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नर्सिंग अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला 

नर्सिंग अनुसंधान एवं ग्रांट लेखन के महत्व पर दिया जोर

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। नर्सिंग अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।

एसजीपीजीआईएमएस के कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा टेलीमेडिसिन ऑडिटोरियम में “अनुदान एवं प्रकाशन नर्सिंग अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाना” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

जिसका उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को शोध, वैज्ञानिक लेखन, प्रकाशन तथा रिसर्च के लिए अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना था।

कार्यशाला का आयोजन डॉ. राधा के. प्रोफेसर एवं प्राचार्य, कॉलेज ऑफ नर्सिंग के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने नर्सिंग अनुसंधान एवं ग्रांट लेखन के महत्व पर जानकारी दी।

इस अवसर पर विभिन्न संस्थानों से नर्सिंग शिक्षक, शोधकर्ता, स्नातकोत्तर विद्यार्थी एवं नर्सिंग अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वहीं

कार्यशाला को संस्थान निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर डॉ. आरके धीमन का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। उद्घाटन सत्र में डॉ. शालीन कुमार डीन, डॉ. अंकुर भटनागर सब-डीन, नर्सिंग, मंजू सिंह मुख्य नर्सिंग अधिकारी एवं प्रिंसिपल डाक्टर राधा के. उपस्थित रहीं।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने नर्सिंग रिसर्च से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। डॉ. मनीष दीक्षित, प्रोफेसर, न्यूक्लियर मेडिसिन ने शोध विषयों की पहचान एवं फंडिंग के अवसरों पर चर्चा की,

जबकि डॉ. शगुन मिश्रा, प्रोफेसर रेडियोथेरेपी ने नर्सिंग रिसर्च में नैतिकता के महत्व को समझाया। अमेरिका से ऑनलाइन जुड़ीं डॉ. सुजायलक्ष्मी देवरायसमुद्रम ने नर्सिंग अनुसंधान में नवाचार पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. अंशुमान एलहेंस एसोसिएट प्रोफेसर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग ने बौद्धिक संपदा अधिकार एवं रिसर्च ईमानदारी पर जानकारी दी। डॉ. आलोक कुमार, एडीशनल प्रोफेसर, मालीक्यूलर मेडिसिन ने ग्रांट प्रस्ताव तैयार करने की

प्रक्रिया समझाई तथा डॉ. रोहित एंथनी सिन्हा एडीशनल प्रोफेसर, एंडोक्राइनोलाजी ने वैज्ञानिक लेखन एवं शोध पत्र प्रकाशन के बारे में जानकारी प्रदान की।

इसके अतिरिक्त डॉ. अमित गोयल, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, हेपेटोलॉजी ने रिसर्च परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन पर चर्चा की। प्रो. विकास अग्रवाल प्रोफेसर इम्यूनौलाजी ने शोध प्रस्तावों के अस्वीकृत होने के कारणों एवं उन्हें बेहतर बनाने के उपाय बताए।

वहीं डॉ. सीपी चतुर्वेदी एडीशनल प्रोफेसर, स्टेम सेल अनुसंधान केंद्र, हेमेटोलॉजी विभाग ने प्लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) से बचाव एवं प्रकाशन प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में प्रतिभागियों ने रिसर्च, फंडिंग, प्रकाशन एवं प्लेजरिज्म से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट एवं वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ।

इस कार्यशाला में लखनऊ के विभिन्न प्रतिष्ठित नर्सिंग महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के आयोजन सचिव श्री यादिद्या, डॉ. अंजू वर्मा एवं आशुतोष के. चंचल रहे।

कार्यशाला में साक्ष्य-आधारित नर्सिंग प्रैक्टिस, नैतिक प्रकाशन, आपसी सहयोग एवं वैश्विक शोध सहभागिता के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। ताकि नर्सिंग शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

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