स्वतंत्रता दिवस पर पौधरोपण, वन्देमातरम वाटिका की स्थापना
वन विभाग मुख्यालय पर हुआ ध्वजारोहण

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। स्वतंत्रता दिवस पर पौधरोपण के साथ वन्देमातरम वाटिका की स्थापना की गयी । शनिवार को
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वन विभाग मुख्यालय, अरण्य भवन के परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यकर उत्तर प्रदेश सुनील चौधरी ने ध्वजारोहण के उपरान्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा देश के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाले सैनिकों
तथा हमारे उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए दिये गये योगदान की सराहना करते हुए वन परिवार के सदस्यों को निष्ठापूर्वक कार्य कर पर्यावरण जनित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, सुनील चौधरी ने पृक्षारोपण, वन सुरक्षा, पौधशाला प्रबन्धन, वन्यजीव संरक्षण व प्रबन्ध सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 28 वनाधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित व पुरस्कृत किया।
एक पेड़ मां के नाम’ विषयवस्तु पर आधारित वृक्षारोपण महायज्ञ 2026′ के अंतर्गत स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कुकरैल वन सहित प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक ही स्थल पर 150 पौधों का रोपण कर 68 वन्दे मातरम् वाटिकाओं की स्थापना की गयी।
प्रदेश में स्थापित इन वन्दे मातरम वाटिकाओं में 74785 पौधे रोपित किये गये। राजधानी में कुकरैल वन में स्थापित की गयी। ‘वन्दे मातरम वाटिका की स्थापना का मुख्य आकर्षण अशोक चक्र की 24 तील्लियों के सिरे में अशोक के पौध रोपित किये गये।
कुकरैल वन में स्थापित की गयी ‘वन्दे मातरम वाटिका की स्थापना के लिए आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय समुदाय, वरिष्ठ वनाधिकारियों तथा सेवानिवृत्त वनाधिकारियों ने भी उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
वन्देमातरम वाटिका इन पौधों को किया रोपित..
‘वन्दे मातरम् वाटिका’ में स्थानीय मृदा व जलवायु के अनुकूल पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, अशोक सहित विभिन्न प्रजातियों के साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों की प्रिय प्रजातियों के रोपण को वरीयता दी गयी।
‘वन्दे मातरम् वाटिका की स्थापना में वन्दे मातरम् फाउण्डेशन, वन्दे मातरम् ट्रस्ट, स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवार-जन, महिलाओं, सांस्कृतिक समूहों, एनसीसीएनएसएस, युवक मंगलदल, महिला मंगलदल सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर पौध रोपित किये।
उल्लेखनीय है कि बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वन्दे मातरम् अमर राष्ट्रगीत ही नहीं अपितु भारत के आत्मा की अभिव्यक्ति है।
विगत 150 वर्षों से अधिक समय से यह गीत हमारे देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता का प्रतीक बना हुआ है। यह भी उल्लेखनीय है कि वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपरान्त यह प्रथम स्वतंत्रता दिवस है।



