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हर 100 किमी पर हो,एक ट्रामा सेंटर -दयाशंकर सिंह

परिवहन मंत्री ने सड़क सुरक्षा कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलन कर किया शुभारंभ

 

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। हर एक सौ किलो मीटर par ट्रामा सेंटर होना चाहिए। हम एक्सप्रेस वे बना सकते हैं तो ट्रामा सेंटर भी बनाना होगा। जिससे गोल्डन टाइम में लोगों को उपचार मिल सकेगा।

जिससे सड़क हादसों की मृत्यु दर में कमी आएगी। यह बातें सोमवार को

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने लोक निर्माण विभाग के विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता के दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ पर कहा।

उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला सड़क सुरक्षा अभियान में मददगार साबित होगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से विभागीय अधिकारी और अधिक दक्ष होकर क्षेत्र में जाएंगे और सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन और बेहतर ढंग से कराना सुनिश्चित कर सकेंगे।

परिवहन मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा में होने वाली मृत्यु के आंकड़ों में कमी लाने के लिए जन जागरूकता सबसे अहम है। सरकार का दायित्व नियम बनाना एवं उसका पालन कराना है, जबकि लोग यदि अपनी दिनचर्या में सड़क सुरक्षा के नियमों का अनुपालन करें तो सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु के आंकड़ों को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मीडिया इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार द्वारा भी डीलर पॉइंट पर दो पहिया वाहनों की बिक्री के साथ ही दो हेलमेट का रूल अनिवार्य किये जाने का नियम बनाया गया है। इसी प्रकार ’’नो हेलमेट, नो फ्यूल’’ का भी नियम भी सरकार बना चुकी है, लेकिन जन जागरूकता के अभाव में इसमें यथोचित लाभ हमें अभी नहीं प्राप्त हो पा रहा है।

उन्होंने लोगों से दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट स्वयं पहनने एवं पीछे बैठे व्यक्ति को भी पहनने के लिए प्रेरित करने की अपील की। साथ ही उन्होंने चार पहिया वाहनों के चालकों से अपील करते हुए कहा कि सीट बेल्ट का इस्तेमाल अवश्य करें। उन्होंने ओवर स्पीडिंग ड्रंक एंड ड्राइविंग न करने एवं सड़क सुरक्षा संबंधित नियमों का पालन करने को कहा।

परिवहन मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा जुर्माना लगाने का लक्ष्य लोगों को चेतावनी देना है ताकि उनके जीवन की रक्षा हो सके। जिस प्रकार कुम्भकार घड़े बनाते समय शक्ति और नरमी दोनों का इस्तेमाल करता है वैसे ही परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी भी कार्य करते हैं।

जिनका मुख्य लक्ष्य लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाना है। नियमों का अनुपालन बेहद जरूरी है इसके अभाव में कोई भी कानून प्रभावी नहीं रह सकता। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए की नियमों के अनुपालन कड़ाई से करें किसी भी प्रकार की नियमों में छूट न दी जाए। ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियमों का पूरा पालन कड़ाई से कराया जाए।

100किमी की दूरी पर हो एक ट्रामा सेंटर- दयाशंकर सिंह

परिवहन मंत्री ने कहा कि एक्सप्रेस-वे पर यूपीडा होल्डिंग एरिया एवं डारमेट्री बनाने पर विचार करें, जिससे कि वाहनों को सुरक्षित खड़ा कराया जा सके और लम्बी दूरी के चालकों को ठहरने का भी अवसर मिल सके।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना के पश्चात घायलों को हास्पिटल ले जाने में समय लगता है और एक्सप्रेस-वे पर ट्रामा सेंटर की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए 100 किमी की दूरी पर एक ट्रामा सेंटर बनाने पर विचार किया जाए। श्री सिंह ने टी प्वाइंट पर मिल रहे छोटी सड़कों पर ब्रेकर बनाने का सुझाव दिया और जगह-जगह पर साइनेज लगाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में दुर्घटना होने से रोका जा सकता है। साथ ही उन्होंने उपस्थित विभाग के अधिकारीयों को रोड सेफ्टी की शपथ दिलाई। इसी क्रम में

अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए सबसे अधिक सड़क ट्रांसपोर्टेशन का इस्तेमाल किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा सड़कों पर सुरक्षा के सभी इंतजाम किये जा रहे हैं।

सभी स्टेक होल्डर और विभागों के मिले जुले प्रयास से ही सड़क सुरक्षा को और बेहतर किया जा सकता है। परिवहन निगम लम्बी यात्रा की दूरी वाली बसों में दो ड्राइवर के विकल्प पर काम कर रही है, इससे दुर्घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने पैदल यात्रियों एवं दो पहिया वाहनों को सड़क पर अधिक स्पेस देने पर बल दिया।

प्रमुख सचिव, पीडब्लूडी, अजय चौहान ने कहा कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं मीडिया के सामूहिक प्रयास से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि चार महत्वपूर्ण बिन्दुओं 04-ई (एजूकेशन, एनफोर्समेंट, इन्जीनियरिंग एवं इमरजेंसी केयर) के माध्यम से रोड एक्सीडेंट को मिनिमाइज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए रोड साइड एमेनिटीज की बजट की मांग की गई है। वहीं

परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिवहन विभाग के अधिकारियों को जोड़ने का लक्ष्य है, ताकि फील्ड में जाकर सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर सके। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन टीम लगातार फील्ड में काम कर रही है।

परिवहन विभाग द्वारा ओवरलोड एवं ओवर स्पीड वाले वाहनों का चालान किया जा रहा है। सड़क सुरक्षा से संबंधित गीत को जिला प्रशासन के माध्यम से चलवाया जा रहा है एवं स्कूलों में भी सड़क सुरक्षा के कार्यक्रम आयोजित कराये जा रहे हैं।

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