उत्तर प्रदेशजीवनशैली

विवेकानन्द अस्पताल में मना स्वतंत्रता दिवस

मठ अध्यक्ष ने किया ध्वजारोहण

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। रामकृष्ण मठ में

 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। मठ अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द द्वारा ध्वजारोहण किया गया।

जिसमें भारी संख्या में रामकृष्ण संघ के संन्यासी व भक्तगण उपस्थित होकर झंडारोहण के पश्चात संन्यासियों द्वारा राष्ट्रगान व वन्देमातरम गीत गाया गया। साथ ही

मठ के कार्यक्रम समाप्त करने के पश्चात रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम द्वारा संचालित प्रकल्प विवेकानन्द कॉलेज ऑफ नर्सिग में झंडारोहण किया गया।

इस अवसर पर कालेज की प्रधानाचार्या, संकाय सदस्य के साथ ही साथ एमएसी, बीएससी व जीएनएम की लगभग 500 छात्राये एकत्रित रही।

स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने ध्वज फहराया तदोपरान्त नर्सिग विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक राष्ट्रगान व वन्देमातरम गीत गाया गया ।

स्वामी ने सभा में उपस्थित सभी छात्राओं एवं संकाय सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यहां पर उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का मूल कर्तव्य है कि अपनी दक्षता के अनुसार अपना देश के प्रगति एवं विकास में दे।

विवेकानन्द अस्पताल में भी स्वामी मुक्तिनाथानन्द द्वारा झंडारोहण प्रातः 9 बजे किया गया उस दौरान अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही साथ सैकड़ो की संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने संस्थान के कर्मचारियों, डाक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, उपचारिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि त्याग से बड़ा कोई कार्य नही है साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि जीवन में देने से घटता नही

बल्कि बढता है जैसे रक्तदाता जब अपना स्वैक्षिक रक्तदान करता है तो उसके शरीर में रक्त की प्रतिपूर्ति ताजा रक्त स्वतः बन जाता है।

 स्वामी ने कहा कि हमारा अस्पताल किसी अन्य अस्पतालो का अनुसरण नही करता है बल्कि अपनी सेवाभाव के कारण अनूठा है। उन्होंने कहा हमे गर्व है कि विवेकानन्द अस्पताल न केवल एक सेवा अस्पताल है।

जहाँ रियायती दरों पर सर्वोत्तम सेवा चिकित्सा मिलती है, बल्कि जीव सेवा ईश्वर सेवा को मानती है। उन्होंने कहा कि 500 शय्या युक्त एनएबीएच तथा एनएबीएल राष्ट्रीय स्वीकृति के साथ यह संस्था अपनी सेवा निरन्तर जारी रखा है।

स्वामी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में भी प्रतिष्ठान का अवदान अनन्य है तथा लखनऊ का प्रथम नर्सिंग कॉलेज इस संस्थान का ही है। जहाँ से बीएससी नर्सिंग एवं एमएससी नर्सिंग डिग्री कोर्स तथा जीएनएम डिप्लोमा नर्सिंग कोर्स सफलता के साथ चल रहा है।

जिससे स्वामी की इच्छानुसार नारी शिक्षा की अग्रगति हो। इसके साथ-साथ हमारे 14 विषयों में पोस्टग्रेजुएट डी.एन.बी. मेडिकल कोर्स तथा 8 विषयों मे पैरामेडिकल डिप्लोमा कोर्स भी संचालित हो रहे है।

स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने संस्था के सभी कर्मचारियों, पैरामेडिकल स्टाफ, उपचारिकाओं एवं छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि भारत माता को आगे बढ़ाने के लिए स्वामी विवेकानन्द का पदांक अनुसरण करें।

तदनुसार अपने को श्रृंखला परायण करें तथा नियमों का पालन करें। इस प्रकार कर्म को सेवा में रूपांतरित करते हुए निरंतर आनन्द में रहे एवं अपना जीवन भी सफल करें। संस्थान की गरिमा में सेवाधारा को भी आगे बढ़ाएं एवं भारत माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

  स्वामी मुक्तिनाथानंद के सम्बोधन में.

पहला महत्वपूर्ण विचार ‘त्याग और सेवा’ के दो आदर्शों का है। स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन और संदेश में त्याग तथा सेवा को विशेष स्थान दिया।

त्याग का अर्थ केवल सांसारिक वस्तुओं को छोड़ना नहीं, बल्कि स्वार्थ, अहंकार और व्यक्तिगत लाभ की भावना से ऊपर उठना है। इसी प्रकार सेवा का अर्थ है।

बिना किसी भेदभाव के दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करना। इन दोनों आदर्शों के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकता है।

दूसरा बिंदु संस्थागत सेवा का है। विवेकानंद अस्पताल को ऐसी संस्थाओं के रूप में देखा गया है, जहाँ सेवा को व्यापारिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से किया जाता है।

प्रत्येक रोगी को केवल एक मरीज नहीं, बल्कि ईश्वर के जीवंत स्वरूप अर्थात् ‘नारायण’ के रूप में देखना इस दृष्टिकोण की विशेषता है।

जब नर्स, चिकित्सक और अन्य कर्मचारी रोगी की सेवा इस भावना से करते हैं, तब चिकित्सा केवल उपचार नहीं रह जाती, बल्कि वह मानव-सेवा और ईश्वर-सेवा का रूप ले लेती है।

तीसरा विचार संतुलित विकास का है। संस्था के विकास को तीन आयामों गहराई, ऊँचाई और विस्तार के माध्यम से समझाया गया है।

गहराई का अर्थ है मूल्यों, ज्ञान और सेवा-भाव में मजबूती; ऊँचाई का अर्थ है उत्कृष्टता और उच्च आदर्शों की ओर बढ़ना; तथा विस्तार का अर्थ है सेवा के क्षेत्र और सुविधाओं को व्यापक बनाना।

इन तीनों का संतुलन किसी भी संस्था को समग्र रूप से विकसित करता है।

अंतिम बिंदु आध्यात्मिक विरासत का है। संस्था के मार्गदर्शन और इतिहास में स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा को महत्वपूर्ण माना गया है। उनकी शिक्षाएँ आज भी सेवा, शिक्षा और मानव कल्याण के लिए दिशा प्रदान करती हैं।

स्वामी ने रामकृष्ण, माँ सारदा व स्वामी विवेकानन्द एवं भारत माता के चरणों में प्रार्थना करते हुए स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर सबको बधाइयाँ एवं अभिनन्दन ज्ञापन किया तथा अन्त में उपस्थित सभी लोगों को सूक्ष्म जलपान कराया गया। वहीं

अस्पताल में हुए झंडा रोहण कार्यक्रम का सजीव प्रसारण यूट्यूब चैनेल ‘रामकृष्ण मठ लखनऊ’ के माध्यम से किया गया।

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