बुद्ध पूर्णिमा आत्म जागरण का प्रतीक – स्वामी मुक्तिनाथानंद
राम कृष्ण मठ में मना बुद्ध पूर्णिमा

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी के निराला नगर स्थित रामकृष्ण मठ में बुद्ध पूर्णिमा का पावन उत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मठ परिसर में दिनभर विविध आध्यात्मिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा । कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के माध्यम से किया गया, जिससे देश-विदेश के असंख्य श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन में ऑनलाइन सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल ठाकुर जी की मंगल आरती एवं प्रार्थना के साथ हुआ। जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इसके उपरांत प्रातः 6ः50 बजे प्रज्ञापारमिता सूत्रम् का सामूहिक पाठ स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान उपस्थित भक्तगण मंत्रोच्चारण एवं ध्यान में लीन रहे। प्रातःकालीन सत्र में भजन, स्तोत्र एवं संकीर्तन के माध्यम से भगवान बुद्ध के प्रति श्रद्धा अर्पित की गई।
प्रातः 7ः15 बजे मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा ऑनलाइन सत्संग एवं आध्यात्मिक प्रवचन दिया गया। जिसमें उन्होंने भगवान गौतम बुद्ध के जीवन, उनके तप, त्याग और ज्ञान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है, केवल एक पर्व नहीं बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला एक आध्यात्मिक अवसर है।
संध्याकालीन सत्र में रामकृष्ण देव की आरती के उपरांत भगवान बुद्ध की विधिवत पूजा एवं आरती सम्पन्न हुई, जो स्वामी कृष्णपदानन्द के निर्देशन में आयोजित की गई।
इसके पश्चात स्वामी इष्टकृपानन्द के नेतृत्व में भजन-कीर्तन एवं श्यामनाम संकीर्तन हुआ। जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्ति भाव से ओत-प्रोत हो उठा।
वहीं मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचन में भगवान गौतम बुद्ध के जीवन एवं उनके उपदेशों की विस्तृत व्याख्या की।
उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन अवसर है। भगवान बुद्ध का जीवन त्याग, करुणा, सत्य और आत्मबोध का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
अपने मुख्य प्रवचन में स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने कहा कि “बुद्ध” कोई व्यक्तिवाचक नाम नहीं, बल्कि एक अवस्था है-एक ऐसी चेतना, जिसमें मनुष्य पूर्ण ज्ञान, करुणा और जागृति को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का अद्वितीय स्रोत है, जो हमें आत्मचिंतन, आत्मसंयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
स्वामी ने बुद्ध के चार आर्य सत्य-दुःख, दुःख का कारण, दुःख का निरोध और दुःख से मुक्ति के मार्ग-की व्याख्या करते हुए कहा कि ये सिद्धांत आज के युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन की समस्याओं का समाधान बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आंतरिक जागरूकता और साधना में निहित है।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान बुद्ध का अवतरण मानव के भीतर सुप्त दिव्यता को जागृत करने के लिए हुआ था। “भगवान मनुष्य शरीर धारण करते हैं ताकि मनुष्य स्वयं भी अपने भीतर ईश्वरत्व को विकसित कर सके,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय परंपरा में भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नवम अवतार माना जाता है।
स्वामी ने अपने प्रवचन में स्वामी विवेकानन्द के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने बुद्ध को मानव इतिहास का महानतम आध्यात्मिक व्यक्तित्व माना है। बुद्ध का जीवन निडरता, करुणा, सेवा और त्याग का अनुपम उदाहरण है, जो सम्पूर्ण मानवता को शांति, सहिष्णुता और मध्यम मार्ग का संदेश देता है।
उन्होंने भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार राजकुमार सिद्धार्थ ने जीवन के दुःख-जरा, व्याधि और मृत्युकृको देखकर वैराग्य ग्रहण किया और सत्य की खोज में निकल पड़े।
वर्षों की कठोर तपस्या के पश्चात बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे “बुद्ध” कहलाए। इसके बाद उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से मानवता को दुःख से मुक्ति का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे और सभी ने अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की। समग्र आयोजन ने सभी के हृदय में आध्यात्मिक चेतना एवं शांति का संचार किया।



