
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद हादसे की वजह को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चलने और वहां पानी जमा होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत की नींव पहले से कमजोर थी। ऐसे में पुरानी इमारत में चल रहे निर्माण कार्य ने भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, बेसमेंट में चल रहा निर्माण कार्य ही इमारत गिरने की वजह था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। पुलिस और संबंधित एजेंसियां निर्माण कार्य, भवन की स्थिति, अनुमति और संरचनात्मक सुरक्षा समेत तमाम पहलुओं की जांच कर रही हैं।
बेसमेंट में जमा हो रहा था पानी, निर्माण कार्य की होगी जांच
स्थानीय निवासी राजेन छेत्री के मुताबिक, हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। उनका दावा है कि काम के दौरान बेसमेंट में पानी जमा होने लगा था और इमारत की नींव भी कमजोर थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 20 साल पुरानी इस इमारत में लंबे समय से पर्याप्त रखरखाव नहीं हुआ था। बारिश के बीच बेसमेंट में निर्माण कार्य चलना अब हादसे की जांच के दौरान महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि बेसमेंट में निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्माण के दौरान भवन की संरचना या नींव पर किसी तरह का असर पड़ा था या नहीं।
‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था पीजी
ढही हुई इमारत का इस्तेमाल छात्रों के पीजी के रूप में किया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर इसे ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था। बताया गया है कि इमारत करीब 20 वर्ष पुरानी थी और इसमें लगभग 15 कमरे थे। प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के प्रमुख हिस्सों के नजदीक है। इस वजह से इलाके में बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे में प्रभावित इमारत में केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के छात्र भी रहते थे। इनमें कई आसपास के कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे। एक स्थानीय निवासी के अनुसार, पीजी में प्रति बिस्तर करीब 12 हजार रुपये तक किराया लिया जा रहा था।
बारिश के बीच संकरी गलियों में चला रेस्क्यू ऑपरेशन
दिल्ली में शुक्रवार से लगातार बारिश हो रही है। हादसे के बाद संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों के कारण राहत और बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुलिस और राहत दलों के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने भी अपने स्तर पर मलबा हटाकर लोगों को निकालने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस, दमकल विभाग, कैट एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के साथ एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव अभियान में जुट गई। अब तक कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है।
एम्स में एक की मौत, दो घायलों की हालत गंभीर
एम्स सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल लाए गए चार घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई गई है। वहीं एक व्यक्ति को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया। एक बचावकर्मी को भी अस्पताल ले जाया गया था, जिसे उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
मालिक की तलाश, भवन की अनुमति और सुरक्षा भी जांच के घेरे में
पुलिस ने इमारत के मालिक की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। हादसे के बाद जांच में इमारत के निर्माण, बेसमेंट में किए जा रहे काम, उसकी अनुमति, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और रखरखाव से जुड़े पहलुओं को अहम माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में मकानों को पीजी में तब्दील किया गया है और कई संपत्ति मालिक खुद वहां नहीं रहते। ऐसे में पुराने भवनों में सुरक्षा मानकों के पालन और नियमित रखरखाव की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इमारत की कमजोरी का कारण क्या था और बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य का ढहने की घटना से कोई सीधा संबंध था या नहीं।



