कोविड के बाद पल्मोंनरी हाइपरटेंशन के बढे मरीज – डॉ वेद प्रकाश
खर्राटे से सिस्टेमिक हाइपरटेंशन और पल्मोंनरी हाइपरटेंशन होने के लक्षण

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। कोविड के बाद पल्मोंनरी हाइपरटेंशन के मरीजों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अधिकतर फेफड़ों के सिकुड़न के मामले बढे हैं। यह मामले कोविड में भी देखने मिले और वर्तमान में भी मामले बढ़ रहें हैं।
शुक्रवार को यह जानकारी केजीएमयू पल्मोंनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में आयोजित प्रेस वार्ता में विभागाध्यक्ष प्रो वेद प्रकाश ने दी। साथ में पद्मश्री राजेंद्र प्रसाद, प्रो सूर्यकांत, प्रो पुनीत कुमार एवं प्रो अनुराग राय ने अपने- अपने विचार साझा किये।
प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि कल यानि 8 -9 अगस्त को पीएच समिट का आयोजन होने जा रहा हैं। जिसमें देश दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ जानकारी साझा करेंगे। वहीं डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि खर्राटे से सिस्टेमिक हाइपरटेंशन और पल्मोंनरी हाइपरटेंशन होने के लक्षण हो सकते हैं।
पल्मोंनरी हाइपरटेंशन पांच तरह होते हैं। इसी क्रम में पुनीत कुमार ने बताया कि पल्मोंनरी हाइपरटेंशन से गठिया रोग का भी कारण हो सकता है। कहा ऐसे लक्षण कई तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं। डॉ वेद प्रकाश ने कहा कि
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता अक्सर देर से चलता है । इसके लक्षणों में
सांस फूलना पल्मोनरी हाइपरटेंशन का प्रथम संकेत हो सकते हैं। बीमारी की जल्द पहचान से समय रहते इलाज संभव है। PH समिट का उद्देश्य पल्मोनरी हाइपरटेंशन के क्षेत्र में हुए नये अध्ययन को मरीजों के इलाज तक पहुंचाना है। प्रो वेद प्रकाश ने आकड़ो के अनुसार बताया कि
पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH), का ग्लोबल एज-स्टैंडर्डाइज़्ड प्रसार प्रति 100,000 आबादी पर लगभग 2.28 मामले है। अमेरिका में पल्मोनरी हाइपरटेंशन का सबसे प्रमुख कारण बाएं हिस्से की हृदय संबंधी स्थितियों, जैसे कि लेफ्ट हार्ट फेलियर, के कारण होता है।
भारत में, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन का अनुमानित प्रसार प्रति लाख आबादी पर 0.15 है। जिसमें से 0.06 प्रतिशत मामले इडियोपैथिक यानि (बिना किसी ज्ञात कारण के) हैं।
भारत में अस्पताल-आधारित रिसर्च के अनुसार, जन्मजात हृदय रोग, कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, रूमैटिक हार्ट डिज़ीज़ और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) जैसी पहले से मौजूद बीमारियों वाले लोगों में PH के मामले ज़्यादा होते हैं।
गुर्दे रोग के पीड़ित मरीजों में कंज़र्वेटिव मैनेजमेंट, हीमोडायलिसिस (HD) या कंटीन्यूअस एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस (CAPD) से गुज़र रहे। 100 मरीज़ों की एक स्टडी में, पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) का कुल प्रसार 41% पाया गया।
जबकि पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) वाले लगभग 70–80% मरीज़ों में बीमारी का पता तब चलता है जब वे पहले ही बीमारी के गंभीर चरण (WHO फंक्शनल क्लास III या IV) में पहुँच चुके होते हैं। पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता अक्सर देर से चलता है; लक्षण शुरू होने से लेकर बीमारी का पता चलने तक का औसत समय 2 साल से ज़्यादा होता है।
इलाज में तरक्की के बावजूद, बिना इलाज वाले पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) में मरीज़ के जीवित रहने की औसत अवधि 3 साल से कम होती है,
लक्षण शुरू होने और बीमारी का पता चलने के बीच औसतन 1.5–2 साल की देरी होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि सांस फूलने और थकान जैसे शुरुआती लक्षण नजर अंदाज कर दिये जाते हैं। इडियोपैथिक PAH पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 2–4 गुना ज़्यादा होता है।
एक अध्ययन के अनुसार, बीमारी की गंभीरता और इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के आधार पर, इलाज का सालाना खर्च ₹2 लाख से लेकर ₹20 लाख से ज़्यादा तक हो सकता है; खासकर उन मरीज़ों के लिए जिन्हें कॉम्बिनेशन थेरेपी या प्रोस्टासाइक्लिन-बेस्ड इलाज की ज़रूरत होती है।
जिन मरीज़ों की बीमारी बढ़ चुकी है और मेडिकल थेरेपी से ठीक नहीं हो रही है, उनके लिए लंग ट्रांसप्लांटेशन या हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन ही पक्का इलाज का विकल्प है।
जानें पल्मोनरी हाइपरटेंशन..
