नकली औषधियों को बाजार में खपाने वाले संगठित गिरोह का खुलासा
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने चार अभियुक्तों पर कराई एफआईआर

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश भर में नकली दवाओं के कारोबार पर लगातार कार्रवाई जारी है। बुधवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने
नकली बिलिंग एवं फेक ट्रांजैक्शन और नकली औषधियों को बाजार में खपाने वाले संगठित गिरोह का खुलासा कर चार अभियुक्तों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में एफआईआर दर्ज कराई है।
नकली एवं संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन को जड़ से उखाड़ने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत लखनऊ में बड़ी कार्रवाई की गई हैं।
जिसमें (1)अंकुर अवस्थी, प्रोपराइटर, मेसर्स हेल्थ प्लस, अमीनाबाद, लखनऊ, (2) मनीष बाजपेयी, संचालक, मेसर्स एम के फार्मा, अमीनाबाद, लखनऊ (3) गोविंद शुक्ला, संचालक, मेसर्स राम फार्मा,
अमीनाबाद, व (4) ऐजाज अहमद, मेसर्स संचालक, पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस, सहारनपुर, द्वारा बिना भौतिक दवा सप्लाई के आपस में क्रॉस-बिलिंग करके, फर्जी बिल बनाने और बिना बैंक ट्रांसफर के कागजी लेनदेन दर्शाकर नकली/काउंटरफ़िट
औषधियों को बाज़ार में खपाने वाला के आरोप में BNS की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 व 338 के अंतर्गत थाना अमीनाबाद में एफआईआर दर्ज कराई गई ।
अनियमितताओ में शामिल..
👉 फर्म मेसर्स हेल्थ प्लस, अमीनाबाद, लखनऊ के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी ने बिना वैध औषधि लाइसेंस प्राप्त किए ही बड़े पैमाने पर दवाओं का भंडारण व लेनदेन दिखाया।
जिसके मुख्य कर्ताधर्ता और 20% के साझेदार गोविंद शुक्ला थे। गोविंद शुक्ला और अंकुर अवस्थी ने एक ही फ्लोर पर स्थित अपनी फर्मों हेल्थ प्लस और राम फार्मा के माध्यम से अवैध डायवर्जन का खेल चलाया।
इस गिरोह में सहारनपुर की पिछले दो वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ी फर्म पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक एजाज अहमद भी शामिल है। जिन्होंने बंद फर्म का इस्तेमाल कागजी रोटेशन और दवाओं की फर्जी खरीद दिखाने के लिए किया।
इसी क्रम में, एमके फार्मा के प्रोपराइटर मनीष बाजपेई ने फर्जी बिलिंग का सहारा लेकर वित्तीय वर्ष 2026 में ₹8.87 करोड़ की दवाओं का पर्चेज दिखाया।
साक्ष्य छिपाने की नीयत से लैपटॉप का पिछला डेटा डिलीट कर दिया गया और अन्य फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये की Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup के फर्जी क्रय बिल तैयार किए गए।
जब इन दवाओं के निर्माताओं जैसे Wardex व Stadmed और संबंधित फर्मों से सत्यापन किया गया, तो उन्होंने बिक्री से पूरी तरह इंकार किया और इन दवाओं के बैचों को पूर्णतः नकली (Counterfeit) बताया।
जांच के दौरान एम.के. फार्मा से Zoryl M1 की लगभग 39.20 लाख दवाएं गायब पाई गईं, जिन्हें अवैध रूप से बाजार में खपाकर जनता के स्वास्थ्य और जान-माल के साथ गंभीर खिलवाड़ किया गया।
👉 इन चारों आरोपियों ने एक संगठित गिरोह के रूप में कूटरचना करने, फर्जी रिकॉर्ड बनाने और अमानक व नकली दवाओं का अवैध कारोबार कर करोड़ों रुपये का अवैध धन अर्जित किया है।
जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने के इस संगठित अपराध के लिए ये चारों संचालक पूर्णतः जिम्मेदार पाए गए। वहीं इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
FSDA की प्रदेश स्तर पर कार्रवाई में
लखनऊ में बिना भौतिक सप्लाई के कागजी फर्जीवाड़े, बंद फर्मों के नाम पर बिलिंग और अवैध गोदामों से दवाओं की बरामदगी पर कड़ी कार्रवाई की गई।
अमीनाबाद की 8 फर्मों व सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर पर FIR: फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर हेरफेर के
जरिए नकली दवाएं खपाने पर मेसर्स महाराजा इण्टरप्राइजेज, शिव शक्ति फार्मा,अशोक फार्मास्युटिकल्स, अपोलो फार्मेसी, शिव शक्ति मेडिकल, मीत इण्टरप्राइजेज, विद्या फार्म, आर एन फार्मा तथा ‘मार्ग सॉफ्टवेयर’ डिस्ट्रीब्यूटर आबिद अली के खिलाफ थाना अमीनाबाद में FIR दर्ज कराई गई।
अवैध गोदाम व परिवहन पर छापेमारी (जुलाई 2026) रिकॉर्ड ..
