योग हर आयु वर्ग के लिए फायदेमंद – मुकेश शर्मा
योग को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कल
लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। योग हर आयु वर्ग के लिए फायदेमंद है। शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता आज सर्वविदित है।
योग के प्रति लोगों की तेजी से बढ़ती रुझान का ही परिणाम है कि आज योग एक वैश्विक जनांदोलन का रूप अख्तियार कर चुका है। योग किसी एक आयु वर्ग के लिए नहीं बल्कि हर एक आयु वर्ग के लिए जरूरी है। शनिवार को
पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा का कहना है कि जीवनशैली को नियमित बनाने और नई ऊर्जा के संचार के लिए भी योग को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
योग की महत्ता देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी विजय पताका फहरा रही है। योग को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाने के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए ही हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।
इस साल इस खास दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” तय की गयी है। इसका मूल मकसद वृद्धावस्था को निरोगी, कष्ट रहित, आत्मनिर्भर और गरिमापूर्ण बनाने के लिए आज ही योग को अपनाने की प्रेरणा देना है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज दुनियाभर में स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हो रहा है।
योग की महत्ता का तो प्राचीन ऋषियों और मुनियों तक ने बखान किया है और उनका मानना था कि जीवन को सरल, सहज और संयमित करने का सबसे बड़ा उपाय योग, ध्यान और प्राणायाम में ही निहित है। इसी के बल पर वह वर्षों तक साधना में लीन रहते थे।
महर्षि पतंजलि को योग का जनक माना जाता है। उन्होंने प्राचीन योग परम्पराओं को व्यवस्थित कर 195 सूत्रों में संकलित किया है। उन्होंने चित्त को वश में करने और समाधि तक पहुँचने के लिए आठ चरण बताए हैं, जिन्हें अष्टांग योग कहा जाता है।
पहला चरण है यम यानि सार्वभौमिक नैतिक अनुशासन, दूसरा चरण- नियम मतलब व्यक्तिगत अनुशासन, तीसरा चरण- आसन यानि स्थिर और आरामदायक शारीरिक मुद्राएँ, चौथा चरण- प्राणायाम -श्वास-प्रश्वास पर नियंत्रण, पांचवां चरण- प्रत्याहार इन्द्रियों को वाह्य विषयों से हटाकर
अन्तर्मुखी करता है, छठा चरण –धारणा- मन को किसी एक लक्ष्य या बिंदु पर एकाग्र करना है, सातवाँ चरण- ध्यान- उस एकाग्र बिंदु पर चेतना का निरंतर प्रवाह बनाए रखना और अंतिम चरण समाधि – ध्याता और ध्येय का एक हो जाना, जहाँ साधक अपने वास्तविक स्वरूप में स्थिर हो जाता है।
रोजाना योग करने से मांशपेशियों में होने वाले खिंचाव से शरीर में लचीलापन आता है, संतुलन बढ़ता है और शारीरिक ताकत में वृद्धि होती है। हड्डियाँ मजबूत बनती हैं। आज लोग तरह-तरह के तनाव के दौर से गुजर रहे हैं, उससे उबरने का सबसे कारगर उपाय योग और प्राणायाम में निहित है और इससे मानसिक शांति भी मिलती है।
नकारात्मक प्रभाव में कमी आती है। योग रक्तचाप को नियंत्रित करने के साथ ही रक्त संचार को बेहतर बनाता है। शरीर में सूजन की समस्या से भी निजात मिलती है। योग से शरीर के लिए सबसे जरूरी नींद भी अच्छी आती है।
योग से एकाग्रता आती है, जिससे कार्यकुशलता बढ़ती है, जिससे लोगों को मनचाही मंजिल हासिल करने में भी आसानी होती है। योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) भी मजबूत बनती है।



