टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में बच्चों में समय पर पहचान जरुरी -डॉ एनबी सिंह
बाल रोग विशेषज्ञों को जिला स्तरीय प्रशिक्षण

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए बाल रोग विशेषज्ञों को जिला स्तरीय प्रशिक्षणदिया गया। बुधवार को
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में सहयोगी संस्था वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के सहयोग से बाल रोग विशेषज्ञों के लिए एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आयोजित इस प्रशिक्षण में जनपद के सभी ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), पाँच निजी मेडिकल कॉलेजों तथा चार जिला अस्पतालों से एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ ने प्रतिभाग किया। वहीं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में बच्चों में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
बच्चों में टीबी के लक्षण कई बार स्पष्ट नहीं होते, इसलिए बाल रोग विशेषज्ञों को एनटीईपी की गाइडलाइन के अनुरूप संदिग्ध मामलों की पहचान कर समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करना चाहिए।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य चिकित्सकों की क्षमता को और सुदृढ़ करना है, ताकि जनपद में बच्चों में टीबी के प्रत्येक संभावित मामले की बेहतर पहचान और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल ने कहा कि चिकित्सक एनटीईपी की नवीनतम गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चों में टीबी के संदिग्ध मामलों की जांच, सैंपल संग्रहण, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तथा टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट पर विशेष ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण जांच और समय पर उपचार से टीबी मुक्त जनपद, प्रदेश एवं भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका गुप्ता ने प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में टीबी के नैदानिक लक्षणों की पहचान, छाती के एक्स-रे की व्याख्या, गैस्ट्रिक एस्पिरेट एवं इंड्यूस्ड स्पुटम के सैंपल संग्रहण की मानक तकनीकों तथा एनटीईपी के डायग्नोस्टिक एल्गोरिदम के अनुसार टीबी के निदान की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बच्चों में टीबी की पहचान के लिए केवल एक जांच पर्याप्त नहीं होती। बच्चे के लक्षणों, चेस्ट एक्स-रे और अन्य आवश्यक जांचों के आधार पर टीबी की पुष्टि की जाती है।
वीरांगना अवंतीबाई जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान ने फेफड़ों की टीबी के अलावा शरीर के अन्य अंगों में होने वाली एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी, जैसे लिम्फ नोड, प्ल्यूरल, एब्डॉमिनल तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) टीबी के विभिन्न स्वरूपों, उनकी पहचान, जांच एवं रोगी प्रबंधन से संबंधित नवीनतम दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ. अनिमेष, 16 बाल रोग विशेषज्ञ, एनटीईपी के जिला स्तरीय अधिकारी एवं सदस्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



