दिल की सेहत सिर्फ़ मेडिकल ज़िम्मेदारी नहीं – प्रो आरके धीमन
रक्तवाहिका संबंधी रोग चेतावनी संकेतों को पहचानने की अपील

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रक्तवाहिका संबंधी रोग चेतावनी संकेतों को पहचानने की अपील की।
डॉक्टरों q कहना है कि धड़कन को अनसुना न करें दिल की आवाज़ सुनें हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग (कार्डियोवासक्युलर डिजीजस ) आज भी विश्वभर में मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ हैं।
विश्व हृदय महासंघ (वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन ) ने हृदय रोगों के व्यापक वैश्विक बोझ और उनकी रोकथाम तथा समय पर कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया है। भारतीयों में हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
हृदय रोग विशेषज्ञों अपील करते हुए कहा छिपे हुए चेतावनी संकेतों को पहचानें, अपने दिल की रक्षा करें और हर धड़कन को महत्वपूर्ण बनाए।
गुरुवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विभाग ने वैश्विक अभियान “डोंट्स मिस ए बीट ” के साथ जुड़ते हुए लोगों से हृदय रोग के अक्सर हल्के अथवा आसानी से नजरअंदाज कर दिए जाने वाले चेतावनी संकेतों को पहचानने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
इस अवसर पर आयोजित वॉकाथॉन में 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संदेश सरल लेकिन प्रभावशाली था। हृदय रोग हमेशा किसी बड़े या नाटकीय चेतावनी संकेत के साथ सामने नहीं आता।
सांस फूलना, असामान्य थकान, सीने में असहजता, धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना, चक्कर आना अथवा पहले की तुलना में व्यायाम करने की क्षमता कम होना जैसे लक्षणों को कई बार उम्र, तनाव या शारीरिक फिटनेस की कमी के कारण होने वाला मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
वर्ष 2026 का यह अभियान लोगों को ऐसे संकेतों को पहचानने, समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और हृदय रोग की रोकथाम के अवसरों को न चूकने के लिए प्रेरित करता है।
हर धड़कन दिल की देखभाल की याद दिलाती है। संस्थान निदेशक पद्मश्री आरके धीमन ने कहा कि दिल की सेहत सिर्फ़ मेडिकल ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की भी ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने वर्ल्ड हार्ट डे पर वॉकथॉन आयोजित करने और ‘दिल की धड़कन को नज़रअंदाज़ न करें’ का संदेश लोगों तक पहुँचाने के लिए कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट को बधाई दी।
उन्होंने आगे कहा कि यह पहल हमें याद दिलाती है कि एक स्वस्थ दिल की शुरुआत रोज़ाना की स्वस्थ आदतों से होती है। जैसे नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना, तंबाकू से दूर रहना और तनाव को मैनेज करना। आज उठाया गया हर कदम कल एक स्वस्थ दिल की ओर बढ़ाया गया कदम है।
प्रो. धीमन ने दोहराया कि संस्थान दिल की बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, उनकी रोकथाम और समय पर इलाज के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रो. आदित्य कपूर, विभागाध्यक्ष, हृदय रोग विभाग ने कहा, “‘ डोंट मिस ए बीट ’ केवल एक नारा नहीं है। यह हमें अपने शरीर के संकेतों को सुनने और चेतावनी देने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करने की याद दिलाता है।
हृदय की देखभाल हार्ट अटैक से बहुत पहले शुरू हो जाती है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण तथा तंबाकू से पूर्ण परहेज इसके महत्वपूर्ण आधार हैं।”
विश्व हृदय महासंघ की 2026 की “कीप द बीट ” पहल सितंबर महीने में प्रतिदिन 20 मिनट शारीरिक गतिविधि करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करती है। दैनिक जीवन में केवल थोड़ी अधिक शारीरिक सक्रियता को शामिल करना भी स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
प्रो. सत्येंद्र तिवारी, प्रेजिडेंट , कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ़ इंडिया ने कहा,“हृदय हमारी जीवनशैली के प्रति बेहद संवेदनशील है।
नियमित शारीरिक गतिविधि, भले ही छोटी और आसानी से पूरी की जा सकने वाली शुरुआत से हो, हृदय स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। चलते रहिए और अपनी धड़कन को बनाए रखिए।
प्रो. नवीन गर्ग ने लक्षणों को समय रहते पहचानने के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “‘डोंट मिस ए बीट ’ हमें याद दिलाता है कि लक्षणों की समय पर पहचान और चिकित्सकीय मूल्यांकन कई बार रोकथाम और आपातकालीन स्थिति के बीच महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकते हैं।
“महिलाओं के दिल पर भी उतना ही ध्यान जरूरी है। प्रो. रूपाली खन्ना
प्रो. रूपाली खन्ना ने कहा हृदय स्वास्थ्य पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए जीवनभर की प्राथमिकता है। महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण अलग तरीके से सामने आ सकते हैं और कई बार उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। महिलाओं में भी हृदय रोग की रोकथाम, शुरुआती पहचान और समय पर उपचार पर उतना ही ध्यान देना आवश्यक है जितना पुरुषों में।
बच्चों और युवाओं के दिल की भी करें रक्षा” प्रो. अंकित साहू, प्रो. अंकित साहू ने इस बात पर जोर दिया कि “हृदय रोग केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। स्वस्थ आदतों का निर्माण बचपन से ही शुरू होना चाहिए।
मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का संपर्क, अस्वास्थ्यकर खान-पान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारक अब कम उम्र के लोगों के लिए भी तेजी से प्रासंगिक होते जा रहे हैं।
जागरूकता से कार्रवाई की ओर संस्थान के हृदय रोग विभाग ने जोर दिया कि विश्व हृदय दिवस केवल एक दिन की जागरूकता तक सीमित नहीं होना चाहिए।
यह दिन हमें जानकारी को दैनिक जीवन की आदतों में बदलने की याद दिलाता है। अधिक चलें, समझदारी से भोजन करें, तंबाकू से दूर रहें, रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें, चेतावनी देने वाले लक्षणों को पहचानें और बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लें।



