

उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्रदेश के हजारों ग्राम प्रधानों को राहत मिली है और पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी। साथ ही विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने प्रदेश सरकार एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ग्राम प्रधान गांवों के विकास की आधारशिला होते हैं और उनके अनुभव का लाभ निरंतर मिलना आवश्यक है। यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन एवं विकास को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

प्रशासको के लिए जिलाधिकारी को किया नामित 

सामान्य पंचायत निर्वाचन, 2021 के पश्चात् गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि उप्र पंचायत राज अधिनियम यह प्रावधान है कि कोई ग्राम पंचायत जब तक कि उसे धारा-95 की उपधारा (1) के खण्ड (च) के अधीन पहले ही विघटित न कर दिया जाय, अपनी प्रथम बैठक के लिए नियत तिथि से 05 वर्ष तक न कि उससे अधिक बनी

रहेंगी। इसी प्रकार उक्त धारा की उपधारा (4) में यह प्रावधान है कि ग्राम पंचायत के किसी सदस्य का कार्यकाल जब तक कि इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अन्यथा समाप्त न कर दिया जाय, ग्राम पंचायत के कार्यकाल के साथ समाप्त हो जायेगा।

यह जानकारी प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (3-क) में यह भी प्रावधान है कि इस अधिनियम के किन्ही अन्य उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी जहां

अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण या लोकहित में किसी ग्राम पंचायत का संघटन करने के लिए उसके कार्यकाल के अवसान के पूर्व निर्वाचन कराना साध्य नहीं है, वहां राज्य सरकार या उसके द्वारा इस निमित्त, प्राधिकृत कोई अधिकारी, आदेश द्वारा, प्रशासनिक समिति।

जिसमें ग्राम पंचायत के सदस्यों के रूप में निर्वाचित किये जाने के लिए, ऐसी संख्या में जैसी वह उचित समझे, अर्ह व्यक्ति होंगे, या प्रशासक नियुक्त कर सकता है और प्रशासनिक समिति के सदस्य या प्रशासक छह माह से

अनधिक ऐसी अवधि के लिए जैसी कि उक्त आदेश में विर्निदिष्ट की जाए, पद धारण करेगा और ग्राम पंचायत, उसके प्रधान और समितियों की समस्त शक्तियां, कृत्य और कर्तव्य, यथास्थिति, ऐसी प्रशासनिक समिति या प्रशासक में निहित होंगें और उनके द्वारा उनका प्रयोग, सम्पादन और निवर्हन किया जायेगा।

ग्राम पंचायतों के सामान्य निर्वाचन, 2026 के पश्चात् संगठित की जाने वाली नई ग्राम पंचायतों की प्रथम बैठक के लिए नियत की जाने वाली तिथि तक, अथवा अधिकतम छह माह की अवधि के लिए, जो भी पहले हो, निवर्तमान ग्राम प्रधानों को सम्यक विचारोपरांत ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में नियुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है।

ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्ति की तिथि 26 मई 2026 के उपरांत 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में सामान्य (रूटीन) कार्यों का निर्वहन किये जाने के लिए नामित किये जाने के

लिए सम्बन्धित जिले के जिलाधिकारी को प्राधिकृत किया गया । उक्त प्रशासक द्वारा कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लिया जायेगा। ग्राम पंचायत के प्रशासक द्वारा अत्यावश्यक एवं विशेष स्थितियों में नीति विषयक निर्णय सम्बन्धी प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त की जायेगी।

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