एकेटीयू के इनोवेशन हब में स्मार्ट-आईओटी कार्यशाला का शुभारंभ
विशेषज्ञों ने भविष्य की संभावनाएं गिनाई

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में विषय विशेषज्ञों ने भविष्य की संभावनाएं गिनाई।
गुरुवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय स्थित इनोवेशन हब यूपी में दो दिवसीय ‘स्मार्ट-आईओटी कार्यशाला’ का शुभारंभ किया गया ।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) की आधुनिक तकनीकों, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा नवाचार की संभावनाओं से परिचित कराना है।
कार्यशाला के दौरान लगभग 10 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की।
उद्घाटन सत्र में सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज (सीएएस) के निदेशक प्रो. एसपी शुक्ला ने आईओटी तकनीक के बढ़ते दायरे और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने स्मार्ट सिटी, औद्योगिक स्वचालन, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि एवं दैनिक जीवन में आईओटी की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए इस क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास के अवसरों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में डॉ. अनुज कुमार शर्मा, डीन एकेडमिक्स, सीएएस एवं एसोसिएट डीन–इनोवेशन एवं सोशल एंटरप्रेन्योरशिप ने वर्तमान समय में आईओटी के प्रचलित अनुप्रयोगों और दैनिक जीवन में इसके बढ़ते उपयोग पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार विभिन्न उपकरणों, सेंसर और इंटरनेट आधारित प्रणालियों के माध्यम से तकनीक हमारे आसपास की व्यवस्थाओं को अधिक स्मार्ट और उपयोगी बना रही है।
कार्यशाला में फ्यूचर गुरुकुल्स के आईओटी विशेषज्ञ आशीष गौतम तथा चार प्रशिक्षकों की टीम तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को आईओटी की मूल अवधारणाओं, सेंसर एवं एक्चुएटर, माइक्रोकंट्रोलर, आर्डुइनो, ईएसपी32 तथा वायरलेस संचार तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
व्यावहारिक सत्रों में आईओटी किट के माध्यम से सर्किट निर्माण, सेंसर इंटरफेसिंग एवं डेटा संग्रहण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को स्मार्ट उपकरणों के प्रोटोटाइप निर्माण, क्लाउड इंटीग्रेशन, डेटा मॉनिटरिंग तथा इंटरनेट के माध्यम से उपकरणों के नियंत्रण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त वाई-फाई नियंत्रित कार, स्मार्ट सेंसर आधारित प्रणाली और अन्य आईओटी परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर भी मिलेगा।
कार्यशाला का समापन 30 अक्टूबर को प्रतिभागियों द्वारा विकसित परियोजनाओं के प्रदर्शन एवं विशेषज्ञों के साथ तकनीकी संवाद के साथ प्रस्तावित है।
जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के साथ उन्हें नवाचार एवं स्टार्टअप की संभावनाओं से जोड़ना है।



