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ईंधन बचत को ले सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने पर फोकस 

परिवहन मंत्री ने विभाग को दिए निर्देश 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। ईंधन बचत को लेकर सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने पर जोर दिया गया। शुक्रवार को

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह ने उन्होंने कहा कि 11 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक में ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए निर्देश दिए थे। परिवहन मंत्री ने कहा इसीक्रम में

वर्तमान वैश्विक एवं राष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों के दृष्टिगत ईंधन की बचत और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए दिशा निर्देश जारी किये गए है।

परिवहन मंत्री ने निर्देश देते हुए कहा आगामी 12 माह के लिए रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए ताकि ई-वाहनों और सार्वजनिक वाहनों को प्रोत्साहन मिले। पीक आवर्स के दौरान बसों के फेरे बढ़ाए जाएं ताकि निजी कारों का उपयोग कम हो।

जिन कार्यालयों में 500 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां परिवहन विभाग एवं 30 प्र. राज्य सडक परिवहन निगम द्वारा समन्वय कर विशेष बस सेवाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाए।

परिवहन मंत्री ने कहा कि ‘पूल कार’ व्यवस्था का ऑडिट किया जाए और अधिकारियों के पास उपलब्ध अतिरिक्त वाहनों के आवंटन को निरस्त किया जाए।

डीजल एवं पेट्रोल के उपयोग में यथासंभव कटौती करने के निर्देश दिए हैं।

श्री सिंह ने कहा कि सभी विभागीय कार्यालयों और डिपो में बिजली की बचत के लिए अनावश्यक लाइटें विशेषकर रात्रि 10 बजे के बाद बंद रखी जाएं।

कार्यालयों में एसी का तापमान 25/26 डिग्री सेल्सियस पर नियत (फिक्स ) किया जाए। चंदौली मॉडल (गोबर गैस से ऊर्जा निर्माण) का अध्ययन कर इसे निगम के डिपो और कार्यशालाओं में लागू करने की कार्ययोजना बनाई जाए। 30प्र. राज्य सड़क परिवहन निगम की कैंटीन में

आयातित खाद्य तेल के उपयोग में कमी लाएं और आयातित उत्पादों के बजाय स्थानीय उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जाये। सभी डिपो एवं कार्यालयों में अनिवार्य रूप से PNG कनेक्शन लेने की संभावनाओं का परीक्षण कर आख्या उपलब्ध कराई जाए।

निर्माण कार्यों में आयातित बिटुमेन के स्थान पर ‘बायो-बिटुमेन’ के उपयोग को यथासंभव प्राथमिकता दी जाए।

विभाग में आगामी 6 माह तक अधिकारियों की शासकीय विदेश यात्राओं पर पूर्ण रोक रहेगी। मुख्यालय से बाहर के अधिकारी के साथ भौतिक बैठकों के स्थान पर ‘वर्चुअल मीटिंग’ को प्राथमिकता दी जाए।

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