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अमीनाबाद में केनाकोर्ट इंजेक्शन की संदिग्ध खरीद-बिक्री की जाँच शुरू 

एफएसडीए ने नकली दवाओं के नेटवर्क पर कसा शिकंजा

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में केनाकोर्ट इंजेक्शन की संदिग्ध खरीद-बिक्री की जाँच शुरू की गयी।

शुक्रवार को नकली और अमानक दवाओं के खिलाफ चल रहे अभियान के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अमीनाबाद में दर्ज मुकदमे की जांच का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की है।

वही औषधि निरीक्षक विवेक कुमार सिंह ने थाना अमीनाबाद में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 0062/2026 की विवेचना में राज राजेश्वर इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर बाल गोविंद और बाँके बिहारी फार्मा के प्रोपराइटर रोहित चड्ढा को शामिल कर जांच एवं अग्रिम कार्रवाई का आग्रह किया है।

मार्ग सॉफ्टवेयर की जांच में सामने आया संदिग्ध लेनदेन

विभागीय जांच में 3 अगस्त को दोनों फर्मों के निरीक्षण के दौरान मार्ग सॉफ्टवेयर और स्टॉक लेजर की जांच की गई। जिसमें राज राजेश्वर इंटरप्राइजेज द्वारा अमीनाबाद की भारत फार्मा से बड़ी मात्रा में केनाकोर्ट 40 mg वायल खरीदने और उसे बाँके बिहारी फार्मा को बेचने का रिकॉर्ड मिला।

जांच के अनुसार 25 अप्रैल 2025 को 1,440 वायल भारत फार्मा से खरीदकर 6 मई 2025 को बाँके बिहारी फार्मा को बेचने का रिकॉर्ड दर्ज है। इसी तरह 22 जून 2025 को 720 वायल की खरीद और उसी दिन बिक्री दर्शाई गई। इस 720 वायल को बाद में डेबिट नोट के जरिए वापस लिया जाना भी रिकॉर्ड में दर्ज है।

3,600 वायल की खरीद पर नहीं मिले साक्ष्य..

जांच में 3,600 केनाकोर्ट 40 mg वायल का लेनदेन का मामला सामने आया है। जिसमें बाँके बिहारी फार्मा के मार्ग सॉफ्टवेयर में इन 3,600 वायल की खरीद राज राजेश्वर इंटरप्राइजेज से दर्शाई गई, लेकिन इसके लिए कोई भौतिक बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। वही

विभाग के अनुसार फर्म संचालक रोहित चड्ढा ने बताया कि 720 वायल का बिल उपलब्ध कराया गया था। जबकि 3,600 वायल का बिल बाद में देने की बात कही गई थी।

विभाग द्वारा अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय दिए जाने के बावजूद कोई उत्तर या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। वहीं, राज राजेश्वर इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर बाल गोविंद ने 3,600 वायल बेचने से इनकार किया।

720 वायल का नहीं मिला स्टॉक..

जांच में बाँके बिहारी फार्मा के वित्तीय वर्ष 2025-26 के लेजर में 720 वायल का स्टॉक शेष दिखा, लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसका ओपनिंग बैलेंस शून्य पाया गया। विभाग के अनुसार संबंधित 720 वायल का भौतिक स्टॉक भी फर्म में उपलब्ध नहीं मिला।

इस कारण उक्त औषधि का नमूना लेकर उसकी जांच और विश्लेषण कराना भी संभव नहीं हो पाया। विभाग ने इस पूरे लेनदेन को संदिग्ध मानते हुए जांच में शामिल करने की सिफारिश की है।

करीब 7.20 लाख रुपये के लेनदेन का संदेह

विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक 3,600 वायल की बाजार कीमत करीब 200 रुपये प्रति वायल मानने पर इस लेनदेन की अनुमानित कीमत 7.20 लाख रुपये लगाई गयी। जांच में फर्जी या कूट रचित बिलिंग के माध्यम से औषधियों की खरीद, बिक्री और भंडारण की आशंका जताई गई है।

इसके अलावा स्टॉक लेजर में केनाकोर्ट की खरीद लागत से कम कीमत पर बिक्री किए जाने के रिकॉर्ड को भी विभाग ने संदिग्ध माना है। मई 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 5,616 वायल की खरीद-बिक्री में करीब 29 हजार रुपये का नुकसान दर्शाया गया है।

भारत फार्मा से जुड़े मामले की भी जांच में दोनों फर्मों का संबंध भारत फार्मा, अमीनाबाद से सामने आया है।

भारत फार्मा के संचालक देवेंद्र शुक्ला के खिलाफ नकली दवाओं की खरीद-बिक्री और फर्जी बिलिंग के जरिए बाजार में खपाने के आरोप में अमीनाबाद थाने में पहले से मुकदमा अपराध संख्या 0062/2026, 29 जुलाई 2026 दर्ज है।

औषधि निरीक्षक ने अब इस मुकदमे की विवेचना में सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों को शामिल करते हुए बाल गोविंद और रोहित चड्ढा की भूमिका की जांच कर BNS की सुसंगत धाराओं में अग्रिम कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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