उन्नत घाव बंद करने की तकनीकि पर सीएमई
संस्थान निदेशक ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ

लखनऊ, भारत प्रकाश न्यूज़। डॉक्टरों ने उन्नत घाव बंद करने की तकनीकि पर गहन चर्चा की। शनिवार को
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा “क्लोज़िंग द गैप्स थ्रू एडवांस्ड वाउंड क्लोजर टेक्निक्स एक्सपर्ट ओपिनियन ऑन एडवांसिंग पेशेंट हीलिंग एंड एक्सपीरियंस इन गयनाइकोलॉजिकल सर्जरीज ” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ. नीतू सिंह के नेतृत्व में किया गया । कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान निदेशक प्रो सीएम सिंह तथा कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. सुब्रत चंद्र सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे ।
इस अवसर पर डॉ. पूजा, डॉ. मालविका, डॉ. देवयानी, समस्त प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट्स तथा नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहे। सीएमई में 70 से अधिक चिकित्सकों, संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया।
जिसमें आरएमएलआईएमएस, केजीएमयू, एसजीपीजीआई, एम्स रायबरेली, एचआईएमएस बाराबंकी सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे । रेनबो हॉस्पिटल, दिल्ली की विशेषज्ञ डॉ. जयश्री सुंदर ने बतौर अतिथि वक्ता अपने अनुभव एवं विशेषज्ञ विचार साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्त्री रोग संबंधी सर्जरी में आधुनिक घाव बंद करने की तकनीकों के महत्व पर चर्चा करना रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि उचित स्यूचर (टांके) का चयन और उन्नत घाव बंद करने की तकनीक बेहतर घाव भरने, संक्रमण एवं ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं को कम करने तथा मरीज के आराम और अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सीएमई के दौरान स्यूचर के प्रकार एवं स्त्री रोग संबंधी विभिन्न सर्जरी में उनके उचित उपयोग पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किया गया।
इसके बाद “क्लोज़िंग the गैप : एडवांस्ड वाउंड क्लोजर स्ट्रेटेजीज इन ओबगिन सर्जरीज ” विषय पर पैनल चर्चा हुई। जिसमें विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और नवीन घाव बंद करने की विधियों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण हैंड्स-ऑन स्यूचरिंग वर्कशॉप रहा। इसमें स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं प्रतिभागी चिकित्सकों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में स्यूचरिंग पैड पर विभिन्न प्रकार की टांका लगाने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रतिभागियों ने टिश्यू हैंडलिंग, उचित स्यूचर के चयन तथा प्रभावी घाव बंद करने की तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि केवल व्याख्यान या सैद्धांतिक प्रशिक्षण से सर्जिकल दक्षता विकसित नहीं की जा सकती। इसके लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञों की निगरानी में अभ्यास और निरंतर कौशल-विकास आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सीएमई को व्यावहारिक एवं कौशल-आधारित बनाया गया।
कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित एवं मरीज-केंद्रित सर्जिकल उपचार को अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक एवं उचित घाव बंद करने की तकनीकों के प्रयोग से बेहतर घाव भरने, जटिलताओं में कमी, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ तथा स्त्री रोग संबंधी सर्जरी से गुजरने वाली महिलाओं के बेहतर उपचार अनुभव को सुनिश्चित किया जा सकता है।



