SHSRC-UP : के लिए दो दिवसीय राउंड टेबल मंथन
SHSRC-UP और SGPGIMS की बैठक में विषय विशेषज्ञ शामिल

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए विषय विशेषज्ञों ने गहन मंथन किया।
गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र-उत्तर प्रदेश (SHSRC-UP) के लिए रणनीतिक रोडमैप विकास विषयक दो दिवसीय राउंड टेबल बैठक का शुभारम्भ द सेंटरम के ऑप्टिमम हॉल में किया गया ।
एसएचएसआरसी-यूपी, एवं अस्पताल प्रशासन विभाग संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया जा रहा है।
पहले दिन की थीम “आरोग्य मंथन” तथा उप-थीम “स्वास्थ्य का मानकीकरण एवं प्रगति का मानचित्रणः उत्तर प्रदेश” रही। जिसमें नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासकों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्वास्थ्य क्षेत्र के अग्रणी अधिकारियों, शिक्षाविदों, विकास सहयोगी संस्थाओं तथा देश-विदेश के विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
इस राउंड टेबल बैठक ने एसएचएसआरसी-यूपी के संस्थागत विकास की मजबूत आधारशिला स्थापित की तथा इसे स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं रणनीतिक स्वास्थ्य प्रशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिए पाँच वर्षीय रणनीतिक कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति प्रदान की।
बैठक में प्राप्त अनुशंसाएँ एवं निष्कर्ष साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करने, स्वास्थ्य प्रणाली के सुशासन को सुदृढ़ करने तथा उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में सहायक होंगे। वहीं
एसएचएसआरसी-यूपी के कार्यकारी निदेशक एवं एसजीपीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) आर. हर्षवर्धन ने उद्घाटन संबोधन में ऐसी संस्था की आवश्यकता पर बल दिया जो स्वास्थ्य प्रणाली के प्रदर्शन का सतत विश्लेषण कर सके, साक्ष्य उत्पन्न करे तथा नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करे।
डॉ. एमपी गुप्ता, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) ने स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए नेतृत्व, नवाचार एवं प्रबंधन के सिद्धांतों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही प्रो आरके धीमन, निदेशक,
एसजीपीजीआईएमएस एवं सह-अध्यक्ष, एसएचएसआरसी-यूपी ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली का सुदृढ़ीकरण शासन, शैक्षणिक संस्थानों एवं तकनीकी सहयोगी संगठनों के सतत समन्वय से ही संभव है।
डॉ पिंकी जोवेल, आईएएस, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश एवं एसएचएसआरसी-यूपी की संचालन समिति की अध्यक्ष ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के मध्य समन्वय तथा साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।
अमित कुमार घोष, आईएएस, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन के लिए सुशासन, जवाबदेही एवं गुणवत्ता सुधार को प्रमुख आधार बताया। इसी क्रम में मनोज कुमार सिंह,
आईएएस, अध्यक्ष, एसएचएसआरसी-यूपी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश ने एसएचएसआरसी-यूपी को राज्य के प्रमुख तकनीकी थिंक टैंक के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो नीति, अनुसंधान एवं क्रियान्वयन के मध्य प्रभावी सेतु का कार्य करेगा।
प्रथम दिवस के वैज्ञानिक सत्र “सेहत संवाद” की थीम “डेटा से दिशाः उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य स्थिति” तथा उप-थीम “हम कहाँ हैं, क्या सुधारना है और आगे की दिशा क्या होगी” रही। इस सत्र में एसडब्ल्यूओसी (SWOC) विश्लेषण, गैप विश्लेषण तथा संदर्भ-आधारित विमर्श के माध्यम से उत्तर प्रदेश की प्रमुख स्वास्थ्य प्राथमिकताओं की पहचान की गई।
इन वैज्ञानिक चर्चाओं का उद्देश्य पाँच प्रमुख क्षेत्रों में साक्ष्यों को प्रभावी नीति-निर्देशन में परिवर्तित करना था।
चर्चा की पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों डॉ पिंकी जोवेल, आईएएस (मिशन निदेशक, एनएचएम), ऋतु माहेश्वरी, आईएएस (सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), डॉ नेहा शर्मा, आईएएस (सचिव, चिकित्सा शिक्षा),
डॉ. साइरस इंजीनियर (जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, अमेरिका) तथा कृतिका शर्मा, आईएएस (विशेष सचिव, चिकित्सा शिक्षा)- द्वारा प्रस्तुत की गई। जिसमें वर्तमान स्थिति, नियामकीय व्यवस्था तथा रणनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले प्रमुख अंतरालों को रेखांकित किया गया।
