श्रीलंका एनआईएफएस निदेशक का एनबीआरआई आगमन
अनुसंधान के क्षेत्र में दो देशों के बीच हुआ विचार विमर्श

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में दो देशों के बीच गहन विचार विमर्श सत्र चलाया गया।
शुक्रवार को श्रीलंका के कैंडी स्थित राष्ट्रीय मौलिक अध्ययन संस्थान (एनआईएफएस) के निदेशक प्रो. डगलस सिरिल अभयविक्रम विजेसुंदरा ने राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान का दौरा किया।
दौरे के दौरान प्रो. विजेसुंदरा ने एनबीआरआई के क्षेत्र समन्वयकों एवं वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया तथा भविष्य में वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
ग्लैडियोलस कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित इस संवाद के दौरान पारस्परिक रुचि के संभावित क्षेत्रों तथा संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करने के विभिन्न अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
जिसमें एनबीआरआई एवं आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने कहा कि प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों के दौरे सार्थक वैज्ञानिक संवाद तथा विचारों, विशेषज्ञता और अनुसंधान अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद से संस्थानों को एक-दूसरे के कार्यक्षेत्रों को समझने तथा उन क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलती है। जहाँ उनकी वैज्ञानिक क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं।
डॉ. अहमद ने आशा व्यक्त की कि प्रो. डगलस सिरिल अभयविक्रम विजेसुंदरा एवं एनआईएफएस के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई यह बातचीत एनबीआरआई और एनआईएफएस के बीच, विशेष रूप से वनस्पति एवं पादप विज्ञान के क्षेत्रों में, अधिक निकट सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।
उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान, वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं ज्ञान का आदान-प्रदान, अनुसंधान सुविधाओं का साझा उपयोग, क्षमता निर्माण, पादप विविधता एवं संरक्षण, पादप प्रवर्धन, पादप जैवप्रौद्योगिकी तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ हैं।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न देशों के संस्थानों के बीच वैज्ञानिक साझेदारियाँ शोधकर्ताओं को एक-दूसरे से सीखने तथा उभरती हुई चुनौतियों के समाधान के लिए विविध विशेषज्ञताओं को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करती हैं।
ऐसी साझेदारियाँ युवा वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों के लिए संयुक्त शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों में भागीदारी के अवसर भी सृजित कर सकती हैं तथा दीर्घकालिक वैज्ञानिक संबंधों को सुदृढ़ कर सकती हैं।
डॉ. अहमद ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ सार्थक संवाद के लिए प्रो. विजेसुंदरा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह दौरा आने वाले वर्षों में एनबीआरआई और एनआईएफएस के बीच निरंतर एवं सुदृढ़ वैज्ञानिक सहयोग की आधारशिला बनेगा।
वहीं संस्थान के वैज्ञानिक-जी डॉ. समीर सावंत एवं क्षेत्र समन्वयकों द्वारा प्रो. विजेसुंदरा के स्वागत से हुआ। इसके पश्चात क्षेत्र समन्वयकों एवं उपस्थित वैज्ञानिकों का परिचय कराया गया।
इस दौरान वनस्पति एवं पादप विज्ञान तथा संबंधित क्षेत्रों में भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा के लिए एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।
अपने दौरे के अंतर्गत प्रो. विजेसुंदरा ने संस्थान की विभिन्न सुविधाओं एवं आकर्षणों का अवलोकन किया। इनमें हरबेरियम, एक्सपोज़िशन, वनस्पति उद्यान, कैक्टस हाउस, बोनसाई हाउस, स्वस्तिक कमल उद्यान, गुलदाउदी प्रवर्धन इकाई, पादप ऊतक संवर्धन सुविधा तथा हेरिटेज बरगद वृक्ष शामिल रहे।
भ्रमण के दौरान उन्होंने संस्थान के समृद्ध वनस्पति संग्रह, विविध पादप प्रजातियों, विषयगत उद्यानों तथा विशिष्ट पादप प्रवर्धन एवं ऊतक संवर्धन सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर उन्हें संस्थान के अनुसंधान अवसंरचना, पादप संरक्षण संबंधी पहलों तथा विभिन्न पादप प्रजातियों के संरक्षण, प्रवर्धन एवं वैज्ञानिक अध्ययन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गयी ।
संस्थान के विषयगत उद्यानों एवं विशिष्ट सुविधाओं ने वनस्पति अनुसंधान, बागवानी नवाचार तथा पादप विविधता के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में संस्थान के कार्यों को भी प्रदर्शित किया।
प्रो. विजेसुंदरा ने संस्थान की वैज्ञानिक अवसंरचना, वनस्पति संग्रहों एवं विशिष्ट अनुसंधान सुविधाओं में रुचि व्यक्त की तथा भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों से संवाद कर उनकी चल रही अनुसंधान गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
दोनों संस्थान वनस्पति एवं पादप विज्ञान, सहयोगात्मक अनुसंधान, वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं। इससे दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।



