उत्तर प्रदेशजीवनशैलीबड़ी खबर

मां शिशु के बेहतर स्वास्थ्य को कम से कम तीन वर्ष का अंतर रखना आवश्यक – डॉ एनबी सिंह 

विश्व जनसंख्या दिवस कल 

 

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। माँ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए तीन वर्ष अंतराल रखना आवश्यक बताया गया।

जनपद में अस्थायी परिवार नियोजन साधनों के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इंटरवल आईयूसीडी प्रसवोत्तर आईयूसीडी तथा अंतरा इंजेक्शन जैसी आधुनिक परिवार नियोजन सेवाओं को बड़ी संख्या में दंपतियों ने अपनाया है।

इन सेवाओं के माध्यम से दंपति अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुरूप गर्भधारण के बीच उचित अंतर बनाए रखने के लिए सुरक्षित एवं प्रभावी गर्भनिरोधक विकल्प चुन रहे हैं। शुक्रवार को

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।

इस वर्ष इसकी थीम “हेल्दी टाइमिंग एंड स्पसिंग बेटवीन प्रेगनेंसीज फॉर वेल – बीइंग ऑफ़ मदर एंड चाइल्ड एंड टू प्रवेन्ट अनइंटेंडेड प्रेगनेंसीज ” तथा स्लोगन “जब बच्चों में हो सही अंतराल, परिवार बने स्वस्थ और खुशहाल” निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दो गर्भधारण के बीच कम से कम तीन वर्ष का अंतर रखना आवश्यक है। इससे मां के शरीर को पर्याप्त समय मिलता है।

जिससे एनीमिया, समयपूर्व प्रसव, कम वजन वाले शिशु के जन्म तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही, यह अनियोजित गर्भधारण की रोकथाम, बच्चों के बेहतर पोषण एवं विकास तथा परिवार की प्रभावी योजना बनाने में भी सहायक है।

उन्होंने बताया कि इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत ‘बास्केट ऑफ चॉइस’ की अवधारणा के अनुसार पात्र दंपतियों को इंटरवल आईयूसीडी, प्रसवोत्तर आईयूसीडी, अंतरा इंजेक्शन सहित विभिन्न अस्थायी एवं स्थायी गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी, परामर्श एवं निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली प्रत्येक महिला को डिस्चार्ज से पूर्व परिवार नियोजन संबंधी परामर्श दिया जाता है, ताकि वह अपनी स्वास्थ्य स्थिति, आवश्यकता और परिवार की योजना के अनुरूप उपयुक्त गर्भनिरोधक विकल्प का स्वैच्छिक चयन कर सके।

आशा, एएनएम तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी समुदाय स्तर पर पात्र दंपतियों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य प्रत्येक पात्र दंपति तक गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और सुलभ परिवार नियोजन सेवाएं पहुंचाकर स्वस्थ मां, स्वस्थ शिशु और स्वस्थ परिवार सुनिश्चित करना है।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी योगेश रघुवंशी ने बताया कि इंटरवल आईयूसीडी अपनाने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2023-24 में 12,547, वर्ष 2024-25 में 15,036 तथा वर्ष 2025-26 में 19,159 महिलाओं ने इस सेवा का लाभ उठाया। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (1 अप्रैल से 30 जून) में ही 5,023 महिलाओं ने इंटरवल आईयूसीडी अपनाया।

उन्होंने बताया कि त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन ‘अंतरा’ की स्वीकार्यता में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

वर्ष 2023-24 में 10,197, वर्ष 2024-25 में 12,429 तथा वर्ष 2025-26 में 13,805 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन की सेवा प्राप्त की। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 3,019 महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया।

योगेश रघुवंशी ने बताया कि प्रसवोत्तर आईयूसीडी को भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपनाया है। वर्ष 2023-24 में 16,198, वर्ष 2024-25 में 18,461 तथा वर्ष 2025-26 में 17,458 महिलाओं ने इस विकल्प को चुना।

वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 4,165 महिलाओं ने प्रसवोत्तर आईयूसीडी की सुविधा प्राप्त की। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि जनपद में आधुनिक अस्थायी परिवार नियोजन साधनों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र दंपति तक गुणवत्तापूर्ण परिवार नियोजन सेवाएं, समय पर परामर्श और स्वैच्छिक विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, ताकि स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button