केवल शास्त्रों का अध्ययन पर्याप्त नहीं -मुक्तिनाथानंद
ईश्वर प्राप्ति मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़।केवल शास्त्रों का अध्ययन ईश्वर प्राप्ति नहीं। गुरुवार को प्रातः कालीन सत् प्रसंग में रामकृष्ण मठ अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि
मनुष्य जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और ईश्वर की प्राप्ति के लिए मिला है। स्वामी ने रामकृष्ण देव के उपदेशों के माध्यम से यही संदेश दिया कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर का साक्षात्कार करना है।
इसके लिए केवल शास्त्रों का अध्ययन पर्याप्त नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव और साधना आवश्यक है। वेदांत का विचार मार्ग सिद्धांत रूप में सरल प्रतीत होता है कि मनुष्य स्वयं को शरीर नहीं, बल्कि शुद्ध आत्मा माने।
किंतु व्यवहारिक जीवन में इस सत्य का अनुभव करना अत्यंत कठिन है। मनुष्य की देह-बुद्धि इतनी गहरी होती है कि केवल तर्क और चर्चा से उसका नाश नहीं होता। निरंतर साधना, ध्यान और ईश्वर की कृपा से ही आत्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है।
स्वामी यह भी बताते हैं कि केवल पुस्तकों का ज्ञान ईश्वर प्राप्ति का साधन नहीं बन सकता। किसी स्थान या व्यक्ति के बारे में पढ़ना एक बात है, उसके बारे में सुनना उससे बेहतर है, लेकिन सबसे श्रेष्ठ उसका प्रत्यक्ष अनुभव करना है।
इसी प्रकार ईश्वर के विषय में पढ़ने से ज्ञान तो मिलता है, परंतु वास्तविक शांति और विश्वास तभी आता है जब मनुष्य ईश्वर का अनुभव करता है। उस अनुभव के बाद सभी शंकाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं।
जीवन में प्राथमिकता का प्रश्न भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सांसारिक शिक्षा, धन और प्रतिष्ठा उपयोगी हैं, परंतु इन्हें जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए।
यदि मनुष्य केवल अपरा विद्या अर्थात बाहरी ज्ञान में उलझकर परा विद्या अर्थात आत्मज्ञान को भूल जाए, तो उसका जीवन अधूरा रह जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक कार्यों के साथ-साथ आध्यात्मिक साधना के लिए भी समय निकालना चाहिए।
स्वामी ने ‘ज्ञान’ और ‘विज्ञान’ के बीच का अंतर भी सरल उदाहरण से समझाया। दूध के गुणों के बारे में पढ़ लेना ज्ञान है, लेकिन दूध पीकर उसकी तृप्ति का अनुभव करना विज्ञान है।
उसी प्रकार ईश्वर के विषय में शास्त्र पढ़ना ज्ञान है, जबकि ईश्वर को अपने जीवन में अनुभव करना विज्ञान है। यही अनुभव मनुष्य के जीवन को पूर्णता प्रदान करता है।
स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि कि मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति है।सांसारिक कार्यों का निर्वाह करते हुए भी इस मूल उद्देश्य को कभी नहीं भूलना चाहिए। जब ज्ञान, भक्ति और साधना का समन्वय होता है, तब जीवन में वास्तविक शांति,
आनंद और आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। यही श्री रामकृष्ण देव के उपदेशों का सार है, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में आध्यात्मिक जागरण और ईश्वर के साक्षात्कार की ओर प्रेरित करता है।