बैठक में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के बढ़ते भार, निवारक रणनीतियों को सुदृढ़ करने, निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाने तथा समेकित उपचार मार्ग विकसित करने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
उत्तर प्रदेश के डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र पर आयोजित सत्र में स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों की संचालनीयता (Interoperability), डेटा गवर्नेस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, विश्लेषणात्मक प्रणाली तथा वास्तविक समय आधारित निर्णय सहयोग तंत्र पर चर्चा हुई।
एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुधार के लिए मानकों, प्रत्यायन (Accreditation), क्लीनिकल गवर्नेस तथा संस्थागत गुणवत्ता आश्वासन की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
मानव संसाधन संबंधी चर्चा में कार्यबल योजना, क्षमता विकास, प्रदर्शन निगरानी तथा उपलब्ध मानव संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में शासन विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, विकास सहयोगी संगठनों एवं नागरिक समाज के मध्य सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) एवं सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए समन्वित योजना एवं प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।
वैज्ञानिक चर्चाओं को विभिन्न विषय विशेषज्ञों डॉ. ऋषि सेठी (केजीएमयू), डॉ. विश्वजीत कुमार (आईसीएमआर), डॉ. एमपी गुप्ता (आईआईएम लखनऊ), डॉ. अनंतरमन अय्यर (यूपी-टीएसयू), डॉ. अभय भगेल (राज्य परिवर्तन आयोग),
डॉ. अर्चना कुमारी (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय), डॉ. काशीपा हरित (एनएबीएच), डॉ. मन्नान अख्तर, आईएएस, प्रो. एस. वेंकटरमणैया (आईआईएम लखनऊ), डॉ. मधुप बाजपेयी (डब्ल्यूएचओ), श्री जॉन एंथनी (यूपी-टीएसयू) तथा डॉ. दानिश खान (यूनिसेफ उत्तर प्रदेश) के साक्ष्य-आधारित सुझावों से समृद्ध किया गया।
सत्र के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के सफल संस्थागत अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया गया। जिसमें एसएचएसआरसी-यूपी के विकास के लिए उनसे सीख प्राप्त की जा सके। सत्र की अध्यक्षता विकास गोठलवाल (पूर्व आईएएस), जनस्वास्थ्य एवं नीति सलाहकार ने की।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र (NHSRC) तथा हरियाणा, गुजरात, केरल एवं तमिलनाडु के राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्रों के विशेषज्ञों ने अपने संस्थागत अनुभव साझा करते हुए
मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण, तकनीकी इकाइयों के विकास, परिचालन मॉडल, साक्ष्य-आधारित निर्णय, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के एकीकरण, नीति क्रियान्वयन तथा वित्तीय एवं संस्थागत साझेदारी आधारित सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
सत्र का समापन आयोजन सचिव डॉ. गौरव के. झा द्वारा प्रमुख निष्कर्षों एवं रणनीतिक अंतरालों के समेकित प्रस्तुतिकरण के साथ हुआ।
इस अनुभव साझा करने की प्रक्रिया से उत्तर प्रदेश की जनसांख्यिकीय विविधता, रोग-प्रवृत्ति एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सफल मॉडलों के अनुकूलन पर सार्थक संवाद हुआ।
सभी प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से मत व्यक्त किया कि प्रस्तावित एसएचएसआरसी-यूपी को बहुविषयक संस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जो साक्ष्य सृजन, कार्यक्रम क्रियान्वयन, सुधारों के मूल्यांकन, स्वास्थ्य सुशासन एवं नवाचार को बढ़ावा देने में सक्षम हो।
समापन आयोजन सचिव डॉ. गौरव के. झा द्वारा व्यापक समीक्षा के साथ हुआ, जिसमें विभिन्न विषयगत सत्रों से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, रणनीतिक अंतरालों एवं
कार्यान्वयन योग्य अनुशंसाओं का समेकन प्रस्तुत किया गया।
आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस ऐतिहासिक राउंड टेबल बैठक से प्राप्त अनुशंसाएँ उत्तर प्रदेश में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, अंतर्विभागीय समन्वय, गुणवत्ता सुधार, डिजिटल नवाचार एवं सतत संस्थागत विकास को बढ़ावा देंगी।
एसएचएसआरसी-यूपी की स्थापना राज्य में स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने तथा उत्तर प्रदेश सरकार को अधिक सुदृढ़, समतामूलक एवं जन-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित करने में दीर्घकालिक सहयोग प्रदान करेगी।



