पकड़ा गया फर्जी डॉक्टर, दर्जनों से अधिक मेडिकल छात्राओं को निशाना बनाने का आरोप
दिल्ली एम्स ले जाने का दिया झांसा, धर्मांतरण की फिराक में था आरोपी

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। केजीएमयू में धर्मांतरण आरोपी फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया।
मंगलवार को संस्थान प्रशासन द्वारा ब्राउन हाल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान प्रवक्ता डॉ केके एवं ट्रामा सेंटर चिकित्सा अधीक्षक डॉ प्रेमराज सिंह, डॉ शांतनु व अन्य डॉक्टरों द्वारा संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया
कि संस्थान में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद के निर्देशन में गठित टीम अपना कार्य कर रही थी। इसी दौरान जानकारी मिली की मेडिकल छात्राओं को बाहरी लोगों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।
आरोपी मेडिकल कैंप के लिए बाहर ले जाने के लिए छात्राओं को लेटर जारी किया गया है। जब लेटर की पड़ताल की गयी और उसमें मिली कमियों से मामला संदिग्ध बन गया।
साथ ही यह राज खुला कि छात्राओं का ब्रेनवाश करने के लिए आरोपी द्वारा व्हाट्स ऐप ग्रुप चलाया जा रहा है। जिसमें आनन फानन में निगरानी टीम को अलर्ट किया गया था। खासकर मेडिकल छात्राओं को टारगेट किया जा रहा था ।
इसी बीच फर्जी डॉक्टर आरोपी हसम अहमद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर संस्थान प्रवक्ता डॉ केके सिंह की फोटो लगाकर व लेटर पैड बनाकर छात्राओं को दिल्ली एम्स ले जाने के लिए और यूएसए डॉक्टरों से मिलाने के नाम पर जारी किया था।
डॉ केके सिंह ने बताया कि डॉ रमीज मलिक लव जिहाद मामले के बाद संस्थान में निगरानी बढ़ाई गयी थी। जिसमें रेजिडेंट डॉक्टरों की मदद से आरोपी फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया। डॉक्टर सिंह ने बताया कि आरोपी फर्जी डॉक्टर हसम अहमद डॉक्टर ड्रेस में संस्थान में आने की बात बताई है।
उन्होंने बताया कि अन्य आरोपियों के संपर्क की जानकारी जुटाई जा रही है कि संस्थान और कितने लोग शामिल हो सकते है। उन्होंने बताया कि अभी संस्थान में अन्य शामिल लोगों की पुष्टि नहीं हुई है जैसे जानकारी मिलेगी बताया जायेगा।
वहीं आरोपी फर्जी डॉक्टर को प्रेस वार्ता में पेश किया गया। जिसमें आरोपी फर्जी डॉक्टर हसम अहमद ने अपना जुर्म स्वीकार्य करते हुए कहा कि राजधानी स्थित शिया पीजी कॉलेज में 12 वीं तक पढ़ाई की है, सिद्धार्थ नगर का रहने वाला हूं।
भारतीय गौरव परिषद संस्था कचहरी में बनवाई थी। जिससे लोगों की मदद कर सकूँ। आरोपी फर्जी डॉक्टर हसम अहमद ने कहा संस्था के मुख्य संचालक फैक अहमद मंसूरी के अधीन कार्य करता हूं। आरोपी ने राजधानी तीन चिकित्सा संस्थानों से संपर्क होने की बात कबूल की है।
जिसमें इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज डॉक्टर अबू बकर, एरा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर आमिर, एसजीपीजीआई में डॉक्टर अंशिका शामिल है। प्रेस वार्ता में बताया कि इन सभी डॉक्टरों से संपर्क संस्था फाउंडर द्वारा कराई गयी थी।
सूत्रों के अनुसार यह आरोपी डॉक्टर पहले बीते वर्ष 2023 में संस्थान में इलाज के लिए आने वाले मरीजों से दलाली करता था। वहीं डॉक्टरों ने दया दिखाते हुए इसे छोड़ दिया था। वहीं संस्थान प्रशासन द्वारा आरोपी फर्जी डॉक्टर को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। संस्थान प्रशासन अन्य की तलाश में निगरानी बढ़ा दी है।
ज्ञात हो कि इसके पहले संस्थान में डॉक्टर रमीज मलिक लव जिहाद का मामला चर्चा का विषय बन गया था। ऐसे में आरोपी के मंसूबे पर कई सवाल उठ रहें है कि क्या संस्थान में कोई बड़ा सिंडिकेट लीड कर रहा है या धर्मांतरण का बड़ा खेल खेलने की साजिश रची जा रही थी ।
अभी हाल ही में अवैध मजारों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता डॉ केके सिंह द्वारा की गयी। इसी मामले को लेकर क्या निशाना तो नहीं बनाया जा रहा है। ऐसे कई सवाल लोगों के बीच चर्चा जोरों पर चल रही है।


