डॉक्टरों ने लिंफोमा के बारे में किया जागरूक
जुग्गौर में एक सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों ने लिंफोमा के बारे में जागरूक किया।
मंगलवार को विश्व लिंफोमा जागरूकता दिवस पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के क्लिनिकल हेमेटोलॉजी एवं सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने उत्तर प्रदेश हेमेटोलॉजी समूह के सहयोग से ग्रामीण स्वास्थ्य एवं प्रशिक्षण केंद्र, जुग्गौर में एक सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
जिसका विषय “लिंफोमा यानि लसीका ग्रंथियों का कैंसर ‘हर गांठ टीबी नहीं होती” था। जिसमें आशा कार्यकर्ताओं और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के बीच लिंफोमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रारंभिक पहचान और समय पर रेफरल के महत्व को बताया। डॉक्टरों का कहना है कि
लिंफोमा लसीका तंत्र का एक कैंसर है, जो सामान्यतः लसीका ग्रंथियों की लगातार बनी रहने वाली या बढ़ती हुई सूजन के रूप में प्रकट हो सकता है। विशेषकर गर्दन, बगल या जांघ के ऊपरी भाग में बढ़ी हुई लसीका ग्रंथियों को अक्सर तपेदिक या अन्य संक्रमणों से जोड़ा जाता है।
कार्यक्रम के दौरान जागरूक करते हुए हर गांठ टीबी नहीं होती और लगातार, बढ़ती हुई या बिना स्पष्ट कारण वाली सूजन के लिए उचित चिकित्सीय मूल्यांकन आवश्यक है। बिना कारण वजन कम होना, लंबे समय तक बुखार रहना और अत्यधिक रात में पसीना आना जैसे चेतावनी लक्षणों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ता शामिल रही। जिसमें समुदाय स्तर पर लिंफोमा के महत्वपूर्ण संकेतों और लक्षणों को पहचानने तथा आगे के मूल्यांकन के लिए उचित और समय पर रेफरल को सुगम बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम में हॉजकिन लिंफोमा से पीड़ित व्यक्ति भी शामिल रहे। जिन्होंने दर्शकों के साथ निदान, उपचार और स्वस्थ होने की अपनी व्यक्तिगत यात्रा साझा की।
उनके अनुभव ने लिंफोमा के बारे में एक प्रेरणादायक और आश्वस्त करने वाला दृष्टिकोण प्रस्तुत किया तथा शीघ्र चिकित्सकीय सहायता लेने और उपचार के दौरान आशावान बने रहने के महत्व को रेखांकित किया।
उनके साहस के सम्मान में और दूसरों को प्रेरित व शिक्षित करने के लिए अपना अनुभव साझा करने के लिए कार्यक्रम के दौरान उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं
यह कार्यक्रम संस्थान निदेशक प्रो सीएम सिंह, प्रो. डॉ. नम्रता पी. अवस्थी, विभागाध्यक्ष, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, प्रो. डॉ. विनिता शुक्ला, प्रभारी, आरएचटीसी, जुग्गौर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस पहल के माध्यम से
“हर गांठ टीबी नहीं होती। किसी लगातार बनी रहने वाली या बढ़ती हुई गांठ को नज़रअंदाज़ न करें। समय पर जांच से
शीघ्र पहचान, समय पर रेफरल, उचित निदान, प्रभावी उपाय बताया गया।



