दूरसंचार विभाग ने अफवाहों पर दिया स्पष्टीकरण
मोबाइल टावरों से उत्सर्जित तरंगो पर दी सफाई

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। दूरसंचार विभाग द्वारा अफवाहों पर स्पष्टीकरण दिया गया।
सोमवार को भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग की उत्तर प्रदेश पूर्व लाइसेंस सेवा क्षेत्र ने मोबाइल टावरों से उत्सर्जित होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन के संबंध में जनमानस में व्याप्त भ्रांतियों के निवारण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की ।
विभाग ने आश्वस्त किया है कि 5जी , 4जी , सहित सभी तकनीकों के मोबाइल टावरों से उत्सर्जित तरंगें, दूरसंचार विभाग द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के पूर्णतः अंतर्गत होते हैं और आम जनता को रेडिएशन संबंधी किसी भी भ्रामक जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि 5जी या अन्य किसी भी नेटवर्क के टावर रेडिएशन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात पूर्णतः निराधार है। 2जी से लेकर 5 जी तक, सभी मोबाइल नेटवर्क ‘नॉन-आयनाइजिंग’ रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग करते हैं।
इन तरंगों में ऊर्जा का स्तर इतना न्यून होता है कि ये मानव शरीर अथवा डीएनए को कोई क्षति नहीं पहुंचा सकतीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी इस तथ्य की पुष्टि की जा चुकी है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित ईएमएफ उत्सर्जन मानक अंतर्राष्ट्रीय मानकों की तुलना में 2 गुना अधिक कठोर हैं, जो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
आम जनमानस की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, उत्तर प्रदेश पूर्व एलएसए द्वारा अपने क्षेत्राधिकार में स्थापित सभी मोबाइल टावरों की निरंतर निगरानी और ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण सुनिश्चित किया जाता है।
दूरसंचार सेवा प्रदाता द्वारा सभी टावरों का स्व-प्रमाणन प्रस्तुत किया जाता है। जिसके उपरांत विभाग की टीम द्वारा प्रत्येक वर्ष कुल लगाए गए मोबाइल टावर के 5 % टॉवरों का औचक निरीक्षण और ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण किया जाता है।
उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए क्षेत्र में स्थापित कुल 1,21,866 बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) में से 6,240 का वर्ष 2025-26 के दौरान ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण किया गया है और ये सभी बीटीएस निर्धारित सुरक्षित सीमाओं के भीतर कार्य करते पाए गए हैं।
मानकों का उल्लंघन करने वाले दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ सम्बंधित बीटीएस को तत्काल प्रभाव से बंद करने का सख्त प्रावधान भी लागू है।
बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) की सुरक्षा प्रणाली को पुष्ट करते हुए, उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए के अपर महानिदेशक दूरसंचार, अरुण कुमार वर्मा ने कहा विभाग नागरिकों को पूर्णतः आश्वस्त करना चाहता है कि
उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए में संचालित सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) (चाहे वह 2 जी हो या 5जी ) दूरसंचार विभाग के ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण की कसौटी पर अभी तक खरे उतरे है। विभाग की नियमित ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि जन-स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग द्वारा ‘तरंग संचार’ पोर्टल (tarangsanchar.gov.in) संचालित किया जा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी नागरिक सुगमतापूर्वक अपने आवास अथवा कार्यालय के समीप स्थापित मोबाइल टावरों की स्थिति देख सकता है।
इसके साथ ही, यह भी सत्यापित किया जा सकता है कि संबंधित टावर सुरक्षित ईएमएफ रेडिएशन मानकों का अनुपालन कर रहा है या नहीं। पोर्टल पर वैज्ञानिक तथ्य एवं अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भी जन-जागरूकता के लिए उपलब्ध हैं।
यदि किसी नागरिक को अपने आवास, कार्यालय अथवा परिसर के समीप स्थित किसी विशिष्ट मोबाइल टावर से उत्सर्जित रेडिएशन के विषय में तनिक भी संशय है, तो वह इसकी जांच के लिए आधिकारिक अनुरोध कर सकता है।
इच्छुक व्यक्ति ‘तरंग संचार पोर्टल’ [https://tarangsanchar.gov.in/EMFPortal/Request/Dmeasurement] के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर टावर की ईएमएफ रेडिएशन जांच करवा सकता है। इस व्यक्तिगत ईएमएफ रेडिएशन परीक्षण हेतु मात्र ₹4000/- का नाममात्र शुल्क निर्धारित किया गया है।
दूरसंचार विभाग डिजिटल इंडिया के संकल्प को साकार करने की दिशा में 5 जी एवं अन्य दूरसंचार सेवाओं के सुचारू, बाधारहित एवं सुरक्षित विस्तार के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।


