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परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल की स्मृति में इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स किया समर्पित 

समारोह में लेफ्टिनेंट कर्नल थापा की पुत्रियां मुख्य अतिथि के रूप में रहीं मौजूद 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। देश के सर्वोच्च बलिदान देने वाले परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल की स्मृतियों को यादगार बनाया गया। बुधवार को

भारतीय सेना ने अपने एक महान युद्ध नायक को भावपूर्ण सम्मान देते हुए छावनी स्थित सूर्य खेल परिसर के अत्याधुनिक इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा की स्मृति में समर्पित किया।

यह पहल उनके अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली विरासत को चिरस्थायी बनाने की दिशा में किया गया ।

समर्पण समारोह में लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा की पुत्रियां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

वहीं लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी-इन-सी, सूर्य कमान, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों एवं लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा के परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में समर्पण पट्टिका का अनावरण किया गया।

यह अवसर भारतीय सेना की अपने युद्ध नायकों को सदैव स्मरण रखने और उनकी विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बना। ज्ञात हो कि

वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन मेजर धन सिंह थापा 1/8 गोरखा राइफल्स के मात्र 28 सैनिकों के साथ पैंगोंग झील के उत्तर में स्थित सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सिरिजाप-1 पोस्ट की रक्षा कर रहे थे।

20 अक्टूबर 1962 को संख्या और संसाधनों में अत्यधिक विषमता तथा भीषण तोपखाने और मोर्टार फायर के बावजूद उन्होंने अपने सैनिकों के साथ दुश्मन के कई हमलों को विफल किया।

अंततः पोस्ट पर दुश्मन का कब्जा होने के बाद उन्हें युद्धबंदी बना लिया गया। प्रारंभ में उन्हें वीरगति प्राप्त मानते हुए उनके असाधारण शौर्य एवं नेतृत्व के लिए देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

मई 1963 में स्वदेश लौटने के बाद उन्होंने सेना में अपनी विशिष्ट सेवा जारी रखी और लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे। वर्ष 1980 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने लखनऊ को अपना निवास बनाया और जीवनपर्यंत सेना तथा उसकी गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहे।

धन सिंह थापा इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब खेल, फिटनेस और वेलनेस के आधुनिक केंद्र के साथ-साथ शौर्य की जीवंत स्मृति के रूप में भी स्थापित रहेगा।

यह समर्पण भारतीय सेना के उस संकल्प को दोहराता है कि उसके वीरों का साहस और बलिदान केवल इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली संस्थाओं में भी सदैव जीवित रहेगा

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