ट्यूबरक्यूलोसिस के निदान और अनुसंधान के लिए कार्यशाला
सटीक टीबी निदान के लिए एनजीएस

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। ट्यूबरक्यूलोसिस के निदान और अनुसंधान के लिए कार्यशाला की गयी। सोमवार को एसजीपीजीआई के
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के बीएसएल3 टीबी लैब में 10 से 12 सितंबर तक नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग पर पहली हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था सीक्वेंस से समाधान तक: सटीक टीबी निदान के लिए एनजीएस किया गया। जिसे
संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आरके धीमन के मार्गदर्शन में, प्रो. ऋचा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के माध्यम से आईओसीएल के उदार सीएसआर सहयोग से संस्थान ने नवीनतम एनजीएस प्लेटफॉर्म, इलुमिना एमआईसेक आई100प्लस प्राप्त किया।
इस कार्यशाला का आयोजन ट्यूबरक्यूलोसिस के निदान और अनुसंधान के लिए अनुक्रमण प्रौद्योगिकी को लागू करने के उद्देश्य से किया गया था।
संस्थान में टीबी के लिए एनजीएस सुविधा पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में पहली है और यह देश में तपेदिक के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय भूमिका निभाएगी और हमारे प्रधानमंत्री द्वारा घोषित रोग के उन्मूलन की कुंजी होगी।
एक ही अनुक्रमण प्रक्रिया से रोगजनक की पहचान की जा सकती है और साथ ही कई दवाओं के प्रति प्रतिरोध से जुड़े उत्परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है। जिससे हफ्तों का इंतजार दिनों में बदल जाता है।
देश भर के मेडिकल कॉलेजों, डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों के कुल 15 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। जिसका उद्देश्य उन्हें प्रौद्योगिकी का पूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
इलुमिना डीएनए प्रेप और डीपलेक्स वर्कफ़्लो का उपयोग करके लक्ष्य संवर्धन और लाइब्रेरी तैयार करना, पीसीआर क्लीन-अप, लाइब्रेरी मात्रा निर्धारण, पूलिंग और एमआईसेक 1100 प्लस पर रन सेट-अप, इसके बाद बायोइन्फॉर्मेटिक्स और सीक्वेंसिंग डेटा विश्लेषण का व्यावहारिक अनुभव।
उन्होंने अपने केंद्रों में एनजीएस प्रयोगशाला स्थापित करना और टीबी निदान और अनुसंधान में प्रौद्योगिकी को सीधे लागू करना सीखा।
इस कार्यक्रम का आयोजन माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर और बीएसएल3 टीबी लैब की नोडल अधिकारी डॉ. ऋचा मिश्रा और संकाय सदस्यों की टीम द्वारा किया गया। जिसमें डॉ. विक्रमजीत सिंह, डॉ. अक्षय कुमार आर्य, डॉ. आशिमा जमवाल, डॉ. सना इस्लाही और डॉ. रोम्या सिंह।
कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान निदेशक पद्म श्री प्रोफेसर (डॉ.) राधा कृष्ण धीमान द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में किया।
प्रख्यात वक्ताओं में टाटा मेडिकल सेंटर, कोलकाता के प्रयोगशाला विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. संजय भट्टाचार्य, लखनऊ स्थित सीबीएमआर के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रभाकर यादव, रायबरेली स्थित एनआईपीईआर के
रामलिंगस्वामी फेलो डॉ. अभिषेक डे ने विभिन्न रोगों में आरएनए संरचनात्मक परिदृश्यों पर प्रकाश डाला। साथ ही लखनऊ स्थित सीबीएमआर के सहायक प्रोफेसर डॉ. शिशिर कुमार गुप्ता ने तपेदिक के लिए एनजीएस डेटा विश्लेषण पर बात की।
वेट लैब का सहयोग इलुमिना और प्रेमास लाइफ साइंसेज द्वारा प्रदान किया गया।
तीन दिनों के अंत तक, प्रतिभागियों ने टीबी निदान के लिए नमूने से लेकर अनुक्रमण और परिणाम तक की पूरी एनजीएस प्रक्रिया को पूरा कर लिया था।
जिससे उन्हें अपने केंद्रों में एनजीएस कार्यप्रणाली स्थापित करने और अपने रोगियों में तपेदिक और अन्य संक्रामक रोगों के तेजी से, अधिक सटीक निदान और प्रबंधन के लिए इसे लागू करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक आधार प्राप्त हुआ।


