अंगदान से दो मरीजों को मिली नई जिंदगी
डॉक्टरों की टीम ने ट्रांसप्लांट सर्जरी को बनाया सफल

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। एसजीपीजीआई ने मानव कल्याण में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की।
शनिवार को संस्थान में मरीज के परिजनों द्वारा अंगदान की सहमति देकर दो मरीजों को नई जिंदगी प्रदान की है ।
मानवता और उदारता की एक मिसाल पेश करते हुए मध्य प्रदेश निवासी स्वर्गीय रानी देवी के परिजनों ने उनके ब्रेन स्टेम डेथ घोषित होने के पश्चात संस्थान में अंगदान का महान निर्णय लिया।
इस निर्णय से अंग विफलता से जूझ रहे दो मरीजों को नया जीवन प्राप्त हुआ। बीते दिनों रानी देवी को 20 मार्च को मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण भर्ती किया गया था।
न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ वेद प्रकाश मौर्य एवं डॉ अनंता ने 23 मार्च को भर्ती मरीज का जटिल ऑपरेशन किया। डॉ अरुण श्रीवास्तव द्वारा डॉ वेद को रोगी की सूचना दी गई थी और सभी प्रयासों के बावजूद मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जिसमें
चार वरिष्ठ चिकित्सकों के पैनल में डॉ कुंतल कांति दास भी सम्मिलित थे। बीते 27 यानि शुक्रवार को परीक्षण उपरांत मरीज को ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया गया। इस प्रक्रिया में डॉ अंकित द्वारा फॉरेंसिक विशेषज्ञ राय प्रदान की गई।
इसके पश्चात ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर संजय सिंह एवं सोट्टो -उत्तर प्रदेश MSSO कोऑर्डिनेटर भोलेश्वर पाठक द्वारा परिजनों को परामर्श दिया गया। जिसके फलस्वरूप परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। वहीं
संयुक्त निदेशक डॉ राजेश हर्षवर्धन द्वारा पूरी रात ट्रांसप्लांट एवं हार्वेस्ट टीमों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। साथ ही नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.नारायण प्रसाद के नेतृत्व में वेटिंग लिस्ट के अनुसार दो मरीजों का चयन किया गया। जिसमें डॉ जेया मेयप्पन ने रेनल ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ताओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसमें
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो एमएस अंसारी एवं डॉ संचित रुस्तगी द्वारा किडनी हार्वेस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई। प्रत्यारोपण प्रक्रिया डॉ संजय सुरेखा द्वारा सम्पन्न की गई।
एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ संदीप साहू द्वारा किया गया। जिसमें डॉ दिव्या एवं डॉ तपस का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
डॉ राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि 28 मार्च की सुबह 4 बजे सोट्टो -यूपी टीम द्वारा दोनों किडनियाँ सफलतापूर्वक EMRTC रीनल ट्रांसप्लांट OT तक पहुंचाई गईं। संस्थान की दूसरी उपलब्धि पर
निदेशक पद्मश्री प्रो आरके धीमन ने बताया कि यह वर्ष 2026 में संस्थान का दूसरा कैडेवरिक डोनेशन है। यह संस्थान के क्वॉर्टनरी हेल्थ केयर (SQHC) मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यह महान अंगदान न केवल दो जीवनों को नया अवसर प्रदान करता है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सुदृढ़ करता है।



