एक पेड़ गुरू के नाम‘ स्थापना करने की अपील
मंत्री ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। प्रदेश को हरा भरा बनाने के लिए एक पेड़ गुरू के नाम‘ स्थापना करने के लिए अपील की गयी ।
बुधवार को वन एवं वन्यजीव विभाग मुख्यालय स्थित पारिजात सभाकक्ष में राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार), वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश, डॉ अरुण कमार सक्सेना ने उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण
अधिनियम 1976 के अन्तर्गत प्रतिबंधित प्रजातियों की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा की। साथ ही गठित समिति की प्रगति की समीक्षा कर वर्तमान समय में विशेष परिक्षेत्रों एवं राज्य की जनता को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए
यथावश्यक संशोधन कराये जाने के साथ ही कृषि भूमि में वृक्ष पातन के सम्बन्ध में मॉडल रूल्स तैयार करने के निर्देश दिये। उक्त के अतिरिक्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में पौधशालाओं व वृक्षारोपण की योजना, कृषि वानिकी नीति, वानिकी कार्यों के लिए
आउटसोर्सिंग के माध्यम से श्रमिकों की सेवायें क्रय किये जाने के सम्बन्ध में शासन द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुपालन की प्रभागवार अद्यतन प्रगति, लैण्ड बैंक सत्यापन आर्द्रभूमि अधिसूचित से
सम्बन्धित अधिसूचनाओं, व्यय, गोरखपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना, ग्रीन बिल्डिंग व कुकरैल नाइट सफारी के निर्माण, वन बल के आधुनिकीकरण के लिए ईको पर्यटन प्रोजेक्ट तथा अनुसंधान एवं प्रलेखन यूनिट की गतिविधियों व प्रगति के सम्बन्ध में विस्तृत समीक्षा की।
मंत्री ने वृक्षारोपण महायज्ञ के अंतर्गत व्यपाक जनसहभागिता तथा विभागों के मध्य समन्वय से प्रदेश में 40 करोड़ से अधिक पौध रोपित करने तथा महर्षि चरक औषधि वन, समृद्धि वन, कपि वन, ऊर्जा वन,
समरस वन व वन्देमातरम् वाटिका की स्थापना के लिए किये गये प्रयासों पर प्रसन्नता व्यक्त कर समस्त प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए निर्देश दिया कि इसी उत्साह, उल्लास व जनसहभागिता से रक्षाबन्धन पर्व पर
‘भाई-बहन वृक्षारोपण‘ तथा शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को समर्पित ‘एक पेड़ गुरू के नाम‘ की स्थापना की जाए। मंत्री ने पौधशालाओं में उगायी जा रही पौधों की गुणवत्ता व वृद्धि के लिए
पौधशालाओं में ग्राफ्टिंग व टिश्यू कल्चर द्वारा पौध उगाने तथा इसके लिए प्रत्येक वन प्रभाग में सम्बन्धित वन कर्मियों को प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
मंत्री ने कृषकों की आय में वृद्धि के लिए कृषि वानिकी नीति को अंतिम रूप देने तथा प्रदेश में स्थापित कृषि आधारित उद्योगो आवश्यकता व मांग के अनुरूप पौध प्रजाति उगाने के लिए किसानों को प्रेरित व प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने वृक्षारोपण क्षेत्रों की प्रभावी सुरक्षा, अनुरक्षण, अनुश्रवण एवं थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग करवाने के निर्देश देते हुए कहा कि पौधों की सिंचाई, एवं रखरखाव के सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाय तथा बाढ़ जल भराव की स्थिति में जल निकासी की व्यवस्था की जाए।
मंत्री ने प्रदेश में अधिसूचित किये गये 101 वेटलैण्ड्स का वैज्ञानिक प्रबन्धन, जलागम क्षेत्र में वृक्षारोपण व वेटलैण्ड्स को प्रदूषण मुक्त रखने तथा उक्त के लिए ग्राम समाज से समन्वय स्थापित किया जाए।
मंत्री ने अन्य वेटलैण्ड्स को भी यथाशीघ्र अधिसूचित करवाने के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर चिन्ता व्यक्त करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यून करने के लिए चेनलिंक फेंसिग तथा तेंदुआ सफारी व रेस्क्यू सेंटरों का निर्माण यथाशीघ्र पूर्ण करने तथा इस के लिए स्थानीय ग्रामवासियों को जागरूक करने व वन्यजीव प्रबन्धन में उनकी सहभागिता प्राप्त करने का निर्देश दिया।
मंत्री ने चित्रकूट, बाराबंकी, प्रतापगढ़ व फिरोजाबाद सहित विभिन्न जनपदों में संचालित ईको पर्यटन प्रोजेक्ट की समीक्षा कर कार्य तत्काल पूर्ण कर कार्याें के लोकापर्ण तथा
प्रत्येक प्रभाग में इको पर्यटन की संभावनाओं का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण कर इको पर्यटन विकास योजनाएं तत्काल प्रेषित करने का निर्देश दिया।
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, वी. हेकाली झिमोमी ने अवगत कराया कि कृषि भूमि पर वृक्षों के पातन तथा
प्रतिबंधित प्रजातियों को निर्धारित करने के सम्बन्ध में अन्य राज्यों द्वारा किये गये प्राविधानों तथा उनके द्वारा अपनायी गयी बेस्ट प्रेक्टिसेज का अध्ययन कर निजी भूमि विशेषकर कृषि भूमि पर वृक्षों के पातन के मॉडल रूल्स तैयार करने के लिए समिति का गठन किया गया है।
समीक्षा बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष,उप्र सुनील चौधरी ने अवगत कराया कि आगामी रक्षाबन्धन व
शिक्षक दिवस के अवसर पर ‘भाई-बहन वृक्षारोपण‘ तथा ‘एक पेड़ गुरू के नाम‘ रोपित कर गुरू वन की स्थापना में प्रतिभाग करने के लिए जनप्रतिनिधियों से भी अनुरोध किया जा रहा है।
श्री चौधरी ने अवगत कराया कि वृक्षारोपण महायज्ञ के अन्तर्गत आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रमों में हरड़, बहेड़ा, असना जैसी महत्वपूर्ण व भूली-बिसरी प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण जलवायु परिवर्तन विभाग, वी. हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, अनुराधा वेमुरी,
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना एवं कृषि वानिकी, दीपक कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, आईटी, एन रविन्द्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, परियोजना, राम कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्य वन संरक्षक, मिर्जापुर मण्डल, सुशांत शर्मा,
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, कैम्पा, ललित वर्मा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रशासन, एपी सिन्हा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, आगरा जोन, भीमसेन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्य वन संरक्षक,
रूहेलखण्ड जोन बरेली, पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक कोर्टकेस, प्रमोद कुमार गुप्ता, मुख्य वन संरक्षक, नीति विश्लेषण एवं समन्वय, उत्तर प्रदेश, अदिति शर्मा सहित प्रदेश के समस्त वनाधिकारियों द्वारा वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रतिभाग किया।