अमीनाबाद में रंजीत सिंह जुल्का के अवैध गोदाम से ₹21 लाख की नकली दवाएं (Telma, Pantop 40 आदि) जब्त कर 8 आरोपियों पर FIR सं. 0056/2026 दर्ज हुई।
आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास से ₹1.6 लाख की नकली दवाएं सीज कर आरोपी विमल कुमार सिंह व संदीप श्रीवास्तव पर FIR सं. 0086/2026 दर्ज की गई।
बक्शी का तालाब (BKT) में अवैध भंडारण व परिवहन पर राज विक्रम सिंह सहित 3 आरोपियों के खिलाफ FIR सं. 0278/2026 दर्ज हुई।
आगरा में कार्रवाई का विवरण..
आगरा को केंद्र बनाकर चलाए गए अभियान में औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों द्वारा कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट में कई संदिग्ध फर्मों पर छापेमारी कर 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ 9 एफआईआर दर्ज कराई गईं। जिसमें
👉 फर्जी बिलिंग व संगठित गिरोह (विभोर व वरदान मेडिकल नेटवर्क): जाली बिलों के आधार पर टोरेंट
फार्मा की नकली दवाएं (Chymoral Forte, Aciloc) बेचने तथा ESI / सरकारी कोटे की दवाओं (Zostum-१ की कालाबाजारी का खुलासा हुआ।
इसमें विभोर मेडिकल (संजीव गुप्ता), वरदान मेडिकल (अंकुर अग्रवाल), हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल और पाल ब्रदर्स (कोलकाता) के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
अस्पताल सप्लाई की दवाओं की री-लेबलिंगः ‘युग फार्मा’, ‘शारदा फार्मा’ और ‘आरएमडी फार्मा’ के माध्यम से सरकारी/अस्पताल सप्लाई की दवाओं (इंसुलिन आदि) के केमिकल से मार्क मिटाकर, फर्जी लेबल व मनमानी MRP लगाकर खुले बाजार में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर FIR दर्ज की गई।
👉 वीए मेडिकोज, रुद्रा व भगवती मेडिकल सिंडिकेटः मूल लेबल हटाकर नकली दवाएं (Telma-H, Jardiance आदि) बेचने, साक्ष्य छिपाने हेतु लैपटॉप नष्ट करने का झूठा बहाना बनाने तथा निरस्त/कागजी फर्मों से ₹1.88 करोड़ की फर्जी बिलिंग करने पर FIR दर्ज कराई गई।
इसके अतिरिक्त भी पूर्व में जनपद आगरा में रु 3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी/डिफेन्स सप्लाई की औषधियां सीज की गई।
जिसमें मई 2026 में अभियान में ‘ज्योति ड्रग हाउस’ के अवैध गोदामों से रु 2.5 करोड़ की इंसुलिन, वैक्सीन व डिफेन्स /ESI सप्लाई की दवाएं बिना कोल्ड-चेन के भंडारित मिलीं।
वहीं, ‘श्री मेडिकल एजेंसीज’ से रु 50 लाख की नकली ‘Oxalgin DP’ जब्त हुई। इसका अंतर-राज्यीय नेटवर्क अलीगढ़ होते हुए रुड़की (उत्तराखंड) की ‘Leroi Pharmaceuticals’ तक जुड़ा मिला, जहां छापा मारकर नकली पैकेजिंग सामग्री जब्त की गई।
जून 2026 अभियान में ‘ब्राइट फार्मा’ संचालक के आवास पर रु 5.20 लाख की जीवनरक्षक व सरकारी दवाओं पर अवैध री-लेबलिंग (मूल्य री-प्रिंट) पकड़ी गई। इसके अलावा सीएफ इंटरप्रयसीस (स्वतः निरस्त गोदाम का उपयोग),
सुमित माधवानी और सुमित गुप्ता के अवैध गोदामों पर छापेमारी कर कुल रु 67 लाख मूल्य की अवैध दवाएं व फिजिशियन सैंपल्स जब्त किए गए।
अंतर्राज्यीय नेटवर्क पर कार्रवाई की बनी रणनीति..
स्पूरियस (counterfeit) दवा के अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए लिए विभाग द्वारा अन्य राज्यों से जुड़े व्यक्तियों निर्माण इकाइयों के विरुद्ध रणजीत सिंह जुल्का, अमीनाबाद,
लखनऊ के अवैध गोदाम से बरामद नकली औषधियां का मुख्य श्रोत राजस्थान राज्य से जुड़े भूपेंद्र शर्मा एवं ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के विरुद्ध भी FIR दर्ज कराई गयी है।
साथ ही विभागीय अधिकारियों द्वारा देहरादून, उत्तराखंड राज्य में संचालित कई ब्रांडो की नकली (काउंटरफ़िट) दवा निर्माण करने वाली अवैध निर्माण इकाई पर छापे के कार्रवाई की गयी। जिसमे 4 अभियुक्त, राजेंद्र सिंह उर्फ़ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी एवं विनय चन्द्र के FIR दर्ज कराई गयी ।
स्पूरियस (counterfeit) दवा के अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने और इससे जुडे स्थानीय थोक फ़र्मों के लाइसेंस निरस्तीकरण एवं संचालकों और ऐजंट्स के विरूद्ध विधिक कार्रवाई करने के लिए आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उप्र द्वारा समस्त जनपदों के औषधि निरीक्षको को सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।



