हनुमान सहस्त्रनाम स्तोत्र जप से होती सुख-समृद्धि शक्ति प्राप्त -मुक्तिनाथानन्द
रामकृष्ण मठ में मना ज्येष्ठ माह का बड़ा मंगल

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी के निराला नगर स्थित रामकृष्ण मठ मंदिर में पंचम बड़ा मंगल हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
साथ ही समस्त कार्यक्रम को यूट्यूब चैनेल ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः 4ः30 बजे ठाकुर की मंगल आरती से हुई। तत्पश्चात प्रातः 6ः50 बजे वैदिक मंन्त्रोच्चारण एवं गीता पाठ मठ के स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा किया गया।
तत्पश्चात मुख्य मंदिर के सामने हनुमानजी की प्रतिष्ठित मूर्ति पर मालयार्पण, पूजा और आरती के बाद स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। वहीं प्रातः 7ः15 बजे स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा (ऑनलाइन धार्मिक प्रवचन) सत प्रसंग हुआ।
इसी क्रम में लखनऊ की 10 वर्षीय विलक्षण प्रतिभाशाली बालिका कुमारी आर्यमा शुक्ला ने हनुमान सहस्त्रनाम का पाँच बार अखंड पाठ स्मरण शक्ति के आधार पर प्रस्तुत किया।
बता दे कि कुमारी आर्यमा को संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता, दुर्गा सप्तशती सहित अनेक स्तोत्र, सहस्त्रनाम तथा लगभग तीन हजार संस्कृत श्लोक जुबानी कंठस्थ हैं। उनकी अद्भुत स्मरण क्षमता, स्पष्ट उच्चारण एवं आध्यात्मिक अभिरुचि ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध एवं भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर मठाध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने कुमारी आर्यमा शुक्ला को आशीर्वाद एवं सम्मान प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।
इस अवसर पर मठाध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने बताया कि ज्येष्ठ मास बड़ा मंगल पर हनुमान की पूजा सबसे उत्तम मानी गई है।
मान्यता है इस दिन बजरंगबली की उपासना, मंत्र जाप और उनके निमित्त दान करने से समस्त कष्ट दूर होते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन ही हनुमान ने बूढ़े वानर का रूप लेकर भीम से युद्ध किये थे और उन्हें हराकर उनका अहंकार तोड़ दिया था।
स्वामी ने कहा कि हनुमान सहस्त्रनाम का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है, साथ ही तनाव से मुक्ति मिलती है और सफलता प्राप्त होती है।
सायंकाल में भगवान रामकृष्ण की सध्या आरती के पश्चात हनुमान की पूजा एवं आरती स्वामी कृष्णपदानन्द द्वारा की गई।
तदुपरान्त मठ के अध्यक्ष, स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ व समापन संगीत भगवान राम के एक भजन -“इतनी विनती रघुनंदन से“*प्रस्तुत की गई इसकी गूँज से मंदिर में आध्यात्मिक परिवेश की सृष्टि हुई।
कार्यक्रम का समापन उपस्थित भक्तगणों को प्रसाद वितरण किया गया।



