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संक्रमण रोकथाम पर कार्यशाला, बताये उपाय 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण रोकथाम के दिए सुझाव 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। संक्रमण रोकथाम के बारे में जानकारी साझा की गयी। बुधवार को

एसजीपीजीआई प्रशासन विभाग के अस्पताल संक्रमण नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा प्रोफेसर आर. हर्षवर्धन की अध्यक्षता में नर्सिंग अधिकारियों और नर्सिंग छात्रों के लिए CLABSI की रोकथाम पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

सेंट्रल लाइन एसोसिएटेड ब्लड स्ट्रीम इंफेक्शंस (CLABSI) रोगी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है, जो रुग्णता में वृद्धि, अस्पताल में लंबे समय तक रहने और स्वास्थ्य देखभाल लागत में वृद्धि का कारण बनता है।

यह मानते हुए कि इनमें से अधिकांश संक्रमण साक्ष्य -आधारित पद्धतियों का पालन करके रोके जा सकता हैं। जिसका उद्देश्य नर्सिंग प्रोफेशनल के बीच ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को मजबूत करना था।

राइज (शिक्षा के माध्यम से इन्फ्यूजन मानकों को बढ़ाना) पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सेंट्रल वेनस कैथेटर (CVC) और पेरिफेरल इंट्रावेनस (PIV) कैथेटर की देखभाल और रखरखाव में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना था।

यह प्रशिक्षण रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र और इन्फ्यूजन नर्सेज सोसाइटी द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप था। वहीं

कार्यशाला का उद्घाटन अस्पताल प्रशासन विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया। अस्पताल प्रशासन विभाग के कार्यवाहक प्रमुख, प्रोफेसर ज्ञान चंद ने अस्पताल में होने वाले संक्रमणों की रोकथाम में

रोगाणुहीन प्रथाओं के पालन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और साक्ष्य-आधारित प्रोटोकॉल के निरंतर अनुपालन और कौशल सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

इसी क्रम में संस्थान चिकित्सा अधीक्षक, प्रो आर. हर्षवर्धन ने कहा सीएलएबीएसआई रोकथाम दिशानिर्देशों की प्रभावशीलता सख्त और निरंतर अनुपालन पर निर्भर करती है।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मामूली विचलन भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है और नर्सिंग प्रोफेशनल से सतर्क रहने और रोगी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया।

साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने अनुपालन सुनिश्चित करने और रोकथाम प्रथाओं का नेतृत्व करने में प्रभारी नर्सों की भूमिका पर जोर दिया, साथ ही संक्रमण नियंत्रण को मजबूत करने और रोगी के परिणामों में सुधार लाने के लिए सक्रिय नेतृत्व को प्रोत्साहित किया।

रोगी सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण में सीनियर रेजिडेंट ( PDCC) डॉ. शालिनी त्रिवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

कार्यशाला में एक अभिनव “आओ और सीखो” मॉडल अपनाया गया, जिससे नर्सिंग अधिकारियों और छात्रों को छोटे समूहों में भाग लेने की अनुमति मिली। प्रत्येक समूह ने एक घंटे के सत्रों में भाग लिया।

जिसमें सीएलएबीएसआई रोकथाम बंडलों, कैथेटर रखरखाव प्रोटोकॉल व safe Vascular access protocol पर केंद्रित व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल थे। जिसमें पुतलों और सिमुलेशन-आधारित शिक्षण का उपयोग किया गया था।

प्रतिभागियों को साक्ष्य आधारित CLABSI रोकथाम बंडलों, वैस्कुलर एक्सेस उपकरणों के सुरक्षित सम्मिलन और रखरखाव प्रक्रियाओं, संक्रमण के जोखिमों और

प्रारंभिक चेतावनी संकेतों की पहचान, और समस्या-समाधान दृष्टिकोणों के माध्यम से वास्तविक नैदानिक ​​परिदृश्यों के प्रबंधन पर प्रशिक्षित किया गया। डॉ. अश्मिता पॉल ने व्यावहारिक प्रदर्शन सत्रों का संचालन और नेतृत्व किया।

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