विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण के लिए लगाया शिविर
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जनकल्याणकारी पहल

लखनऊ,भारत प्रकाश न्यूज़। राजधानी में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जनकल्याणकारी पहल की गयी। गुरुवार को
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय के संरक्षण तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा
प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी, वरिष्ठ न्यायाधीश, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के कुशल मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की गई है।
जिसका उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न स्थानों में निवास कर रहे समस्त विस्थापित, अनुसूचित जनजाति, वनवासी व इसी प्रकृति के अन्य विशेष श्रेणी के ऐसे समुदाय जो
वन विभाग एवं प्रशासन के साथ वर्षों से अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, को मुख्यधारा से जोड़ना एवं उनके मूलभूत अधिकारों को संरक्षित करना है।
जिसकी शुरुआत जनपद बिजनौर से की गई है। जहां 01 जुलाई को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के उद्देश्यों के अनुरूप, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिजनौर के सहयोग से विस्थापित
मछुआरा समुदाय को लाभान्वित करने के लिए विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविर का मुख्य लक्ष्य प्रशासन और विस्थापित समुदाय के बीच की दूरी को समाप्त करना तथा यह
सुनिश्चित करना था कि ऐसे व्यक्ति न केवल अपने अधिकारों और संबंधित कानून के बारे में जागरूक हों बल्कि उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी प्राप्त हो।
यह विधिक साक्षरता शिविर समग्र विद्यालय, ग्राम-नवलपुर बैराज जनपद बिजनौर में आयोजित किया गया। जिसमें डॉ. मनु कालिया, सदस्य सचिव, उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ, संजय कुमार-VII जनपद न्यायाधीश,
बिजनौर, जसजीत कौर, जिलाधिकारी बिजनौर, स्वाती चंद्रा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डॉ. केजी सिंह पुलिस अधीक्षक बिजनौर, रणविजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर, जयसिंह कुशवाहा डीएफओ बिजनौर, रितु रानी एसडीएम बिजनौर, आलोक वर्मा, पी.
डी. (डीआरडीए) बिजनौर के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रतिभाग किया और उनके द्वारा विस्थापित मछुआरा समुदाय से जुड़े व्यक्तियों के अलावा अन्य जनमानस को भी उनके अधिकारों से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर एक विशेष लोक अदालत का भी आयोजन किया गया जिसमें सुलह समझौते के आधार पर 20 मामलों का निस्तारण किया गया।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ विस्थापित समुदाय के सबसे कमजोर सदस्य तक सीधे पहुंचाया जा सके। संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा
शिविर समापन की तिथि से 15 दिन के भीतर लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित करते हुए उन्हें राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान कराया जाएगा। जिसकी विस्तृत आख्या प्रशासन द्वारा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिजनौर को
उपलब्ध कराई जाएगी जो उसे उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को अग्रसारित करेंगे। शिविर स्थल पर भी नागरिकों द्वारा अपनी समस्याओं से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया जिसके समाधान के लिए अधिकारियों द्वारा उन्हें आश्वस्त किया गया।
यह भी प्रस्तावित किया गया कि विस्थापित शरणार्थियों द्वारा निवासित अन्य 04 कॉलोनी जिनमें घासी वाला, हेमराज, चांदपुरा, धर्मनगरी शामिल हैं, में भी ऐसे शिविर का आयोजन किया जाएगा।
उक्त शिविर देर सायंकाल तक चला। जिसमें बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं द्वारा अत्यधिक संख्या में उत्साह के साथ भाग लिया गया।
इस अवसर पर एक मेडिकल कैंप का भी आयोजन किया गया।साथ ही चिकित्सीय टीम की उपस्थिति में कुल 42 व्यक्तियों का चिकित्सीय परीक्षण किया गया व परामर्श एवं औषधियां प्रदान की गईं।