पल्मोनरी हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जो फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है और तब होती है जब फेफड़ों में रक्तचाप सामान्य से अधिक हो जाता है।
इसलिए, हृदय को फेफड़ों में रक्त पंप करने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। सांस फूलना, चक्कर आना और सीने में दर्द कुछ ऐसे लक्षण हैं जो हृदय पर इस बढ़े हुए दबाव के कारण हो सकते हैं।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कारण..
पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) का सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन यह कुछ ऐसी चिकित्सीय स्थितियों के कारण हो सकता है जो फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। अवरुद्ध करती हैं या प्रभावित करती हैं। इससे पल्मोनरी धमनियों में उच्च रक्तचाप हो जाता है।
जानें पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण..
👉 सूखी खांसी या खांसी के साथ खून आना, सीने में दर्द, कमज़ोरी, जी मिचलाना और उल्टी होना, पेट, पैरों या पंजों में सूजन, सांस फूलना, चक्कर आना, जिससे बेहोशी भी हो सकती है, साइनोसिस (होंठ और त्वचा का रंग नीला पड़ना) , थकान होना यह लक्षण होते हैं।
प्रो वेद प्रकाश ने बताया कि पल्मोनरी हाइपरटेंशन पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में “एडवांसिंग डायग्नोसिस, थेराप्यूटिक्स एंड आउटकम्स” (निदान, इलाज और नतीजों को बेहतर बनाना) थीम वाली इस दो-दिवसीय कॉन्फ्रेंस में
देश-विदेश के जाने-माने एक्सपर्ट्स पल्मोनरी हाइपरटेंशन के निदान और मैनेजमेंट में हुई नई तरक्की पर चर्चा करेंगे। यह विभाग पल्मोनरी हाइपरटेंशन वाले मरीज़ों की पूरी जांच और इलाज में सक्रिय रूप से शामिल है।
खासकर उन मरीज़ों के मामले में जिन्हें क्रोनिक लंग डिज़ीज़ (फेफड़ों की पुरानी बीमारी) और इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन और क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं।
मरीज़ों की व्यवस्थित जांच के लिए पल्मोनरी फ़ंक्शन टेस्टिंग, इकोकार्डियोग्राफी, एडवांस्ड इमेजिंग और दूसरी जांचें की जाती हैं, और ज़रूरत पड़ने पर कार्डियोलॉजी, रुमेटोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और दूसरी स्पेशलिटीज़ के साथ मिलकर काम किया जाता है।
विभाग गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों (जिन्हें पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्राइसिस और राइट वेंट्रिकुलर फ़ेलियर की समस्या हो) के लिए खास देखभाल भी देता है।
साथ ही, यह विभाग इस बीमारी की जल्दी पहचान, सही रिस्क स्ट्रैटिफ़िकेशन (जोखिम का आकलन) और सबूतों पर आधारित इलाज को बढ़ावा देता है, क्योंकि अक्सर इस बीमारी का पता देर से चलता है।
इस समिट में जाने-माने इंटरनेशनल स्पीकर, यूएसए के डॉ. संदीप सहाय और आयरलैण्ड के डॉ. सैयद रेहान क्वादेरी शामिल होंगे। इनके साथ ही देश के कई जाने-माने एक्सपर्ट्स भी हिस्सा लेंगे।
जिनमें डॉ. दिगंबर बेहरा, डॉ. ध्रुव चौधरी, डॉ. शुभाकर कंडी, डॉ. जूलियस पुन्नेन, डॉ. प्रकाश एस, डॉ. प्रशांत बोभाते, डॉ. आलोक नाथ, डॉ. सत्यवीर यादव, डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. बाशा जलाल खान, डॉ. अदिति सिंघवी, डॉ. गौरव चौधरी, डॉ. ज़फ़र नियाज़, डॉ. अपार जिंदल और देश भर के कई अन्य एक्सपर्ट्स शामिल हैं।
उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इससे इस अहम एकेडमिक पहल की अहमियत और बढ़ जाएगी। जिसका मकसद पल्मोनरी हाइपरटेंशन के मरीज़ों के लिए जागरूकता, जल्दी निदान और बेहतर नतीजों को बढ़ावा देना है।



